Noida Protest: नोएडा श्रमिक हिंसा के दौरान तीन सेकेंड में जलाए वाहन, प्रशिक्षित थे उपद्रवी
नोएडा में 13 अप्रैल को हुई श्रमिक हिंसा की जांच में खुलासा हुआ है कि उपद्रवी प्रशिक्षित थे और उन्होंने ...और पढ़ें
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नोएडा हिंसा के दौरान करीब तीन से पांच सेकेंड में वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया था।
HighLights
उपद्रवियों ने 3-5 सेकंड में वाहनों में आग लगाई।
हिंसा का उद्देश्य उत्पादन सप्लाई चेन बाधित करना था।
जांच में 25 वर्ष के युवा उपद्रवियों की पहचान हुई।
मुनीश शर्मा, नोएडा। वेतन वृद्धि को लेकर 13 अप्रैल को हुई श्रमिक हिंसा की करीब महीनेभर से चल जांच में चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। हिंसा के दौरान करीब तीन से पांच सेकेंड में वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया था। उनको पता था कि बाइक का पाइप खोलकर कैसे आग लगाई जा सकती है या उपलब्ध ज्वलनशील पदार्थ को कहां पर डालना है। एकाएक वाहनों में आग भड़क उठे, जबकि आमजन को किसी भी वाहन में आग लगाने में औसतन दो से पांच मिनट का समय लगता है।
नोएडा फेज दो, सेक्टर 63 आदि जगहों पर हिंसा के दौरान के वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों से पुष्टि हुई। उपद्रवियों ने कैमिकल फैक्ट्रियों तक पहुंच नहीं पाने पर आटोमोबाइल व हाजरी की फैक्ट्रियों को भी निशाना बनाया। इससे उत्पादन चेन का प्रभावित करना था। जांच उपद्रवियों के प्रशिक्षित होने और षडयंत्र के तहत हिंसा भड़काने की ओर इशारा कर रही हैं। एसआइटी की ओर से फंडिंग और साजिश की जांच जारी है।
उत्पादन सप्लाई चेन प्रभावित करने की आशंका
नोएडा में दो पहिया वाहन से लेकर हेलीकाप्टर के कलपुर्जों तक का निर्माण हो रहा है। यहां की कानून व्यवस्था से लेकर आधारभूत सुविधाओं के बल पर नोएडा गुणवत्ता और उत्पादन के मामले में नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। देश-विदेश के उत्पादों को भी टक्कर दे रहा है। ड्रोन से लेकर मोबाइल, आटोमोबाइल और हाजरी की इकाइयाें के लगातार स्थापित होने से चाइनीज और पाकिस्तानी देशों जैसे दुश्मनों की आंख में चुभ भी रहा है।
13 अप्रैल को हुई हिंसा के दौरान श्रमिकों के बीच घुसे उपद्रवियों की करतूत यहां की उत्पादन सप्लाई चेन को प्रभावित करने की आशंका की ओर इशारा कर रही हैं। जिस तरह से तीन सेकेंड में बाइकों में आग लगना सामने आया है। इससे इस बात की पुष्टी हुई कि आगजनी करने वाले एकदम प्रशिक्षित थे। उनको सुनियोजित साजिश के तहत बुलाया गया था।
वीडियो खंगालने के बाद मोबाइलों से जुटाए जा रहे साक्ष्य
पुलिस का प्रयास है कि साक्ष्य जुटाकर हिंसा भड़काने में शामिल गिरफ्तार आरोपितों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। पुलिस ने घटना के दौरान के वीडियो को खंगालने के बाद साक्ष्य जुटाए हैं। इन के मोबाइलों की भी जांच करा रही है।
औसतन आयुवर्ग था 25 वर्ष
पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आई है कि श्रमिकों के प्रदर्शन में अधिकांश युवा वर्ग शामिल था। इसकी औसत आयुवर्ग 25 वर्ष निकलकर सामने आया है, जबकि अमूमन किसान आंदोलन से लेकर देशभर में हुए आंदोलनों में शामिल लोगों का आयुवर्ग 45-50 वर्ष रहा है।
