विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

नोएडा में बिना परमिशन आंदोलन कहीं साजिश तो नहीं? 2014 में भी हुआ था ऐसा प्रदर्शन

Published: Tue, 14 Apr 2026 08:51 AM (IST)

नोएडा-ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के अचानक आंदोलन और तोड़फोड़ ने चिंता बढ़ा दी है। पुलिस बाहरी उपद्रवियों ...और पढ़ें

HighLights

  1. नोएडा-ग्रेटर नोएडा में श्रमिकों के आंदोलन पर साजिश का संदेह

  2. पुलिस उपद्रवियों की पहचान कर रही, बाहरी तत्वों की आशंका

  3. उद्योगों को नुकसान, कामगारों के वेतन पर भी असर संभव

जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। जिले के औद्योगिक सेक्टरों में श्रमिकों द्वारा अचानक शुरू किए गए आंदोलन ने पुलिस, प्रशासन, उद्यमियों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सड़कों पर प्रदर्शन, फैक्ट्रियों के बाहर नारेबाजी और वाहनों मेंं तोड़फोड़ करने जैसी घटनाओं के बीच यह सवाल उठने लगा है कि आखिर शासन और प्रशासन से बिना मांग किए वेतन वृद्धि के लिए अचानक इतना बड़ा आंदोलन किसी साजिश कर परिणाम तो नहीं है।

उपद्रव में बाहर के लोगों का शामिल का अंदेशा

ऐसी आंशका है कि श्रमिकों के बीच कुछ ऐसे उपद्रवी थे, जिन्होंने सिर्फ फैक्ट्रियों को निशाना बनाया। उनके हाथों में थैले थे, उनमें पत्थर थे। थैलों में पत्थर से प्रतीत होता है कि फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ व वाहनों में आगजनी अचानक गुस्से का परिणाम नहीं थी, बल्कि पूर्व नियोजित था।

Noida Protest (5)

नोएडा फेज-2 में पुलिस पर पथराव करते उपद्रवी। फोटो- सौरभ राय

पुलिस इसकी जांच में जुटी है। श्रमिकों के बीच उपद्रवियों की भी पहचान की जा रही है। यह चर्चा आम है कि यदि आंदोलन साजिश है तो यह भी पुलिस और प्रशासन की नाकामी का परिणाम है। पुलिस और प्रशासन को पूर्व नियोजित साजिश की भनक क्यों नहीं लगी, इस पर भी सवाल खड़ा हो गया है।

श्रमिकों के बीच उपद्रवियों की पहचान कर रही है पुलिस

उद्यमियों का कहना है कि श्रमिको को अपनी मांगें जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार तक पहुंचानी चाहिए थीं। प्रशासन और प्रबंधन के साथ बातचीत कर समाधान निकाला जा सकता था, लेकिन सीधे आंदोलन का फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ करना और वाहनों में आग लगाना उचित नहीं है। इससे उद्योगों के साथ-साथ आम लोग भी प्रभावित हो रहे हैं।

Noida Protest (6)

नोएडा सेक्टर-63 जे-14 स्थित विपुल मोटर्स के बाहर खड़े वाहनों को उपद्रवियों ने जलाया। सौरभ राय

सबसे बड़ा सवाल यह है कि कामगारों का इतना बड़ा वर्ग एक साथ कैसे एकजुट हो गया। कहीं इसके पीछे कोई संगठित रणनीति तो नहीं। कुछ सूत्रों के अनुसार, इस आंदोलन को बड़ा रूप देने में बाहरी संगठनों और विचारधारा आधारित समूहों का भी सहयोग मिल रहा है।

जेएनयू से जुड़े लेफ्टिस्ट विंग का कनेक्शन

चर्चा है कि जेएनयू से जुड़े लेफ्टिस्ट विंग के कुछ तत्वों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस तरह की चर्चाओं ने मामले को और गंभीर बना दिया है। आंदोलन का सबसे अधिक नुकसान उन कामगारों को होगा जो इस आंदोलन का हिस्सा नहीं हैं। यदि फैक्ट्रियां 15 से 20 दिन तक बंद रहती हैं, तो उत्पादन पूरी तरह प्रभावित होगा।

Noida Protest (7)

नोएडा सेक्टर-63 जे-14 स्थित विपुल मोटर्स के कार्यालय में उपद्रवियों ने की तोड़फोड़। सौरभ राय

कंपनियों की आय रुकेगी और उसका सीधा असर कामगारों के वेतन पर पड़ेगा। समय पर भुगतान न होने से हजारों परिवार आर्थिक संकट में आ सकते हैं। बच्चों की पढ़ाई, घर के राशन, किराया आदि जरूरतों पर असर पड़ेगा। उधर, प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील कर सभी पक्षों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कही है।

2014 में भी हुआ था इसी तरह का श्रमिक आंदोलन

2014 में नोएडा के फेज दो स्थित एक फैक्ट्री में काम करने वाले श्रमिकों ने एकजुट होकर फैक्ट्री प्रबंधन पर हल्ला बोल दिया था। इस आंदोलन में 50 हजार के करीब कामगार सड़कों पर उतर आए थे। फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ कर वाहनों में आग लगा दी थी।

बाद में तत्कालीन सरकार के हस्तक्षेप के बाद श्रमिकों की मांगें मान ली गई थी। 2016-17 में भी फेज दो में कामगारों ने उपद्रव मचाया था। हालांकि उस दौरान किसी तरह की साजिश सामने नहीं आई थी।

यह भी पढ़ें- नोएडा में हिंसक आंदोलन के बीच यूपी सरकार का बड़ा फैसला, श्रमिकों की मजदूरी 21 प्रतिशत तक बढ़ाई

यह भी पढ़ें- नोएडा में बवाल की भारी कीमत: औद्योगिक इकाइयों के 3 हजार करोड़ स्वाहा, 10000 वाहन भी बने निशाना

यह भी पढ़ें- 3 फैक्ट्रियों से शुरू हुए आंदोलन ने पूरे नोएडा को चपेट में लिया, आखिर कैसे फूटा श्रमिकों का गुस्सा?

 

हर चीज का हल वार्ता से निकलता है। कामगारों को जिला प्रशासन व उद्यमी संगठनों के माध्यम से वार्ता करनी चाहिए थी। कामगारों के हित में हमेशा काम किया जाता है। कुछ दिनों पहले ही उद्यमी संगठनों ने कामगारों के लिए सिलिंडर बंटवाए। जो मांगें की जा रही हैं, उनमें से 95 प्रतिशत पर काम पहले से ही हो रहा है। तोड़फोड़, आगजनी, हमला करना यह कामगार नहीं कर सकता, इसके पीछे अराजक तत्व हैं।


-

अमित उपाध्याय, अध्यक्ष आइबीए

जिस तरह से बैग में पत्थर, हाथों में लाठी डंडे लेकर आएं हैं, यह लोग बाहरी हैं। आम कामगार इस तरह का आंदोलन नहीं करेगा। कामगारों को वार्ता करनी चाहिए थी। जिला प्रशासन और उद्यमी संगठनों के साथ चर्चा करनी चाहिए थी। यह उपद्रव शहर की छवि गलत पेश करेगा। निवेशकों पर इसका असर पड़ेगा।


-

- साहिल कुमार, अध्यक्ष, ईकोटेक 12 इंडस्ट्रीज एसोसिएशन