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नोएडा में रिटायर्ड अधिकारी को 25 दिन डिजिटल अरेस्ट कर 18 लाख ठगे, ट्राईकर्मी बनकर किया था कॉल

Published: Sun, 12 Apr 2026 07:56 AM (IST)

ग्रेनो के सेवानिवृत्त रेलवे अधिकारी तिरुमलै नम्बी 25 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी का शिकार हुए। उन्हें ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।

सांकेतिक तस्वीर।

HighLights

  1. सेवानिवृत्त बैंककर्मी से 18 लाख रुपये की ठगी हुई।

  2. डिजिटल अरेस्ट और आधार दुरुपयोग का बहाना बनाया।

  3. फर्जी ट्राई व क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर ठगा।

जागरण संवाददाता, नोएडा। मैं क्राइम ब्रांच से बोल रहा हूं। आपका डेबिट कार्ड जेट एयरवेज के मालिक नरेश गोयल के घर से मिला है। आपके खिलाफ गिरफ्तारी के वारंट हैं। साइबर ठगों ने ग्रेटर नोएडा सेक्टर चार में रहने वाले रेलवे के सेवानिवृत्त अधिकारी तिरुमले नम्बी को यह सब बाते बोलीं।

गिरफ्तारी का डर दिखाकर 25 दिन डिजिटल अरेस्ट रखा। इस बीच संपत्ति की जांच के बहाने 18 लाख रुपये ठग लिए। पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में शनिवार को मुकदमा दर्ज कराया। 12 मार्च की सुबह तिरुमले नम्बी घर पर चाय पी रहे थे। इसी बीच कथित ट्राईकर्मी बनकर एक व्यक्ति ने फोन किया।

तत्काल गिरफ्तारी का दिया अल्टीमेटम 

दो घंटे में सिम बंद होने की बात कही। इसका कारण पूछने पर मुंबई क्राइम ब्रांच थाने में मुकदमा दर्ज होना बताया। कुछ देर बाद तिरूमले के पास कथित क्राइम ब्रांच का अधिकारी बन एक ठग की वाट्सअप कॉल आई। उसने बताया कि उनके आधार कार्ड से केनरा बैंक में खाता है। इसका डेबिट कार्ड जेट एयरवेज के मालिक नरेश गोयल के घर से मिला है।

तिरूमले ने घबराकर इनकार किया। ठग ने गिरफ्तारी से बचने के लिए जांच में सहयोग करने और संपत्ति की जांच कराने को बोला। राजी होने पर रकम को आरबीआई के सीक्रेट बैंक खाते में लेकर जांच के बाद लौटना बताया, लेकिन केस के बारे में अन्य को बताने पर तत्काल गिरफ्तारी का अल्टीमेटम दिया।

तिरूमले ने ठगों के उत्कर्ष स्माल फाइनेंस बैंक के खाते में 18 लाख रुपये की आरटीजीएस करा दी। ठग मोबाइल पर बात करने और मिलने वालों के साथ-साथ हर गतिविधि पर नजर रखते। तिरूमले ने कुछ देर बाद रकम वापस मांगी तो ठग और रकम देने को बोलने लगे। ठगी का शक होने पर तिरूमले ने एनसीआरपी पोर्टल और साइबर क्राइम थाना पुलिस से शिकायत की। इस तरह का फोन आए तो काट दें।

 पुलिस नहीं करती डिजिटल अरेस्ट 

डीसीपी साइबर सुरक्षा शैव्या गोयल ने बताया कि पुलिस किसी तरह का कोई डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है। साइबर ठग सिम, बैंक खाते और डेबिट कार्ड का मनी लांड्रिंग में प्रयोग होने का डर दिखाकर इस तरह से ठगी करते हैं। इस तरह से ठगों के संपर्क में आने पर तत्काल स्थानीय पुलिस को सूचित करें। किसी भी हाल में जांच आदि के नाम पर अपनी जमा पूंजी को ठगों के बैंक खातों में ट्रांसफर नहीं करें।

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