ऑपरेशन सिंदूर का हीरो अब चीन-पाकिस्तान सीमा पर तैनात, UPITS में दिखा सेना का नया हथियार 'टेथर्ड ड्रोन'
टेथर्ड ड्रोन 'ऑपरेशन सिंदूर' में भारतीय सेना का भरोसा जीतकर देश की सरहद की सुरक्षा में गेम चेंजर साबित हो ...और पढ़ें

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में डिफेंस काॅरिडोर के स्टाॅल पर प्रदर्शित काल फाइटर ड्रोन आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। सौरभ राय
HighLights
टेथर्ड ड्रोन 'ऑपरेशन सिंदूर' में सेना का भरोसा जीता
सरहद सुरक्षा में ड्रोन बने गेम चेंजर
सेना ने ड्रोन की आपूर्ति की मांग दोगुनी की
गजेंद्र पांडेय, ग्रेटर नोएडा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना का भरोसा जीतने वाला टेथर्ड ड्रोन अब देश की सीमाओं की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाने की तैयारी में है।
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में डिफेंस कॉरिडोर के स्टाल पर प्रदर्शित इस ड्रोन की आपूर्ति की मांग सेना ने दोगुनी कर दी है। बेंगलुरु की कंपनी निंबस स्कोप के प्रतिनिधियों के मुताबिक, ड्रोन की मांग 1000 से बढ़कर 2000 तक पहुंच गई है।
आठ घंटे तक लगातार निगरानी
कंपनी के मुताबिक, टेथर्ड मोड में ड्रोन केबल के जरिये जमीन से जुड़ा रहता है और आठ घंटे तक लगातार उड़ान भर सकता है। यह समुद्र तल से 5500 मीटर तक की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में काम कर सकता है और जमीन से 110 मीटर तक ऊपर जा सकता है।
ड्रोन 35 किलोमीटर प्रति घंटे की हवा की गति में भी स्थिर रह सकता है। वहीं, बिना केबल के यह करीब 45 मिनट तक हवा में रह सकता है।
कैमरे और सेंसर लगाने की सुविधा
कंपनी के अनुसार, यह ड्रोन इलेक्ट्रिक क्वाॅडकाॅप्टर है। इसमें एनर्जी सोर्स के तौर पर ग्राउंड बेस्ड सिस्टम और बैटरी दोनों का इस्तेमाल किया गया है। इसमें ब्रशलेस डीसी इलेक्ट्रिक मोटर्स लगी हैं, जिससे यह अधिक स्थिरता के साथ कम आवाज में उड़ सकता है।
ड्रोन की लंबाई 1.5 मीटर, चौड़ाई 1.5 मीटर और ऊंचाई 0.5 मीटर है। इसका अधिकतम टेकआफ वजन 15 किलोग्राम है। इसके कारण इसमें हाई-रिजाल्यूशन कैमरे और अन्य सेंसर लगाए जा सकते हैं।
निगरानी से लेकर आपदा तक में इस्तेमाल
कंपनी प्रतिनिधियों के मुताबिक, ड्रोन का इस्तेमाल सीमा और जंगल की निगरानी के साथ भीड़ प्रबंधन में किया जा सकता है। बाढ़ और आग जैसी आपदाओं के दौरान भी यह लगातार निगरानी कर कंट्रोल रूम को रियल टाइम जानकारी देने में मदद कर सकता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन की उपयोगिता सामने आने के बाद भारतीय सेना ने भी भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए इनकी आपूर्ति की मांग बढ़ाई है। कंपनी के प्रतिनिधियों का दावा है कि सीमा सुरक्षा में इसका उपयोग गेम चेंजर साबित हो सकता है।
