नोएडा में 126 करोड़ के अर्बन प्रोजेक्ट स्कैम में बेल के लिए SC पहुंचा बिल्डर अनिल मित्थास; ED को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा की रियल एस्टेट कंपनी के प्रमोटर अनिल मित्थास की जमानत याचिका पर ईडी से जवाब मांगा ...और पढ़ें

बिल्डर की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से जवाब मांगा। फोटो: आर्काइव
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने अनिल मित्थास की जमानत पर ईडी से जवाब मांगा।
नोएडा रियल एस्टेट प्रमोटर पर 126.30 करोड़ के गबन का आरोप।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पहले जमानत याचिका खारिज की थी।
नई दिल्ली/नोएडा, प्रेट्र। सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें नोएडा की एक रियल एस्टेट कंपनी के मुख्य प्रमोटर ने 126.30 करोड़ रुपये के गबन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंगमामले में जमानत मांगी है। आरोप है कि यह रकम घर खरीदारों से जुटाई गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से मांगा जवाब
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जायमाल्य बागची और वी. मोहना की पीठ ने सोमवार को अनिल मित्थास की याचिका पर एजेंसी को नोटिस जारी किया।
मित्थास ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। हाई कोर्ट ने 16 सितंबर को मित्थास की जमानत याचिका खारिज की थी। हाई कोर्ट ने कहा था,
सफेदपोश अपराध बहुत व्यापक और महंगा हो गया है। इससे निपटने के लिए सख्त और बिना किसी समझौते वाला प्रवर्तन जरूरी है। काॅरपोरेट धोखाधड़ी, गबन, भेदिया कारोबार और बड़े पैमाने पर वित्तीय छल अक्सर पेंशन, बचत और लोगों की आजीविका को ऐसे स्तर पर तबाह करते हैं, जो कई सड़क अपराधों से होने वाले नुकसान से कहीं अधिक है।
ध्यान रहे कि मनी लाॅन्ड्रिंग का यह मामला उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एक विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा उन्नति फार्च्यून होल्डिंग्स लिमिटेड (यूएफएचएल) और उसके प्रमोटरों के खिलाफ 'धोखाधड़ी और जालसाजी' के लिए दर्ज की गई एफआईआर से जुड़ा है।
126.30 करोड़ रुपये दूसरी जगह लगाने का आरोप
हाई कोर्ट ने कहा था कि पक्षों के वकीलों को सुनने और इस तथ्य पर विचार करने के बाद कि आवेदक पर विभिन्न आवंटियों की 126.30 करोड़ रुपये की रकम दूसरी जगह लगाने का आरोप है, यह जमानत देने के लिए उपयुक्त मामला नहीं है।
यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है कि मित्थास ने अपनी अरन्या परियोजना के लिए उन्नति फार्च्यून होल्डिंग्स लिमिटेड की ओर से घर खरीदारों से जुटाई गई रकम का गबन किया। ईडी ने मनी लाॅन्ड्रिंग की जांच शुरू की। मित्थास को 16 अप्रैल, 2025 को हिरासत में लिया गया था।
