होली 2026 पर 102 साल बाद चंद्र ग्रहण, इन राशियों पर पड़ेगा सीधा असर, ज्योतिष ने बताए बचाव के उपाय
वर्ष 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को होली पर 102 साल बाद फाल्गुन पूर्णिमा पर लगेगा। इसका पर्वकाल ...और पढ़ें


समय कम है?
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जागरण संवाददाता, पीलीभीत। खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टि से वर्ष 2026 की शुरुआत एक बड़ी घटना के साथ हो रही है। इस साल का पहला चंद्र ग्रहण तीन मार्च को होली के दिन लगने जा रहा है, जो पूरे 102 वर्षों के बाद फाल्गुन पूर्णिमा पर घटित होगा।
आचार्य पं. अंशुमान मिश्र ने बताया कि इस चंद्र ग्रहण का पर्वकाल मात्र 27 मिनट का रहेगा, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका प्रभाव देश-दुनिया और सभी राशियों पर व्यापक रूप से पड़ेगा। ग्रहण का सूतक काल तीन मार्च को सुबह 9:20 बजे से ही प्रारंभ हो जाएगा, जो ग्रहण की समाप्ति तक प्रभावी रहेगा।
ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है, इसलिए ग्रहण के दौरान मानसिक तनाव, भ्रम और स्मरण शक्ति में कमी जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं, साथ ही यह माता की सेहत को भी प्रभावित कर सकता है।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में होने वाला यह ग्रहण विशेष रूप से कला, संगीत और शिल्प से जुड़े व्यक्तियों के साथ-साथ संत समाज के लिए भी कष्टदायक हो सकता है। चूंकि ग्रहण मंगलवार को पड़ रहा है, इसलिए अग्निभय, चोरी और राजनीतिक उपद्रव की आशंका भी जताई गई है।
राशियों पर प्रभाव और अशुभ फलों से बचाव के उपाय
यह ग्रहण अलग-अलग राशियों के लिए मिश्रित परिणाम लेकर आएगा। वृष, मिथुन और तुला राशि वालों के लिए यह कार्य सिद्धि और धन लाभ लेकर आ रहा है, जबकि मेष, कर्क, सिंह, कन्या, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि के जातकों को स्वास्थ्य, धन हानि और मानसिक संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है।
अनिष्ट प्रभावों को दूर करने के लिए यथाशक्ति जप-पाठ और चंद्र-सूर्य की शांति करानी चाहिए। ग्रहण काल में 'श्रीमहामृत्युञ्जय मंत्र' का जप करना और समाप्ति पर 'छायापात्र दान' (कांस्ये की कटोरी में घी भरकर चेहरा देखकर दान करना) क्लिष्ट रोगों से मुक्ति दिलाता है।
