सुपरवाइजर से लेकर इंजीनियर तक की मिलीभगत, नोएडा में सरकारी जमीन पर ऐसे हुआ अवैध प्लॉटिंग का 'महाघोटाला'
नोएडा के मामूरा गांव में प्राधिकरण की अधिग्रहित जमीन पर भूमाफियाओं और प्राधिकरण कर्मियों की सांठगांठ से अवैध प्लाटिंग और ...और पढ़ें

नोएडा में मेट से लेकर इंजीनियर तक की भूमाफिया से सांठगांठ।
HighLights
प्राधिकरण कर्मियों और भूमाफियाओं की गहरी सांठगांठ।
मामूरा गांव में अधिग्रहित जमीन पर अवैध प्लाटिंग।
अवैध निर्माण पर प्राधिकरण की कार्रवाई में विफलता उजागर।
कुंदन तिवारी, नोएडा। प्राधिकरण में तैनात मेट, सुपरवाइजर, अवर अभियंता की भूमाफिया के साथ कितनी गहरी सांठगांठ है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मामूरा गांव में प्राधिकरण की अधिग्रहित व कब्जा प्राप्त जमीन पर अवैध प्लाटिंग होती है। बाहरी लोगों को जमीन बेचा जाता है।
बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर दी जाती है, लेकिन प्राधिकरण न तो अवैध निर्माण को रोकता है और न कोई कार्रवाई प्रस्तावित की जाती है। अब प्राधिकरण के अधिकारी यह कह कर पल्ला झाड़ रहे है कि जमीन गांव की आबादी की है, जिस पर प्राधिकरण की ओर से कार्रवाई नहीं की जा सकती है।
यह कुछ किसानों की जमीन थी, जिसका अधिग्रहण तो प्राधिकरण ने किया, उसका कब्जा भी लिया, लेकिन किसानों ने मुआवजा नहीं उठाया। कुछ लोगों की ओर से यहां पर छह-छह सौ वर्ग मीटर की प्लांटिंग की गई, उसके बाद भूखंड को बेचा गया। अब तक यह भूूखंड कई बार बिक चुका है।
सर्फाबाद व चौड़ा गांव के दबंग लोगों के पास भूखंड
वर्तमान में सर्फाबाद व चौड़ा गांव के दबंग लोगों के पास भूखंड है, जिनके केयर टेकर ही अब यहां पर पीजी का संचालन कर रहे है। जिस एनसीआर पीजी में अग्निकांड हुआ, उसका संचालक कृष्णा ही पांच पीजी का यहां पर संचालन कर रहा है, लेकिन प्राधिकरण का भूलेख विभाग इस बात से अनभिज्ञ है कि यहां की बेसकीमती जमीन उनकी है।
इसका कभी अधिग्रहण कर कब्जा भी लिया गया था, क्योंकि प्राधिकरण के मेट, सुपरवाइजर, अवर अभियंता जो रिपोर्ट वरिष्ठ प्रबंधक को उपलब्ध कराते है, उससे शीर्ष अधिकारियों को अवगत करा दिया जाता है। इस रिपोर्ट के आधार पर नोएडा प्राधिकरण वर्क सर्किल पांच वरिष्ठ प्रबंधक राज कमल सिंह ने शीर्ष अधिकारियों को बता दिया कि यह जमीन आबादी की है।
मेट, सुपरवाइजर, जेई की कारगुजारी और निगरानी तंत्र की विफलता
जबकि मामूरा में बनी इमारत में लगी आग प्राधिकरण के मेट, सुपरवाइजर, जेई की कारगुजारी और निगरानी तंत्र की विफलता को सीधा उजागर करती है। यह स्थिति नोएडा के सिर्फ मामूरा गांव की नहीं है, बल्कि अधिकांश गांव में यही स्थिति है। इसलिए अवैध इमारतें तेजी से बन गईं है अभी भी यह कार्य धड़ल्ले से जारी है।
प्राधिकरण में तैनात मेट, सुपरवाइजर, जेई अपनी जिम्मेदारी का निर्वाहन ठीक से नहीं कर रहे है। इसलिए अवैध निर्माण पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। गांव में सैकड़ों की संख्या में बहुमंजिला इमारतें खडी होती जा रही है।
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