ड्राइविंग लाइसेंस बनना होगा मुश्किल! अब सिफारिश नहीं, IP कैमरे तय करेंगे आपका टेस्ट
पीलीभीत में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में सिफारिशों पर अंकुश लगाने की तैयारी है। एआरटीओ कार्यालय के ड्राइविंग ट्रैक पर आईपी ...और पढ़ें

एआई इमेज
HighLights
ट्रैक पर सेंसर और कैमरे लगाने की तैयारी, तत्कालीन एआरटीओ वीरेंद्र सिंह ने भेजा था प्रस्ताव
जागरण संवाददाता, पीलीभीत। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए अब जुगाड़ और सिफारिश पर अंकुश लगाने की तैयारी है। एआरटीओ कार्यालय के ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर आइपी कैमरों और हाईटेक सेंसर से आवेदकों की ड्राइविंग पर नजर रखने की योजना है। हालांकि, इसके लिए भेजा गया प्रस्ताव अभी पास नहीं हुआ है। तत्कालीन एआरटीओ वीरेंद्र सिंह ने कैमरे लगाने के संबंध में प्रस्ताव भेजा था।
जिले में दो लाख 55 हजार 414 से अधिक दोपहिया वाहन, 21 हजार 536 कारें और करीब 20 हजार कमर्शियल वाहन पंजीकृत हैं। वहीं, जिले में कुल दो लाख 12 हजार 892 ड्राइविंग लाइसेंस धारक हैं।
इनमें एक लाख 73 हजार 958 पुरुष शामिल हैं। प्रस्ताव के तहत कैमरों की मदद से ड्राइविंग टेस्ट की निगरानी और रिकार्डिंग की जा सकेगी।
इससे परीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और अनियमितताओं पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है। मानकों के अनुरूप परीक्षण के आधार पर लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह बनाने का उद्देश्य है।
यह होता है आइपी कैमरा
आइपी यानी इंटरनेट प्रोटोकाल कैमरे ऐसे डिजिटल कैमरे होते हैं, जो नेटवर्क से वीडियो और अन्य डेटा भेजते हैं। इससे लाइव निगरानी के साथ वीडियो रिकार्डिंग भी की जा सकती है।
रिकार्डिंग को नेटवर्क वीडियो रिकार्डर (एनवीआर) या निर्धारित सर्वर पर सुरक्षित रखा जा सकता है। ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर इनका उपयोग होने पर कैमरों से प्राप्त फुटेज के आधार पर आवेदक की गतिविधियों की समीक्षा की जा सकती है।
हालांकि, वाहन की गति, इंडिकेटर, हेलमेट और सीट बेल्ट जैसी चीजों की स्वचालित पहचान कैमरे की क्षमता, साफ्टवेयर और लगाए गए सेंसर पर निर्भर करेगी। केवल आईपी कैमरा लगा देने से इन सभी की स्वत: जांच सुनिश्चित नहीं होती।
यह भी पढ़ें- पीलीभीत लेपर्ड सफारी: ₹17 करोड़ से बनेगी 26 किमी लंबी अभेद्य सुरक्षा दीवार, बंद होगा तेंदुए-मानव का संघर्ष
