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मामा-नाना की 'पाठशाला' से सीखा अपराध, नर्सिंग छात्र ने खड़ा किया 100 करोड़ का साइबर ठगी नेटवर्क

Published: Mon, 21 Sep 2026 05:22 PM (IST)

पीलीभीत में एक जीएनएम छात्र ने अपने मामा-नाना से साइबर ठगी के गुर सीखकर 100 करोड़ रुपये से अधिक का ...और पढ़ें

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HighLights

  1. जीएनएम छात्र बना मास्टरमाइंड, म्यूल खातों से सौ करोड़ की ठगी

  2. एक खाते पर 30 हजार की ठगी, ठगी पर एक से दो प्रतिशत कमीशन

वैभव मिश्रा, पीलीभीत। ननिहाल में मामा और नाना ने भांजे को नर्सिंग के गुर नहीं, साइबर ठगी के तरीके सिखाए। भांजा इतना शातिर निकला कि उसने अपने गांव से बाहर आकर अपना अलग गिरोह खड़ा कर लिया और सौ करोड़ से अधिक की ठगी कर डाली। पकड़े जाने के बाद हुई पूछताछ में आरोपित मोहसिन ने ठगी की पूरी कहानी उगली।

सहायक पुलिस अधीक्षक नताशा गोयल ने आरोपितों के द्वारा ठगी करने वाले आरोपितों से पूछताछ की तो आरोपित मोहसिन ने बताया कि वह बरेली के महेंद्र गायत्री नर्सिंग होम में जीएनएम प्रथम वर्ष का छात्र है। उसका छोटा भाई मोबीन भी पढ़ा-लिखा है।

उसकी ननिहाल भोजीपुरा थाना क्षेत्र के गांव लखमनिया में है। वहीं के मामा तसलीम व नाना जमील ने उसे बताया कि गरीबों के खातों से कैसे लाखों रुपये कमाए जाते हैं। पहले वह उनकी बातें सुनता रहा, फिर उन्हीं के गांव के विशाल मौर्या, फरमान व राहुल के साथ मिलकर नया गिरोह बना लिया।

गिरोह का तरीका बेहद शातिर था। गिरोह के सदस्य बैंक की कार्यप्रणाली की पूरी जानकारी रखते थे। वे गांव-कस्बों में जाकर भोले-भाले लोगों और छोटे दुकानदारों को सरकारी योजना में खाता खुलवाने और 10 हजार रुपये इनाम देने का लालच देते।

कई लोग झांसे में आकर कागजात दे देते। खाता खुलते ही आरोपित उनका एटीएम, आधार, पैन, पासबुक और उसी आधार पर निकाली गई, नई सिम अपने पास रख लेते। इस तरह बैंक का पूरा कंट्रोल उनके हाथ में आ जाता।

गरीब खाताधारक को पता भी नहीं चलता कि उसका खाता ठगी के लिए इस्तेमाल हो रहा है। इसके बाद असली खेल शुरू होता। 47 बीईटी नाम की गेमिंग वेबसाइट पर गेम खिलाने और निवेश पर मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर देशभर के लोगों से रुपये मंगाए जाते।

पैसा सीधे इन्हीं म्यूल खातों में आता और तुरंत एटीएम से निकाल लिया जाता। आरोपितों का तर्क था कि कैश हाथ में रहेगा तो खाते पर शिकायत या होल्ड लगने के बाद भी नुकसान नहीं होगा। इस काम में कमाई भी तय थी।

एक खाता उपलब्ध कराने पर तीस हजार रुपये और कुल ठगी की रकम पर एक से दो प्रतिशत कमीशन मिलता था। मोहसिन ने अपने पिता मो. अमजद के एसबीआइ खाते में भी ठगी की रकम मंगाई, जिस पर पांच राज्यों की शिकायतें दर्ज हैं।

राहुल के केनरा बैंक के दो खातों पर 17-17 शिकायतें हैं। पकड़े जाने से बचने के लिए फर्जी आधार कार्ड रखे जाते थे, ताकि नई सिम ली जा सके। होटल में पहचान छिपाकर रुका जा सके।

गौनेरी निवासी दानिश अंसारी की शिकायत के बाद जब पुलिस ने शिकंजा कसा तो आरोपितों ने सबूत मिटाने शुरू कर दिए। कई मोबाइल तोड़कर फेंक दिए, सिम जला दिए और लैपटाप से डाटा डिलीट कर दिया।

मोबाइल का एक्सेस सरगना विशाल मौर्या के पास रहता था, जो किसी के पकड़े जाने पर जीमेल से रिमोटली पूरा डाटा साफ कर देता था, लेकिन इस बार पुलिस ने एनसीआरपी पोर्टल पर करीब दो सौ शिकायतों का जाल बिछाकर उन्हें दबोच लिया।

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