नोएडा श्रमिक हिंसा: 2018 से सरकार विरोधी नेटवर्क चला रहा था रूपेश, 1500 पन्ने की चार्जशीट में तीन नए नाम
ग्रेटर नोएडा की श्रमिक हिंसा मामले में रिचा ग्लोबल की जांच पूरी कर फेज दो कोतवाली पुलिस ने 1500 पन्ने ...और पढ़ें

नोएडा श्रमिक हिंसा प्रकरण। जागरण
HighLights
1500 पन्ने की चार्जशीट में 77 गवाह बनाए गए।
रूपेश राय 2018 से सरकार विरोधी नेटवर्क चला रहा था।
हिंसा भड़काने में तीन नए आरोपियों के नाम सामने आए।
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। वेतन बढ़ोतरी समेत अन्य मांगों को लेकर अप्रैल में हुई श्रमिक हिंसा में दर्ज मामले में से एक नोएडा के होजरी कांप्लेक्स स्थित रिचा ग्लोबल की जांच पूरी कर फेज दो कोतवाली पुलिस ने करीब 1500 पन्ने की चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी है। इसमें 77 गवाह बनाए गए हैं।
पुलिस ने प्रकरण में आरोपी रूपेश राय, आकृति व मनीषा समेत जेल में बंद 10 आरोपियों के खिलाफ हिंसा भड़काने में अहम साक्ष्य मिलने का दावा किया है। जांच में तीन और नाम सामने आए हैं, पुलिस इन आरोपितों को भी जल्द गिरफ्तार कर सकती है। सीडीआर से पुष्टि हुई कि आरोपित मौके पर मौजूद थे।
9 अप्रैल से 13 अप्रैल तक फेज-दो में श्रमिकाें को हड़ताल के लिए भड़काते रहे। यह भी सामने आया कि रूपेश 2018 से विभिन्न संगठनों के साथ जुड़कार सरकार विरोधी सामग्री सोशल मीडिया पर वायरल कर रहा था।
फेज-2 कोतवाली में 12 अप्रैल को रिचा ग्लोबल होजरी कांप्लेक्स की तरफ से तोड़फोड़, मारपीट, आगजनी समेत अन्य आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया गया था। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में मिले फुटेज व अन्य साक्ष्यों के आधार पर रूपेश राय, आदित्य आनन्द, सत्यम वर्मा, हिमांशु ठाकुर, आकृति, श्रृष्टि गुप्ता, मनीषा चौधरी, भूपेंद्र उर्फ भपी, सतीश कुमार उर्फ सिद्धार्थ, मदुरेश राय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
विवेचना में प्रियमबदा शर्मा, प्रेरित लोढ़ा और योगेश मीना के नाम भी सामने आए हैं। इन तीनों आरोपितों की अभी गिरफ्तारी नहीं की गई है। जांच में सामने आया कि श्रमिक हिंसा में 16 फरवरी से 4 मार्च 2026 तक इन आरोपितों ने सरकार विरोधी प्रदर्शनों में मुख्य भूमिका निभाई। भड़काऊ भाषण दिए और इंटरनेट मीडिया पर दुष्प्रचार किया।
2018 से सक्रिय नेटवर्क
पुलिस विवेचना में पता चला कि रूपेश राय 2018 से बिगुल मजदूर दस्ता, नौजवान भारत सभा, दिशा छात्र संगठन, स्त्री मुक्ति लीग और रिवोल्यूशनरी वर्कर्स पार्टी आफ इंडिया (आरडब्ल्यूपीआइ) के बैनर तले इंटरनेट मीडिया पर सरकार विरोधी सामग्री प्रसारित कर रहा था।
इससे पहले सितंबर 2014 में स्त्री मुक्ति लीग और नौजवान भारत सभा ने मार्क्स-लेनिन समर्थित प्रचार किया। नवंबर 2017 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में डीएससी आफिस के सामने धरने के लिए छात्रों को बुलाया गया। अप्रैल 2019 में आरडब्ल्यूपीआइ के लिए फंड जुटाया गया।
पिछले दो साल से जारी थीं भड़काऊ गतिविधियां
जांच में यह भी सामने आया कि जनवरी-फरवरी 2024 में भगत सिंह जन अधिकार यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश में भड़काऊ भाषण दिए गए। मार्च 2024 में जंतर-मंतर पर दिल्ली स्टेट आंगनवाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर यूनियन की हड़ताल में पथराव कराया गया।
अगस्त 2025 में हरनंदी डूब क्षेत्र में जनता को भड़काकर प्रदर्शन कराए गए। अप्रैल 2026 में मानेसर जैसी हिंसक घटना दोहराने के लिए श्रमिकाें को उकसाया गया।
हिंसा से जुड़े अहम साक्ष्य मिलने का दावा
पुलिस का दावा है कि 22 अप्रैल 2026 को रूपेश राय का मोबाइल फोन और 22 मार्च को करावल नगर दिल्ली से बरामद लैपटाप में भड़काऊ सामग्री मिली। घर से बरामद चार नक्शे में हिंसक के स्थान चिह्नित थे। 40 हजार रुपये देकर 3000 पर्चे छपवाए गए।
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रूपेश ने बनाया था वॉट्सअप पर रिचा ग्लोबल के नाम से ग्रुप
जांच में यह भी सामने आया कि रूपेश राय ने रिचा ग्लोबल नाम से वाट्सअप ग्रुप बनाया था। आदित्य आनंद ग्रुप का एडमिन था। वह अपने आवास पर सहआरोपितों की मीटिंग कर नोएडा में हिंसा भड़काने का षडयंत्र रचता था। सीडीआर में 10 और 11 अप्रैल को उसकी घटना स्थल पर मौजूदगी मिली है।
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