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अखिलेश की पार्टी में फिर मची खलबली! मुखर होने लगी अंदरूनी गुटबाजी, चुनाव निपटने के बाद लखनऊ पहुंचेंगे सपाई

लोकसभा चुनाव की मतगणना चार जून को होनी है। लेकिन समाजवादी पार्टी में अंदरूनी गुटबाजी थमती नजर नहीं आ रही। जिलाध्यक्ष का विरोधी खेमा उन्हें हटवाने के लिए फिर सक्रिय हो रहा है। इस बीच लोकसभा चुनाव आ जाने के कारण विरोधी गुट शांत हो गया था। चुनाव निपटने के बाद फिर लखनऊ की दौड़ लगाकर जिलाध्यक्ष को हटवाने की मांग करने लगे हैं।

By Devendrda Deva Edited By: Aysha Sheikh Published: Thu, 23 May 2024 01:17 PM (IST)Updated: Thu, 23 May 2024 01:17 PM (IST)
अखिलेश की पार्टी में फिर मची खलबली! मुखर होने लगी अंदरूनी गुटबाजी, चुनाव निपटने के बाद लखनऊ पहुंचेंगे सपाई

जागरण संवाददाता, पीलीभीत। लोकसभा चुनाव की मतगणना चार जून को होनी है। लेकिन समाजवादी पार्टी में अंदरूनी गुटबाजी थमती नजर नहीं आ रही। जिलाध्यक्ष का विरोधी खेमा उन्हें हटवाने के लिए फिर सक्रिय हो रहा है। इस बीच लोकसभा चुनाव आ जाने के कारण विरोधी गुट शांत हो गया था। चुनाव निपटने के बाद फिर लखनऊ की दौड़ लगाकर जिलाध्यक्ष को हटवाने की मांग करने लगे हैं।

तराई के जिला में समाजवादी पार्टी ही सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी से मुकाबला करती दिखाई देती है। लेकिन समाजवादी पार्टी के संगठन की आपसी गुटबाजी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। खासकर सपा जिलाध्यक्ष जगदेव सिंह जग्गा का विरोधी खेमा समय समय पर अपने सियासी मंसूबे को पूरा करने के लिए पूरी कोशिश में लग जाता है।

कई मौकों पर देखने को मिली आपसी गुटबाजी

लोकसभा चुनाव के दौरान भी समाजवादी पार्टी की यह आपसी गुटबाजी कई मौकों पर देखने को मिली। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पूरनपुर में आयोजित जनसभा भी सपा की आपसी गुटबाजी हावी रही थी। खासकर मंच पर बिठाने के मामले को लेकर कई पदाधिकारियों की नाराजगी सामने आई थी।

जिले के एक प्रमुख पदाधिकारी रहे सपा नेता को राष्ट्रीय अध्यक्ष के कड़े व्यवहार का सामना करना पड़ा था। जिसके बाद उक्त सपा नेता के तेवर अचानक ठंडे पड़ गए। उक्त सपा नेता और सपा जिलाध्यक्ष के बीच लंबे समय से रार चल रही है। समाजवादी पार्टी संगठन की आपसी गुटबाजी के चलते लोकसभा सीट के उम्मीदवार पूर्व मंत्री भगवत सरन गंगवार का चुनाव प्रबंधन भी प्रभावित रहा है।

हालांकि सपा उम्मीदवार भगवत सरन गंगवार ने इस मामले पर कभी खुलकर प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की। मतदान निपटने के कुछ दिन बाद ही सपा जिलाध्यक्ष का विरोधी खेमा एक बार फिर सक्रिय हो गया है। बीसलपुर क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले एक सपा नेता ने लखनऊ जाकर सपा जिलाध्यक्ष को हटाने की मांग उठाई। इतना ही नहीं सपा नेता इस मामले को इंटरनेट मीडिया पर भी शेयर किया था।

फिलहाल सपा संगठन की आपसी गुटबाजी थमती नहीं दिख रही है। माना जा रहा है कि चार जून को मतगणना के उपरांत सपा नेतृत्व इस मामले का संज्ञान ले सकता है। इधर, सपा जिलाध्यक्ष जगदेव सिंह जग्गा कहते हैं कि कुछ लोग पार्टी संगठन को कमजोर करने की मंशा से इस तरह की बातें करते रहते हैं। जिसका पार्टी संगठन पर किसी तरह का कोई असर नहीं है। सपा कार्यकर्ताओं ने पूरी शिद्दत के साथ लोकसभा चुनाव में सपा उम्मीदवार को जिताने के लिए मेहनत की है।


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