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नोएडा में लेआउट न बदलने से लागू नहीं हुई नक्शा नीति, सुविधाओं के लिए तरस रहे लाखों किसान

Published: Thu, 16 Jul 2026 10:12 AM (IST)

नोएडा प्राधिकरण की गांव की नक्शा नीति आबादी भूमि का लेआउट न बदलने के कारण लागू नहीं हो पाई है, ...और पढ़ें

एआई जनरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. नोएडा में गांव की नक्शा नीति लागू नहीं हो पाई।

  2. आबादी भूमि का लेआउट न बदलना मुख्य कारण है।

  3. किसानों के भवन मानचित्र स्वीकृत नहीं हो पा रहे।

कुंदन तिवारी, नोएडा। नोएडा में आबादी की भूमि का लेआउट नहीं बदलने से अभी तक नोएडा प्राधिकरण में गांव की नक्शा नीति को लागू नहीं किया जा सका है, जबकि यह नीति 2010 बनकर तैयार हो चुकी थी।

बताया गया कि आदेश 2015 में जारी हुआ। सौ से अधिक किसानों से इस नीति के तहत प्राधिकरण में आवेदन किया। किसी भी किसान के भवन का मानचित्र नियोजन विभाग ने स्वीकृत नहीं किया है।

किसानों की कई मांगें

किसानों की मांग थी कि अधिगृहीत जमीन पर जिस तरह औद्योगिक, संस्थागत, वाणिज्यिक, आवासीय सेक्टर व ग्रुप हाउसिंग सोसायटी बनी है और फैसिलिटी दी जा रही है। उसी तरह किसानों की अधिग्रहण से मुक्त जमीन पर फैसिलिटी, यूजीआर, ग्रीन बेल्ट, पब्लिक यूटीलिटीस (सड़क, सीवर, पानी) की सुविधा दी जाए।

किसानों ने जमीन पर भवनों का मानचित्र प्राधिकरण से स्वीकृत कराने की मांग की थी, ताकि गांव भी नियोजित तरीके से बस सकें। लेआउट में बदलाव नहीं होने की वजह से किसानों की भूमि पर मानचित्र स्वीकृत नहीं किया जा सका।

प्राधिकरण ने यह भी माना है कि बिना मानचित्र स्वीकृत कराए निर्माण होने से सड़क, पानी, सीवर जैसी बुनियादी सुविधाओं की सही योजना नहीं बन पाती। इससे भविष्य में पूरे अधिसूचित क्षेत्र की आधारभूत संरचना प्रभावित हो सकती है।

समिति गठित करने का निर्देश

इसी को देखते हुए प्राधिकरण नीति में बदलाव करने का निर्णय लिया, ताकि नियमों को जनहित में सरल बनाया जा सके। इसके लिए एक समिति का प्रस्ताव तैयार कर बोर्ड में रखा गया। शासन ने तीनों प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक स्तर के अधिकारियों की एक समिति गठित करने का निर्देश दिया। साथ ही जल्द से जल्द नोएडा वासियों से सुझाव और आपत्तियां मांगने के लिए कहा।

संशोधन ग्रामीण इलाकों में हो रहे अंधाधुंध निर्माण को रोकने के लिए भी था। नए ड्राफ्ट में तय किया गया कि ग्रामीण इलाकों में भवन निर्माण से पहले नक्शा पास कराना जरूरी होगा।

भवन की ऊंचाई भी बनी बाधक

प्राधिकरण ने सेक्टर की तर्ज पर गांव की जमीन पर मानचित्र स्वीकृत करने की नीति बनाई। इसमें भवन की ऊंचाई को सामने की सड़क के मैनहोल ढक्कन से 15 मीटर की ऊंचाई को निर्धारित किया गया, जिस पर किसान अड़ गए, क्योंकि किसान 18 मीटर ऊंचाई का भवन की मांग कर रहे थे। इसके लिए उन्होंने नींव से थोड़ा ऊपर फर्श (प्लिन्थ) से ऊंचाई की माप करने की बात को अड़ गए। इस पर प्राधिकरण तैयार नहीं हुआ।

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प्राधिकरण में नीति निर्धारण करने वालों की नीयत ठीक नहीं है, क्योंकि किसानों की जमीन का लेआउट ही नहीं बदला तो नीति कैसे लागू की जा सकती है। - सचिन अवाना, वकील, भारतीय किसान परिषद

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