नोएडा बनेगा 'सेफ सिटी', 2200 AI कैमरों से होगी 24x7 पहरेदारी; चेहरे से ही ट्रेस हो जाएंगे बदमाश
नोएडा प्राधिकरण ने 217 करोड़ रुपये की सेफ सिटी परियोजना के लिए टेंडर जारी किया है, जिसके तहत शहर में 2200 हाईटेक कैमरे लगाए जाएंगे।

नोएडा में लगाए जाएंगे 2200 एआई कैमरे। फोटो: एआई जनरेटेड
HighLights
217 करोड़ की लागत से सेफ सिटी परियोजना शुरू
शहर में 2200 हाईटेक कैमरे स्थापित किए जाएंगे
सेक्टर-94 में नया इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम बनेगा
जागरण संवाददाता, नोएडा। नोएडा को देश के सबसे सुरक्षित शहरों में शामिल करने की दिशा में 217 करोड़ रुपये की सेफ सिटी परियोजना अब जमीन पर उतरने जा रही है।
प्राधिकरण ने परियोजना का टेंडर जारी कर दिया है और 17 सितंबर को प्री बिड बैठक होगी। योजना के तहत शहर में 2200 हाईटेक कैमरे लगाए जाएंगे, जिन्हें करीब 20 हजार स्थानों पर पहले से लगे सीसीटीवी कैमरों से जोड़ा जाएगा।
2200 कैमरों से जुड़ेगा शहर का नेटवर्क
सेफ सिटी परियोजना में ग्रुप हाउसिंग, मकान, दुकान, अस्पताल, स्कूल-कालेज, मंदिर-मस्जिद, सिनेमाघर, पब-बार, शॉपिंग माल, बाजार और औद्योगिक व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के बाहर लगे कैमरों को नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे शहर की सड़कों, गलियों और अलग-अलग इलाकों पर निगरानी का दायरा बढ़ेगा।
प्राधिकरण के महाप्रबंधक सिविल एसपी सिंह ने बताया कि परियोजना के लिए टेंडर जारी हो चुका है। 17 सितंबर को प्री बिड बैठक में कंपनियों के सवालों के जवाब दिए जाएंगे।
सेक्टर 94 में बनेगा नया कंट्रोल रूम
सेक्टर-94 में इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आइएसटीएमएस) के ऊपर नया कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। इसे मौजूदा कंट्रोल रूम से जोड़ा जाएगा। सेफ सिटी का कंट्रोल रूम सीधे पुलिस मुख्यालय के कंट्रोल रूम से भी जुड़ा रहेगा।
ग्रेटर नोएडा और यमुना क्षेत्र को भी इस व्यवस्था में शामिल किया जाएगा। किसी घटना की जानकारी मिलते ही नजदीकी थाना, चौकी, पीआरवी और डायल-112 को तत्काल सूचना भेजी जा सकेगी।
फेस डिटेक्शन से दिखेगी बदमाशों की लोकेशन
परियोजना में लगाए जाने वाले कैमरों में फेस डिटेक्शन की सुविधा होगी। इससे पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज बदमाशों की पहचान की जा सकेगी और उनकी लाइव लोकेशन कंट्रोल रूम में दिखाई देगी।
पैन-टिल्ट-जूम कैमरों को जरूरत के अनुसार किसी भी दिशा में घुमाया जा सकेगा। वहीं, बुलेट कैमरे तेज रफ्तार वाहनों की फुटेज भी रिकॉर्ड कर सकेंगे। इससे निगरानी व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल और बढ़ेगा।
एक महीने में कंपनी को मिलेगा काम
प्राधिकरण का लक्ष्य है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक महीने के भीतर कंपनी को काम आवंटित कर दिया जाए। पूरी परियोजना को एक वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना की आईआईटी से पहले ही जांच की जा चुकी है।
काम पूरा होने के बाद चयनित कंपनी पुलिसकर्मियों को पूरे सिस्टम के संचालन की ट्रेनिंग भी देगी। इससे कैमरों, कंट्रोल रूम और उससे जुड़ी निगरानी व्यवस्था को संचालित करने के लिए पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
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