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नोएडा में 17 किमी यमुना सफाई का एक्शन प्लान तैयार, 24 STP से रुकेगा गंदा पानी; IIT दिल्ली कर रहा DPR की जांच

Published: Thu, 01 Oct 2026 10:54 AM (IST)

नोएडा प्राधिकरण ने 17 किमी यमुना को प्रदूषण मुक्त करने के लिए कार्ययोजना तैयार की है, जिसके तहत नालों पर ...और पढ़ें

नोएडा में यमुना की सफाई का एक्शन प्लान तैयार। फोटो: आर्काइव

नोएडा में यमुना की सफाई का एक्शन प्लान तैयार। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. नोएडा में 17 किमी यमुना सफाई की कार्ययोजना तैयार

  2. नालों पर 24 एसटीपी प्लांट लगेंगे, 8 पहले ही लगे

  3. केंद्र का 18,600 करोड़ का नेशनल एक्शन प्लान

जागरण संवाददाता, नोएडा। यमुना को प्रदूषण मुक्त करने के लिए बुधवार को नोएडा प्राधिकरण में अहम बैठक हुई, ऑनलाइन बैठक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित हुई। इसमें यमुना को साफ करने का एक्शन प्लान और कार्ययोजना तैयार करने के लिए कहा गया।

नोएडा में करीब 17 किमी का एरिया यमुना का आता है। यहां मुख्य कोंडली नाला ही यमुना में गिरता है। जिसमें नोएडा के सभी छोटे बड़े नाले जाकर गिरते है।

प्राधिकरण का दावा है कि इन नालों में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से शोधित जल ही डाला जा रहा है। वहीं प्राधिकरण ने अपने स्तर पर भी एक योजना तैयार की है। जिस पर काम किया जा रहा है।

अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी वंदना त्रिपाठी ने बताया कि इस योजना के तहत नालों पर 24 एसटीपी प्लांट बनाए जाने है। जिसमें से 8 एसटीपी पर को लगाया गया है। तीन फाइको फाइको ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे।

वहीं 13 में से पांच एसटीपी प्लांट की डीपीआर को IIT दिल्ली से चेक कराया जा रहा है। जिसे दिसंबर 27 तक लगा दिया जाएगा। वहीं 8 एसटीपी प्लांट दिसंबर 2028 तक लगा दिए जाएंगे। इससे नालों में आने वाला पानी और साफ हो जाएगा। ये पानी यमुना को प्रदूषित नहीं करेगा। इसका सीओडी और बीओडी स्तर काफी बेहतर रहेगा।

केंद्र का 18600 करोड़ का प्लान

यमुना को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए केंद्र सरकार ने 18,600 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाला नेशनल एक्शन प्लान तैयार किया है। यह योजना सुप्रीम कोर्ट के 21 मई के आदेश के बाद बनाया गया है।

गृह मंत्रालय की ओर से सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया है कि यमुना कैचमेंट में प्रतिदिन 7,999.63 मिलियन लीटर डेली (एमएलडी) घरेलू सीवेज निकलता है, जिसमें से 6,243.83 एमएलडी का ट्रीटमेंट किया जा रहा है। इसके बावजूद 1,755.80 एमएलडी का ट्रीटमेंट गैप बना हुआ है।

यूपी में सबसे बड़ा सीवेज गैप

पर्यावरणविद अभिष्ट कुसुम गुप्ता ने बताया कि गृह मंत्रालय की प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार सबसे बड़ा सीवेज ट्रीटमेंट गैप उत्तर प्रदेश में है। इसके बाद हरियाणा और दिल्ली का स्थान है। यमुना बेसिन में 520 बड़े नालों की पहचान की गई है, जो बिना ट्रीटमेंट का पानी नदी में छोड़ रहे हैं।

दिल्ली से लगभग 5,188 एमएलडी, उत्तर प्रदेश से 2,972.66 एमएलडी और हरियाणा से करीब 1,493 एमएलडी पानी प्रमुख नालों के माध्यम से निकल रहा है। गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, आगरा, मथुरा, गुरुग्राम और फरीदाबाद को प्रमुख प्रदूषण हाटस्पाट के रूप में चिह्नित किया गया है।

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