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नोएडा में बनेगा 1000 कुत्तों की क्षमता वाला डॉग शेल्टर, 12 करोड़ होंगे खर्च; 1 साल में होगा तैयार

Published: Sat, 03 Oct 2026 08:54 PM (IST)

नोएडा प्राधिकरण सेक्टर-123 में 12 करोड़ रुपये की लागत से 9000 वर्ग मीटर में 1000 कुत्तों की क्षमता वाला एक ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।

एआई जेनेरेटेड इमेज।

HighLights

  1. सेक्टर-123 में 1000 कुत्तों का नया शेल्टर बनेगा।

  2. इस पर प्राधिकरण 12 करोड़ रुपये खर्च करेगा।

  3. आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए एबीसी सेंटर भी होगा।

कुंदन तिवारी, नोएडा। शहर में एक हजार कुत्तों की क्षमता का डाग शेल्टर बनने जा रहा है। यह शेल्टर सेक्टर-123 में स्थापित किया जाएगा, जिसके लिए एक सप्ताह में टेंडर जारी किया जाएगा। लगभग नौ हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में बनने वाले इस शेल्टर पर प्राधिकरण करीब 12 करोड़ रुपये खर्च करेगा। शेल्टर के निर्माण में लगभग एक साल का समय लगेगा।

इसी बीच सेक्टर-93 बी में एक अन्य डाग शेल्टर होम का निर्माण अगले तीन-चार दिन में शुरू होगा। प्राधिकरण ने निर्माण एजेंसी को भूमि का कब्जा सौंप दिया है और यह शेल्टर लगभग चार महीने में तैयार हो जाएगा, जिसमें करीब 60 कुत्तों को रखा जा सकेगा।

हालांकि नोएडा प्राधिकरण हर बार इस प्रकार की योजना बनता है, लेकिन इसको धरातल पर उतार नहीं पा रहा है, इससे समाधान होने की बजाए नोएडा में आवारा कुत्तों की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे अक्सर लोग प्रभावित होते हैं। प्राधिकरण के पास इन कुत्तों को रखने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है।

बता दें कि पिछले वर्ष के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नोएडा प्राधिकरण ने इस दिशा में कदम उठाने का निर्णय लिया है। सेक्टर-50 और 135 में पहले से दो डाग शेल्टर हैं, जिनमें 350 कुत्तों की क्षमता है। इसके अलावा सेक्टर-94 में एक निजी एजेंसी द्वारा संचालित शेल्टर में 1600 कुत्तों को रखने की व्यवस्था है।

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एबीसी सेंटर भी शामिल 

आवारा कुत्तों की आबादी को मानवीय तरीके से नियंत्रित करने और रेबीज जैसी खतरनाक बीमारी को रोकने के लिए भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है।

इसके लिए यहां पर एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर भी शामिल किया जाएगा, जिसमें किसी क्षेत्र विशेष में संक्रमण और प्रजनन चक्र को नियंत्रित करने के लिए कम से कम 70 प्रतिशत आवारा कुत्तों की नसबंदी करने का लक्ष्य रखा जाता है।

इसमें आवारा कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी (बंध्याकरण) की जाती है। उन्हें रेबीज का टीका लगाया जाता है। सर्जरी और रिकवरी के बाद कुत्तों को उसी सुरक्षित स्थान पर वापस छोड़ दिया जाता है, जहां से उन्हें पकड़ा गया हो।

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डाग शेल्टर पर काम शुरू होने में दो-तीन महीने का समय लग सकता है। यहां कुत्तों के लिए डाक्टर से लेकर अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध रहेंगी। आक्रामक कुत्तों का इलाज भी किया जाएगा।

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आरएस यादव, महाप्रबंधक, नोएडा प्राधिकरण।