नोएडा में मजदूरों को कितना मिलता है वेतन, आखिर गुरुग्राम से क्यों हो रही तुलना? समझिए न्यूनतम मजदूरी का पूरा गणित
नोएडा में फैक्ट्री मजदूर कम वेतन, ओवरटाइम न मिलने और खराब कामकाजी परिस्थितियों को लेकर सड़कों पर उतर आए। वे ...और पढ़ें
HighLights
मजदूरों ने कम वेतन, ओवरटाइम न मिलने पर विरोध प्रदर्शन किया
मासिक वेतन 20-25 हजार रुपये, दैनिक 600 रुपये की मांग
हरियाणा की तुलना में यूपी में मजदूरी वृद्धि न होने पर रोष
डिजिटल डेस्क, नोएडा। नोएडा की सड़कों पर हजारों फैक्ट्री मजदूर अचानक नहीं उतरे, ये नाराजगी काफी समय से चली आ रही थी, जो सोमवार को फूट पड़ी।
मजदूरों का कहना है कि उन्हें आज भी 10-11 हजार रुपये महीने या करीब 300 रुपये रोज के हिसाब से मेहनताना दिया जा रहा है जबकि महंगाई का हाल किसी से छिपा नहीं है।
घर का किराया, राशन और बच्चों की पढ़ाई, इतने कम वेतन में यह सब मुमकिन नहीं है। उनका सवाल है कि जब दूसरे राज्य राज्यों में मजदूरी बढ़ सकती है, तो उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं?
काम ज्यादा कराते हैं, पर ओवरटाम नहीं देते
मजदूरों ने आरोप लगाया कि उनसे तय 8 घंटे से ज्यादा काम कराया जाता है, लेकिन ओवरटाइम नहीं दिया जाता। महिला कर्मचारियों के लिए हालात बदतर है, उन्हें अपनी जगह से उठने नहीं दिया जाता है। यह अमानवीय है।
इसे साथ ही बताया कि देहात और शहरी क्षेत्र में ही मजदूरी में अंतर है। एक मजदूर ने बताया कि गांवों में 500-600 रुपये रोज तक मिल जाते हैं, लेकिन नोएडा जैसे बड़े औद्योगिक शहर में 300 रुपये पर काम करना पड़ता है।
हरियाणा की बात क्यों कर रहे हैं श्रमिक?
हरियाणा सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से न्यूनतम मजदूरी में करीब 35% तक बढ़ोतरी कर दी है। नोएडा से सटा गुरुग्राम, जहां मजदूरी अचानक बढ़ जाती है, लेकिन यहां नहीं।
जब हरियाणा सरकार मजदूरी बढ़ा सकती है तो उत्तर प्रदेश की सरकार क्यों नहीं? बस यही सवाल पहले प्रदर्शन और गुस्से में तब्दील हो गया। हरियाणा में नई दरों के मुताबिक अकुशल, अर्ध कुशल और कुशल श्रमिकों की मजदूरी काफी बढ़ गई है, आइए नजर डालते हैं:-
| श्रमिक वर्ग | पहले मजदूरी (₹/माह) | बढ़ोतरी के बाद (₹/माह) | बढ़ोतरी (%) |
|---|---|---|---|
| अकुशल मजदूर | 11,200 | 15,200 | 35.7% |
| अर्ध-कुशल मजदूर | 12,400 | 16,700 | 34.7% |
| कुशल मजदूर | 13,700 | 18,500 | 35.0% |
क्या हैं मजूदरों की मांगें?
मजदूरों की मांगें अनाप-शनाप नहीं है, बल्कि बेहद समान्य है, बेहद जरूरी हैं।
- महीने का वेतन कम से कम 20,000 से 25,000 रुपये किया जाए।
- रोजाना की मजदूरी 600 रुपये तय की जाए।
- ओवरटाइम का पैसा दिया जाए।
- कंपनियां लिखित में भरोसा दें।
नियम क्या कहते हैं?
न्यूनतम मजदूरी तय करने में तीन अहम पहलुओं का ध्यान रखना जाता है।
- क्षेत्र: शहर में खर्च ज्यादा, तो मजदूरी भी ज्यादा होनी चाहिए।
- अनुभव: नया और अनुभवी मजदूर बराबर नहीं।
- कौशल: अकुशल से लेकर हाई-स्किल्ड तक अलग दर।
केंद्र सरकार की ओर से तय न्यूनतम मजदूरी कितनी है?
- अकुशल श्रमिक के लिए: 783 रुपये प्रतिदिन
- अर्ध-कुशल श्रमिक के लिए: 868 रुपये प्रतिदिन
- कुशल श्रमिक के लिए: 954 रुपये प्रतिदिन
- अत्यधिक कुशल श्रमिक के लिए: 1035 रुपये प्रतिदिन
तो फिर समस्या की जड़ क्या है?
जब न्यूनतम मजदूरी तय है तो समस्या क्या है? केंद्र सरकार ने न्यूतनतम मजदूरी तो यह कर दी, लेकिन इसे लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है। यानी कागज पर नियम तो हैं, लेकिन पालन नहीं हो रहा।
