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UP के स्कूलों में 'बाल प्रहरी' रोकेंगे साइबर ठगी और मानव तस्करी, हर क्लास से चुने जाएंगे छात्र-छात्राएं

Published: Tue, 08 Sep 2026 07:29 PM (IST)

माध्यमिक विद्यालयों में 'एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग क्लब' गठित होंगे, जहाँ छात्र 'बाल प्रहरी' बनकर साइबर ठगी और मानव तस्करी से ...और पढ़ें

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HighLights

  1. नौ से 12वीं तक हर कक्षा से एक छात्र व एक छात्रा का होगा चयन

वैभव मिश्रा, पीलीभीत। साइबर ठगी, मानव तस्करी और फर्जी नौकरी के झांसे से विद्यार्थियों को बचाने के लिए अब विद्यार्थी खुद प्रहरी की भूमिका निभाएंगे। माध्यमिक शिक्षा परिषद के निर्देश पर जिले के माध्यमिक विद्यालयों में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग क्लब का गठन किया जाएगा। कक्षा नौ से 12 तक के छात्र-छात्राओं को बाल प्रहरी के रूप में तैयार कर उन्हें साइबर अपराध और मानव तस्करी के खतरों से बचाव का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

जिले में 38 राजकीय, 25 सहायता प्राप्त और 180 वित्तविहीन मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं, जिनमें 30 हजार से अधिक विद्यार्थी पंजीकृत हैं। सभी विद्यालयों में क्लब की समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं।

प्रत्येक विद्यालय में प्रधानाचार्य क्लब के अध्यक्ष और एक वरिष्ठ शिक्षक समन्वयक होंगे। कक्षा 9, 10, 11 और 12 से एक-एक छात्र और एक-एक छात्रा का चयन किया जाएगा। इस तरह प्रत्येक विद्यालय से आठ विद्यार्थी क्लब के सदस्य बनेंगे।

क्लब में शामिल विद्यार्थियों को साइबर ठगी के तरीकों, मानव तस्करी के खतरे, फर्जी नौकरी के झांसे और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा।

अनजान लोगों के संपर्क में आने से जुड़े जोखिम व ऐसी स्थिति में अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपाय भी बताए जाएंगे। ये विद्यार्थी विद्यालय में अपने साथियों तक सुरक्षा संबंधी जानकारी पहुंचाने के साथ संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी शिक्षक या जिम्मेदार व्यक्ति तक पहुंचाने में सहयोग करेंगे।

समिति का विवरण, फोटो और गतिविधियों की रिपोर्ट जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय को उपलब्ध करानी होगी, जिसे राज्य स्तरीय पोर्टल पर भी अपलोड किया जाएगा।

जिला विद्यालय निरीक्षक विजय कुमार सिंह ने बताया कि एचटीसी से विद्यार्थियों को साइबर अपराध व मानव तस्करी के जोखिमों को समझने के साथ उनसे बचने के व्यावहारिक उपाय बताए जाएंगे।

ऐसी परिस्थितियों की पहचान और समय रहते जिम्मेदार लोगों तक सूचना पहुंचाने के लिए तैयार किया जाएगा। प्रशिक्षण में पुलिस, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी।

क्या है बाल प्रहरी क्लब

  • जिले के माध्यमिक स्कूलों में क्लब बनेंगे।
  • हर स्कूल से आठ बच्चे चुने जाएंगे, जिसमें चार छात्र, चार छात्राएं होंगे।
  • कक्षा नौ से 12 तक से चयन।
  • प्रधानाचार्य अध्यक्ष, वरिष्ठ शिक्षक नोडल होंगे।
  • बच्चे ही बच्चों को जागरूक करेंगे।

ऐसे पहचानें ठगी का जाल

  • फर्जी नौकरी के लिए पैसे मांगना।
  • अनजान लिंक पर क्लिक करवाना।
  • विदेश में अच्छी नौकरी का लालच।
  • इंटरनेट मीडिया पर अनजान से दोस्ती।
  • ऐसा कुछ दिखे तो तुरंत 112 या 1930 पर काल करें।

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