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पीलीभीत में 17 साल बाद इंसाफ, 43 रुपये की मजदूरी पर काम करने से मना करने पर की थी पिटाई; दोषी को 1 साल की सजा

Published: Thu, 08 Oct 2026 05:36 AM (GMT+05:30)

पीलीभीत के लिलहर गांव में 43 रुपये की दैनिक मजदूरी पर काम करने से मना करने पर हुई मारपीट के ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

HighLights

  1. पीलीभीत में 17 साल बाद आया मारपीट मामले का फैसला।

  2. 43 रुपये मजदूरी पर काम न करने पर हुई थी पिटाई।

  3. दोषी श्यामाचरन को एक साल की सजा, प्रोबेशन का लाभ।

जागरण संवाददाता, पीलीभीत। बिलसंडा थाना क्षेत्र के ग्राम लिलहर में 43 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी पर काम करने से इन्कार के बाद हुई मारपीट के मामले में अदालत ने 17 साल बाद फैसला सुनाया। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन), कोर्ट नंबर-3 के पीठासीन अधिकारी मोहम्मद शहनवाज अहमद सिद्दीकी ने श्यामाचरन को मारपीट करने के मामले में एक साल के कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। प्रथम अपराध होने के कारण यूपी फर्स्ट आफेंडर एक्ट के तहत उसे प्रोबेशन का लाभ दिया गया और सजा एक साल के लिए स्थगित कर दी गई।

आठ अप्रैल 2009 को लिलहर निवासी पुत्तूलाल ने पुलिस को बताया था कि उनका बेटा लक्ष्मण मेहनत-मजदूरी कर परिवार चलाता है। श्यामाचरन और अन्य लोगों ने उसे 43 रुपये रोज की मजदूरी पर काम करने को कहा था। लक्ष्मण के मना करने पर गाली-गलौज के बाद लाठी-डंडों से मारपीट की गई। शोर सुनकर पुत्तूलाल और गांव के सोमेन्द्र कुमार और शंकरलाल मौके पर पहुंचे और लक्ष्मण को बचाया।

आरोपितों ने जान से मारने की धमकी भी दी थी। मेडिकल परीक्षण के बाद मुकदमे में धारा 324 जोड़ी गई। विवेचना के बाद श्यामाचरन और सोनकली के खिलाफ धारा 323, 324, 504 और 506 में आरोपपत्र दाखिल हुआ। सुनवाई के दौरान सोनकली की मृत्यु हो गई, इसलिए उसके खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर दी गई। अदालत में पुत्तूलाल और घायल लक्ष्मण के बयान दर्ज हुए। गवाहों के बयान और मेडिकल साक्ष्य के आधार पर श्यामाचरन को धारा 323 में दोषी ठहराया गया।

धारा 324, 504 और 506 में संदेह का लाभ देते हुए उसे दोषमुक्त कर दिया गया। अदालत ने दोषी को 25 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही राशि के प्रतिभू बंधपत्र पर प्रोबेशन अधिकारी के समक्ष पेश होने का आदेश दिया है। उसे एक साल तक शांति और सदाचार बनाए रखना होगा। शर्तों के उल्लंघन पर प्रोबेशन अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर अदालत सजा पर आगे सुनवाई करेगी।

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