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4500 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में फर्जी फ्लोर बनाकर बेचे, नोएडा वर्ल्ड वन आवंटियों के साथ बड़ी धोखाधड़ी

Published: Mon, 22 Jun 2026 11:58 AM (IST)

नोएडा वर्ल्ड वन परियोजना में बिल्डर ने 4500 वर्ग मीटर में कमर्शियल की जगह ऑफिस स्पेस बेचे, जो नक्शे में ...और पढ़ें

बिल्डर ने 4500 वर्ग मीटर में अनधिकृत ऑफिस स्पेस बेचे। एआई इमेज

बिल्डर ने 4500 वर्ग मीटर में अनधिकृत ऑफिस स्पेस बेचे। एआई इमेज

जागरण संवाददाता, नोएडा। सेक्टर-90 स्थित नोएडा वर्ल्ड वन परियोजना में आवंटियों के साथ हुई धोखाधडी के दस्तावेज एक-एक कर सामने आ रहे हैं। परियोजना में पहले फ्लोर पर तीनों टावरों के 4500 वर्ग मीटर के अधिक के क्षेत्रफल में बिल्डर ने कमर्शियल आवंटन की जगह आफिस स्पेस बेच दिए। जबकि नोएडा की रिपोर्ट के अनुसार भूतल और प्रथम तल के बीच अन्य कोई फ्लोर मंजूर नहीं होने की बात सामने आई।

बिल्डर ने इसी बीच अतिरिक्त अपर ग्राउंड फ्लोर भी बनाया। दूसरी मंजिल से परियोजना में आफिस स्पेस शुरू होने थे जो पहली मंजिल से ही शुरू हो जाते हैं। बिल्डर ने खुद का कार्यालय भी इसी फ्लोर पर बनाया है। निवेशकों के साथ प्रापर्टी के सामने प्रापर्टी के आवंटन के दौरान यह कमियां उजागर हुईं।

बता दें सीबीएस की नोएडा वर्ल्ड वन परियोजना अब बुरी तरह से विवाद और निवेशकों से धोखाधडी के मामले में फंसती जा रही है। नोएडा प्राधिकरण से मिले संरक्षण के बीच बिना निवेशकों के सामने दूसरा नक्शा प्रदर्शित कर यहां दुकानें और प्रापर्टी बेची गईं। लोअर और अपर ग्राउंड फ्लोर की मंजूरी नहीं होने के बाद भी खरीदारों को गलत नक्शा दिखाया गया। लोअर और अपर ग्राउंड फ्लोर के नाम पर करोड़़ों रुपये की दर्जनों दुकानें बेची गईं। यह मामला अब हाई कोर्ट में हैं।

नोएडा प्राधिकरण की ओर से दिए गए काउंटर एफिडेविट में लोअर और अपर ग्राउंड फ्लोर का नक्शा परियोजना में मंजूर नहीं होने की बात अपने काउंटर एफिडेविट में कहीं हैं। ऐसे में आवंटियों ने जिस फ्लोर पर अपने दुकान और प्रापर्टी की बुकिंग की वह उनको नहीं मिल सकीं। मामला हाई कोर्ट में पहुंचा।

नोएडा प्राधिकरण की एजीएम (सहायक महाप्रबंधक) प्रिया सिंह की ओर से हाई कोर्ट में काउंटर एफिडेविट जमा किया गया। इसमें भूतल और प्रथम तल से परियोजना के नक्शा होने की बात एफिडेविट में बताई गई। बिल्डर ने खरीदारों को गलत नक्शा दिखाकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की। इन सभी मामले में सीबीएस के निदेशक इशान रस्तोगी का पक्ष जानने के लिए उनको फोन किया तो कट कर दिया गया मैसेज का जवाब नहीं मिला।

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