नोएडा में घट रहा यूपी के राजकीय पक्षी का परिवार, एक साल में 8% की कमी; 5 सालों में सबसे बड़ी गिरावट
नोएडा में राजकीय पक्षी सारस क्रेन की संख्या में लगातार कमी चिंता का विषय है। गर्मियों की गणना में 157 ...और पढ़ें

यूपी का राजकीय पक्षी सारस क्रेन। फोटो: आर्काइव
HighLights
नोएडा में सारस क्रेन की संख्या में गिरावट दर्ज
गर्मियों की गणना में 157 सारस ही मिले
पिछले पांच वर्षों में यह सबसे कम संख्या है
चेतना राठौर, नोएडा। गौतमबुद्ध नगर में सारस क्रेन की संख्या में आई कमी ने वन विभाग और पक्षी प्रेमियों की चिंता बढ़ा दी है। इस साल गर्मियों में हुए सारस आकलन में जिले में कुल 157 सारस दर्ज किए गए, जो पिछले पांच वर्षों में गर्मियों के आकलन के दौरान सबसे कम संख्या है। इनमें 112 वयस्क और 45 बच्चे शामिल हैं।
पिछले वर्ष की तुलना में इस बार जिले में 14 सारस कम दर्ज किए गए हैं। यह करीब आठ प्रतिशत की गिरावट है। हालांकि वन विभाग का कहना है कि पक्षियों की कोई निश्चित जगह नहीं होती और मौसम के अनुसार इनकी संख्या में बदलाव होता रहता है। सर्दियों में होने वाले अगले आकलन में संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
साल में दो बार होती है सारस की गिनती
जिले में सारस क्रेन की संख्या का आकलन वर्ष में दो बार किया जाता है। गर्मियों और सर्दियों में होने वाली इस गणना के दौरान सारस के प्रमुख ठिकानों और जलाशयों के आसपास इनकी संख्या दर्ज की जाती है।
इस बार गर्मियों में सामने आए आंकड़ों ने चिंता जरूर बढ़ाई है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि पक्षियों की गिनती के लिए कोई निश्चित समय या स्थान नहीं होता। सारस अलग-अलग मौसम में अपने ठिकाने बदल सकते हैं। ऐसे में अगले आकलन में इनकी संख्या बढ़ भी सकती है।
एक साल में करीब 8 प्रतिशत की गिरावट
इस साल जिले में 157 सारस दर्ज किए गए, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या अधिक थी। पांच वर्षों के आंकड़ों में भी इस बार की संख्या सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।
सारस क्रेन उत्तर प्रदेश का राजकीय पक्षी है। यह मुख्य रूप से आर्द्रभूमि, तालाबों और खेतों के आसपास अपना बसेरा बनाता है। किसानों के मित्र माने जाने वाले ये पक्षी अक्सर खेतों के आसपास दिखाई देते हैं।
प्राकृतिक आवास पर बढ़ रहा खतरा
सारस के लिए जलाशयों का सिकुड़ना, प्राकृतिक आवास में बदलाव और मानवीय गतिविधियों का बढ़ना चुनौती बन सकता है। खेतों में कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग, बिजली के ऊंचे तार और दलदली जमीनों को सुखाकर कंक्रीट के जंगलों में बदलना भी इनके अस्तित्व के लिए खतरा बन रहा है।
पक्षी प्रेमियों का मानना है कि सारस के प्राकृतिक आवासों को संरक्षित करने और इनके प्रजनन क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाने की जरूरत है।
मानसून में होता है प्रजनन
सारस क्रेन का मुख्य प्रजनन काल वर्षा ऋतु यानी जून से सितंबर के बीच होता है। जुलाई और अगस्त के दौरान प्रजनन और अंडे देने की प्रक्रिया अपने चरम पर रहती है। ऐसे में सर्दियों में होने वाले अगले आकलन में सारस की संख्या बढ़ने की उम्मीद अधिक है।
अगली गणना से यह साफ हो सकेगा कि गर्मियों में दर्ज कमी अस्थायी थी या जिले में सारस की संख्या में गिरावट का सिलसिला जारी है।
सारस की संख्या पर एक नजर
| वर्ष | सारस की संख्या |
|---|---|
| 2026 | 157 |
| 2025 | 169 |
| 2024 | 171 |
| 2023 | 170 |
| 2022 | 171 |
| 2021 | 170 |
| 2020 | 166 |
जिले में सारस क्रेन की कमी नहीं आई है। इनकी गणना संभव नहीं है, क्योंकि पक्षियों की कोई निश्चित जगह नहीं होती है। मौसम के अनुसार इनकी संख्या में इजाफा होता है।
- रजनीकांत मित्तल, प्रभागीय वनाधिकारी, गौतमबुद्ध नगर
