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नोएडा सोसायटी में नई लिफ्टों पर विवाद: पांच माह में खराब हुईं 120 लिफ्ट, टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल

By Swati BhatiaEdited By: Sonu Suman
Published: Tue, 15 Sep 2026 05:28 PM (IST)

नोएडा के केंद्रीय विहार-2 सोसायटी में पांच माह पहले लगीं सभी नई लिफ्टें खराब होने से गंभीर विवाद खड़ा हो ...और पढ़ें

HighLights

  1. नोएडा की सोसायटी में पांच माह में खराब हुईं सभी नई लिफ्टें।

  2. निवासी 14 करोड़ के टेंडर और कंपनी चयन प्रक्रिया पर उठा रहे सवाल।

  3. डिप्टी रजिस्ट्रार ने मामले की जांच के लिए ऑडिट के निर्देश दिए।

स्वाति भाटिया, नोएडा। सेक्टर-82 स्थित केंद्रीय विहार-2 की 2276 फ्लैटों वाली सोसायटी में नई लिफ्टों को लेकर उठे सवाल अब गंभीर विवाद में बदल गए हैं। सोसायटी में 120 लिफ्ट हैं और निवासियों का आरोप है कि पुरानी लिफ्टों को हटाकर वर्ष 2024 में लगानी शुरू की अभी पांच महीने पहले ही काम पूरा हुआ। नई लिफ्टों में से सभी पांच माह के भीतर खराब होने लगीं। कई लिफ्ट बार-बार बंद होने के कारण बुजुर्गों, मरीजों और दिव्यांगों की परेशानी बढ़ गई है।

विवाद सिर्फ लिफ्टों की खराबी तक सीमित नहीं है। निवासियों ने वर्ष 2023 में हुई टेंडर प्रक्रिया, कंपनी के चयन, नई लिफ्टों के आकार और पुरानी लिफ्टों के निस्तारण पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि करीब आठ करोड़ रुपये का कम दर वाला प्रस्ताव छोड़कर करीब 14 करोड़ रुपये के प्रस्ताव वाली ईसीई लिफ्ट्स को काम दिया गया। दोनों प्रस्तावों में करीब पांच से छह करोड़ रुपये के अंतर को लेकर निवासियों ने प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।

तकनीकी कमियां बताते हुए तीन कंपनियां बाहर

टेंडर में छह कंपनियों ने आवेदन किया था। छह सदस्यीय बोर्ड कमेटी ने तकनीकी कमियां बताते हुए तीन कंपनियों को बाहर कर दिया। इसके बाद ईशा लिफ्ट्स, ईसीई लिफ्ट्स और फोर्टिस कंपनियां दौड़ में बचीं। शिकायतकर्ताओं ने ईसीई कंपनी के पूर्व में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से ब्लैकलिस्टेड रहने का भी दावा किया है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

पांच माह के भीतर लिफ्टों में खराबी आने लगी

निवासियों का आरोप है कि पांच माह के भीतर लिफ्टों में खराबी आने लगी और कई को लंबे समय तक बंद रखना पड़ा। लिफ्ट में लगे सीसीटीवी के काम नहीं करने और टेंडर में बताए गए आकार से अलग आकार की लिफ्ट लगाए जाने का आरोप भी लगाया गया है। पुरानी लिफ्टों को हटाने के बाद उनके निस्तारण या बिक्री की प्रक्रिया पर भी सवाल उठे हैं।

मामला शिकायत के बाद जांच के दायरे में आ गया है। डिप्टी रजिस्ट्रार ने आडिट के निर्देश दिए हैं। जांच में टेंडर प्रक्रिया, कंपनी चयन, लिफ्ट खरीद, पुरानी लिफ्टों के निस्तारण, सिविल भुगतान तथा नई लिफ्टों की गुणवत्ता और आकार की जांच की जाएगी।

करीब आठ करोड़ रुपये के कम प्रस्ताव को छोड़कर 14 करोड़ रुपये की कंपनी को काम देने पर सवाल है।टेंडर और कंपनी चयन में हुए करोड़ों रुपये के अंतर की जांच होनी चाहिए, इसकी शिकायत की गई है। - मनोज कुमार, निवासी

कम दर वाली कंपनी के बजाय अधिक कीमत वाली कंपनी के चयन से प्रक्रिया पर संदेह पैदा हुआ है। लिफ्टों को लेकर शिकायत भी की गई हैं जांच के लिए। - इंद्र मोहन कौशल, निवासी

नई लिफ्ट लगने के पांच माह में ही खराबियां सामने आने लगीं और कई लिफ्ट लंबे समय तक बंद रहीं कई बुजुर्ग महिलाएं बच्चों के साथ फंस गई है। - दीपक बिंदल, निवासी

नई लिफ्टों की गुणवत्ता के साथ सीसीटीवी व्यवस्था पर भी सवाल हैं, टेंडर में तय मानकों और लिफ्ट बदलने के बाद भी समस्या खत्म नहीं हुई और पांच माह में खराबी चिंता का विषय है। - शिव कुमार चतुर्वेदी, निवासी

सभी 120 लिफ्ट नियमों के अनुसार संचालित हैं और उनके पंजीकरण, एनओसी व प्रमाणपत्र मौजूद हैं, टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी है और कुछ लोग बिना आधार शिकायत कर रहे हैं। - एमएल शर्मा, अध्यक्ष, केंद्रीय विहार-2

शिकायत के बाद आडिट के निर्देश दिए गए हैं, मामले में जांच की जा रही है, रिपोर्ट आने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता को स्पष्ट किया जाएगा। - निखिलेश, डिप्टी रजिस्ट्रार

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