इंजीनियर युवराज केस: जांच से अधिकारी बेचैन, पुलिस-प्राधिकरण की रिपोर्ट पर SIT 'असहमत'; 125 अफसरों के बयान दर्ज
इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में गठित एसआईटी ने नोएडा प्राधिकरण, पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा सौंपी गई ...और पढ़ें

इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले की जांच करने के लिए सेक्टर-6 स्थित नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पहुंची एसआईटी। जागरण

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जागरण संवाददाता, नोएडा। इंजीनियर युवराज मेहता के मौत के प्रकरण में गठित स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने नोएडा प्राधिकरण, पुलिस व जिला प्रशासन की सौंपी गई रिपोर्ट से इत्तेफाक नहीं रखा है। इसी के साथ एसआईटी ने स्पष्ट कर दिया है कि दर्ज बयान के आधार पर जिम्मेदार पर कार्रवाई तय है।
इसलिए शुक्रवार को नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पर पहुंचकर 125 लोगों के बयान दर्ज किए गए। इसमें एसडीआरएफ, फायर विभाग, सिविल व एनटीसी विभाग के जेई, मैनेजर, एसएम समेत अन्य शामिल रहे। एसआईटी के रूख से पुलिस, प्रशासन और प्राधिकरण अधिकारियों ने खलबली मची है। तीनों ने अपने आपको बचाते हुए मन माफिक रिपोर्ट तैयार कर एसआईटी को सौंपी थी।
रिपोर्ट में सबने खुद को सुरक्षित रखा
बता दें कि एसआईटी बृहस्पतिवार की देर शाम प्राधिकरण कार्यालय पहुंची थी। यहां पर नोएडा प्राधिकरण अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश, पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह, जिलाधिकारी मेधारूपम से मिलकर प्रकरण से संबंधित पूछताछ की। इस दौरान प्रकरण से संबंधित प्राधिकरण, पुलिस व जिला प्रशासन अपनी-अपनी रिपोर्ट सौंपी दी थी।
इस रिपोर्ट को उस समय जांच टीम लेकर चली गई। सूत्र बताते है कि शुक्रवार को एक बजकर 4 मिनट पर जब एसआईटी पहुंची तो उसने तीनों की रिपोर्ट से इत्तेफाक रखने से इनकार कर दिया है, क्योंकि रिपोर्ट देखकर यह लग रहा था कि जैसे अपने अपने लोगों को इसमें बचाने का प्रयास किया गया है।
पूछा-सूचना मिलने के बाद क्या किया?
आनन फानन में जिलाधिकारी ने अपने स्टैनों से संशोधित रिपोर्ट मंगवाई। उधर, पुलिस प्रशासन ने मौके पर ही रिपोर्ट को संशोधित करवाया। मौके पर सिटी मजिस्ट्रेट को बुलवाया गया। प्राधिकरण के एनटीसी विभाग के बर्खास्त जेई नवीन कुमार और तैनात एसएम विश्वास त्यागी, सिविल विभाग वर्क सर्किल दस प्रवीन सलोनिया, प्रबंधक अरविंद समेत अन्य अधिकारी व कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए। इसमें उनसे पूछा गया कि आप को किस समय सूचना मिली, उसके बाद आप लोगों ने क्या-क्या किया।
पूछा गया कि बचाव प्रयास में कहां खामी हुई?
इसमें एसडीआरएफ और फायर विभाग से पूछा गया कि जब आप लोग मौके पर पहुंच गए थे। युवराज की जान बचाने के लिए क्या-क्या उपाय किए, इन उपायों में कहां खामी रह गई, जिससे जान चली गई। पुलिस से भी सवाल किए कि कुछ दिन पहले ट्रक दुर्घटना के बाद पुलिस ने सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए। पुलिस के आला अधिकारी मौके पर क्यों नहीं पहुंचे। हालांकि इस पूछताछ की प्रक्रिया शुरू होने के दौरान ही पुलिस कमिश्नर कार्यालय से चली गई थी। समाचार लिखे जाने तक बयान दर्ज किए जा रहे थे।
प्राधिकरण कार्यालय के सभी गेट रहे बंद
प्राधिकरण कार्यालय पर शुक्रवार को पूरी तरह से पब्लिक डीलिंग बंद थी। कार्यालय के सभी गेट पर पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। किसी के अंदर आने व जाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध था। जहां पर एसआईटी बैठी थी, उस जगह जाने की इजाजत बिल्कुल नहीं थी। स्वागत कक्ष पर ही बाहर ही लोगों को समझा बुझाकर वापस भेजा जा रहा था।
