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न खाना बन रहा, न बच्चे पढ़ पा रहे... अनाज गोदामों से निकले 'भुनकों' ने नरक बनाई 6 गांवों की जिंदगी

Published: Tue, 18 Aug 2026 05:30 PM (IST)

पीलीभीत के ललौरीखेड़ा ब्लॉक के छह गांवों में अनाज गोदामों से निकल रहे भुनकों ने ग्रामीणों का जीवन दूभर कर ...और पढ़ें

हरचुइया गांव में घर में रखे बर्तन में गिरे कीड़े। जागरण

हरचुइया गांव में घर में रखे बर्तन में गिरे कीड़े। जागरण

HighLights

  1. शाम ढलते ही घरों में दाखिल हो जाते हैं कीड़े, अनाज गोदामों से आते ही कीड़े-मकौड़े

संवाद सूत्र, ललौरीखेड़ा (पीलीभीत)। वर्षा में कीड़ों का आना सामान्य बात है, लेकिन शहर से कुछ दूरी पर ललौरीखेड़ा ब्लाक मुख्यालय और उसके आसपास के गांवों के लिए यह एक स्थायी व गंभीर समस्या बन चुका है।

बरेली हाईवे के किनारे स्थित बड़े अनाज गोदामों से निकल रहे भुनकों के कारण हरचुइया, सैजना, खरुआ, बालपुर पट्टी व सियाबाड़ी पट्टी, ललौरीखेड़ा समेत लगभग आधा दर्जन गांवों के ग्रामीण परेशान हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि सिर्फ मानसून ही नहीं, बल्कि पूरे वर्ष इस समस्या का सामना करना पड़ता है। इसका कारण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर किए जाने वाले अनाज भंडारण है।

स्थिति यह है कि लोगों का घर में खाना भी मुश्किल हो गया है। शाम ढलते ही भुनके घरों में दाखिल हो जाते हैं। रात में लाइट जलाते ही यह मंडराने लगते हैं। लाइट बंद कर अंधेरे में बैठना पड़ता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पा रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि अनाज के भंडारण वाले इन बड़े परिसरों और गोदामों में कीटनाशक दवाओं का नियमित और उचित छिड़काव नहीं किया जाता है। स्थानीय लोगों ने अब जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से गोदामों का निरीक्षण कर फागिंग कराने की मांग की है।

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