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तराई की जड़ी-बूटियों पर होगा बड़ा शोध: ललित हरि आयुर्वेदिक कॉलेज में शुरू हो रही फार्माकोग्नासी लैब

Published: Thu, 01 Oct 2026 06:00 AM (IST)

पीलीभीत के ललित हरि राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में अत्याधुनिक फार्माकोग्नासी-क्रोमैटोग्राफी रिसर्च लैब स्थापित की जा रही है। यह लैब ...और पढ़ें

पीलीभीत का राज्य की आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज। जागरण

पीलीभीत का राज्य की आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज। जागरण

HighLights

  1. एचपीएलसी-टीएलसी से होगा औषधियों का मानकीकरण, तराई की जड़ी-बूटियों पर होगा शोध

वैभव मिश्रा, पीलीभीत। ललित हरि राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल काॅलेज में पीजी छात्रों के लिए अत्याधुनिक फार्माकोग्नासी-क्रोमैटोग्राफी रिसर्च लैब स्थापित की जा रही है। यह लैब प्रदेश के नौ राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल काॅलेजों में से चौथे कालेज के रूप में यहां लग रही है। इससे पहले यह सुविधा केवल लखनऊ, वाराणसी और अयोध्या के राजकीय आयुर्वेदिक कालेजों में ही उपलब्ध थी।

शासन से इसके लिए 90 लाख रुपये का बजट मिला है। उपकरणों की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कालेज में वर्तमान में 19 पीजी छात्र अध्ययनरत हैं।

अभी तक इन छात्रों को अपने शोध कार्य के लिए लखनऊ स्थित राजकीय आयुर्वेदिक काॅलेज, बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) और अन्य संस्थानों पर निर्भर रहना पड़ता था।

इससे न सिर्फ समय और धन की बर्बादी होती थी, बल्कि शोध कार्य में भी देरी होती थी। लैब बनने के बाद छात्र अपने कालेज में ही शोध पूरा कर सकेंगे।

काॅलेज की प्राचार्य डाॅ. अनुराधा शर्मा ने बताया कि यह लैब पीजी छात्रों के साथ-साथ आयुर्वेदिक औषधियों के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

उन्होंने कहा, फार्माकोग्नासी लैब में औषधीय पौधों की पहचान, उनके गुण, शुद्धता और मिलावट की जांच की जाती है। क्रोमैटोग्राफी तकनीक से दवाओं के मानकीकरण का काम होता है। इससे यह पता चलता है कि जो दवा बनाई गई है वह कितनी प्रभावी और सुरक्षित है।

बताया कि लैब में हाई परफारमेंस लिक्विड क्रोमैटोग्राफी (एचपीएलसी), थिन लेयर क्रोमैटोग्राफी (टीएलसी), स्पेक्ट्रोफोटोमीटर, एडवांस माइक्रोस्कोप, ड्रग टेस्टिंग किट और हर्बल एक्सट्रैक्ट मशीन जैसे आधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे।

पीलीभीत तराई क्षेत्र है और यहां कई औषधीय पौधे प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं, इसलिए यह लैब स्थानीय जड़ी-बूटियों पर शोध के लिए भी उपयोगी होगी।

इससे कालेज की ओपीडी में आने वाले मरीजों को भी शुद्ध और प्रमाणित दवाएं मिल सकेंगी। सरकार का उद्देश्य आयुर्वेदिक दवाओं को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाना है, इसलिए मानकीकरण की लैब को अनिवार्य किया गया है।

लैब में यह होता

फार्माकोग्नासी लैब में कच्ची जड़ी-बूटियों की वानस्पतिक पहचान, माइक्रोस्कोपिक जांच और मिलावट का पता लगाया जाता है। क्रोमैटोग्राफी लैब में एचपीएलसी और टीएलसी तकनीक से दवा में मौजूद सक्रिय तत्वों की मात्रा, शुद्धता और गुणवत्ता की जांच होती है। इससे नकली और असली औषधि में फर्क किया जाता है।

छात्रों को मिलेगा यह लाभ

19 पीजी छात्रों को अब शोध के लिए बाहर नहीं भटकना पड़ेगा। थीसिस का काम समय पर पूरा होगा। शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित होने से कालेज की रैंकिंग भी सुधरेगी। भविष्य में यहां से तैयार दवाओं का पेटेंट भी कराया जा सकेगा।

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