3 फैक्ट्रियों से शुरू हुए आंदोलन ने पूरे नोएडा को चपेट में लिया, आखिर कैसे फूटा श्रमिकों का गुस्सा?
वेतन असमानता और सुविधाओं की कमी को लेकर तीन औद्योगिक इकाइयों से शुरू हुआ विरोध अब पूरे नोएडा जिले में ...और पढ़ें

नोएडा में वेतन असमानता और श्रमिक सुविधाओं को लेकर हुआ उग्र प्रदर्शन। जागरण
HighLights
तीन इकाइयों से शुरू हुआ विरोध, पूरे नोएडा में फैला।
हरियाणा से कम वेतन मिलने पर श्रमिकों में असंतोष।
महिला और प्रवासी कामगारों की बड़ी संख्या आंदोलन में शामिल।
धर्मेंद्र चंदेल, नोएडा। वेतन असमानता और श्रमिक सुविधाओं को लेकर तीन औद्योगिक इकाईयों से शुरू हुआ विरोध ने व्यापक आंदोलन का रूप ले लिया है। शुक्रवार को रिचा और गौरव इंटरनेशनल इंडस्स्ट्री के श्रमिकों ने सबसे पहले वेतन वृद्धि की मांग उठाई थी।
दरअसल पूरे मामले की शुरूआत हरियाणा में न्यूनतम वेतन वृद्धि के निर्णय से हुई। गौरव इंटरनेशनल कंपनी, रिचा इंडस्ट्रीज और मिंडा की इकाईयां गुरुग्राम के साथ नोएडा, ग्रेटर नोएडा में भी है। गुरुग्राम के कर्मचारियों ने न्यूनतम वेतन बढ़ाए जाने की सूचना यहां की इकाईयों में काम करने वाले लोगों को दी।
उन्होंने बताया कि उनका न्यूनतम वेतन 19,600 रुपये कर दिया गया है।नोएडा की कई इकाइयों में कामगारों को लगभग 12 से 15 हजार रुपये ही मिल रहे हैं। हरियाणा की तुलना ने कम वेतन मिलने से उक्त तीनों इकाईयों के कामगारों के बीच असंतोष को हवा मिल गई।
गंभीरता से नहीं लिया
कामगारों के बीच चर्चा शुरू हुई कि समान काम करने के बावजूद अलग-अलग शहरों में वेतन में इतना बड़ा अंतर अन्यायपूर्ण है। यही संदेश तेजी से फैक्ट्रियों और कामगारों के संगठनों तक पहुंचा, जिसके बाद विरोध की चिंगारी भड़क उठी। उक्त तीनों इकाइयों के साथ मदरसन के श्रमिक भी शामिल हो गए।
पिछले पांच दिनों से अलग-अलग क्षेत्रों में कामगारों का असंतोष तेजी से बढ़ने लगा। शुरुआती दौर में प्रशासनिक स्तर पर इसे गंभीरता से नहीं लिया गया।
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नोएडा के औद्योगिक सेक्टर फेज दो में कामगारों के विरोध की शुरुआत के दौरान यह अंदाजा नहीं लगाया जा सका कि आने वाले दिनों में और यह बड़ा रूप धारण कर सकता है।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब नोएडा की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों के कर्मचारी भी आंदोलन के समर्थन में उतर आए। मिंडा और मदरसन जैसी बड़ी कंपनियों के कामगारों के विरोध में शामिल होने से आंदोलन का दायरा तेजी से बढ़ गया।
बड़ी संख्या में महिला कामगार हुईं शामिल
इसके बाद शहर के कई औद्योगिक सेक्टरों में माहौल गर्म हो गया और धीरे-धीरे पूरा नोएडा इस विरोध की चपेट में आने लगा। जानकारी के अनुसार आंदोलन में बड़ी संख्या में युवा और महिला कामगार शामिल हैं।
इनमें बिहार, मध्य प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ से आए प्रवासी कामगारों की संख्या सबसे अधिक बताई जा रही है। ये कामगार लंबे समय से बढ़ा हुआ वेतन, साप्ताहिक अवकाश, इकाइयों में सुरक्षित वातावरण और श्रम अधिकारों की मांग उठा रहे हैं।
एख दिन पहले ही हुई थी बैठक
दिलचस्प बात यह है कि सोमवार को हुए कामगारों के विरोध तेज होने से एक दिन पहले ही रविवार को जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में श्रमिकों के वेतन वृद्धि, छुट्टी, ओवरटाइम भुगतान और अन्य अधिकारों पर चर्चा हुई थी।
प्रशासन की ओर से सकारात्मक संकेत भी दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद श्रमिकों का गुस्सा शांत नहीं हुआ और विरोध फिर से सुलग उठा। अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती औद्योगिक शांति बहाल करने के साथ कामगारों की वास्तविक समस्याओं का स्थायी समाधान निकालना है।
