नोएडा-ग्रेटर नोएडा में 2 लाख परिवारों का सपना अधूरा, इस नवरात्र में भी अधूरे रह गए 150 प्रोजेक्ट
नोएडा-ग्रेटर नोएडा में दो लाख फ्लैट खरीदारों का घर मिलने का सपना इस नवरात्र में भी अधूरा रह गया। लगभग ...और पढ़ें

नोएडा-ग्रेटर नोएडा के करीब दो लाख परिवारों को इंतजार है अपने घर में गृह प्रवेश करने का। एआई इमेज
HighLights
दो लाख फ्लैट खरीदारों का घर का सपना अधूरा।
150 से अधिक बिल्डर प्रोजेक्ट अधूरे पड़े हैं।
NCLT, रेरा, प्रशासन से न्याय नहीं मिल रहा।
धर्मेंद्र चंदेल, ग्रेटर नोएडा। शारदीय नवरात्र शुरू होते ही बाजार फूल-मालाओं से सज गया है। लोग अपने नए घर में गृह प्रवेश के लिए पंडित जी से शुभ मुहूर्त निकलवा रहे हैं, लेकिन नोएडा-ग्रेटर नोएडा की ऊंची-ऊंची अधूरी इमारतों की तरफ टकटकी लगाए बैठे करीब दो लाख परिवारों के लिए हर नवरात्र एक ही कहानी दोहराता है, इस बार भी नहीं। कहने का मतलब दो लाख फ्लैट खरीदारों का घर मिलने का सपना इस नवरात्र में भी पूरा नहीं हो सका।
रिकवरी के 90 प्रतिशत आदेश एसडीएम व तहसीलदार
करीब डेढ़ सौ अधूरे बिल्डर प्रोजेक्टों को पूरा करने के लिए कोई प्रयास नहीं हुए। ज्यादातर अधूरे प्रोजेक्ट एनसीएलटी में हैं। वहां तारीख के अलावा खरीदारों को कुछ नहीं मिल रहा। खरीदारों का एनसीएलटी से भरोसा उठा चुका है।
यही हाल रेरा का है। वहां भी खरीदारों को न्याय नहीं मिल रहा है। रेरा आदेश तो कर देता है, लेकिन जिला प्रशासन उन पर अमल कराने में नाकाम साबित हुआ है। रिकवरी के 90 प्रतिशत आदेश एसडीएम व तहसीलदार के यहां लंबित है।
बिल्डरों के साथ मिलीभगत के कारण रिकवरी के आदेशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया हैं। 50 हजार से अधिक फ्लैटों के निर्माण की जिम्मेदारी एनबीसीसी के पास है।
कागजों में 12 साल पहले बन चुका है घर
समय सीमा बीतने के बाद भी एनबीसीसी फ्लैटों का निर्माण पूरा नहीं कर सकी है। वहीं खरीदारों ने बैंकों से ऋण लेकर फ्लैट की कीमत बिल्डर के यहां जमा की थी। अब किराये के मकान में रहना पड़ रहा है। वेतन का आधा हिस्सा ईएमआई और घर किराये पर खर्च हो जाता है। यह वह लोग हैं जिनका घर कागजों पर 10 से 12 साल पहले ही बन चुका है, लेकिन जमीन पर अब भी ईंट-सीमेंट का ढांचा ही खड़ा है।

2012 से बिल्डर कटवा रहा है चक्कर
दिल्ली के मयूर विहार वन में रहने वाले शीतल ने ग्रहणी है। पैसा जोड़कर ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित कैपिटल एथेना बिल्डर के यहां फ्लैट बुक कराया। 79 लाख रुपये बिल्डर को दे दिए। बिल्डर ने 2016 में फ्लैट देने का वादा किया। 2016 से 2027 आने को है। हर बार नवरात्रों में ग़ृह प्रवेश की योजना बनाते हैं। बिल्डर फ्लैट नहीं दे रहा है। यह कहानी अकेले शीतल की नहीं, दो लाख खरीदारों की है।
बिल्डरों ने खरीदारों के पैसे से बनाई दूसरी संपत्ति
नवरात्रों में जब बिल्डर के साइट ऑफिस के बाहर नवरात्र स्पेशल ऑफर, आज बुक करें के बैनर लगते हैं, तो पुराने खरीदारों का गुस्सा फूट पड़ता है। उनके रुपये से ही नए ग्राहकों के लिए ऑफिस सजाया जा रहा है।
पुराने खरीदारों का घर कब बनेगा? इसका जवाब किसी के पास नहीं है। प्राधिकरण सुनता नहीं, बिल्डर टालता है और बैंक एक दिन की देरी पर फोन करना शुरू कर देता है। बिल्डरों ने खरीदारों के पैसे से तमाम संपत्ति जोड़ ली है। उनसे भी कमाई कर रहे हैं।
बिल्डर हजम कर गया पीएफ का रुपया
सवाल सिर्फ फ्लैट का नहीं है, सवाल उस भरोसे का है जो एक मध्यम वर्गीय परिवार अपने जीवन भर की कमाई एक ईंट पर लगा देता है। खुर्जा के महमूदपुर गांव के रहने वाले राजकुमार सिंह राघव ने 2012 में ग्रेटर नोएडा के पी थ्री सेक्टर स्थित टू होम्स किंग्स पार्क में फ्लैट बुक कराया था।
सीआरपीएफ में 40 वर्ष की सेवा के बाद पीएफ के रूप में 38 लाख रुपये मिला। सारा पैसा बिल्डर को दे दिया। अभी तक राजकुमार को फ्लैट नहीं मिला है। हर नवरात्र पर उन्हें पता चलता है कि ईंट अभी भी हवा में ही लटकी है। वह अपने सपनों के घर की चौखट तक नहीं देख पा रहे हैं।
| क्षेत्र का नाम | प्रोजेक्ट की संख्या |
| नोएडा | 56 |
| ग्रेटर नोएडा | 96 |
| एनसीएलटी | 32 |
बिल्डरों पर लगातार दबाव बनाकर खरीदारों को फ्लैट दिलवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। बिल्डरों पर और दबाव बनाया जाएगा।
-कृष्णा करूणेश, सीईओ, नोएडा।
बिल्डरों के साथ बैठकर उनसे अधूरे प्रोजेक्टों को पूरा कराने के लिए प्राधिकरण प्रयास कर रहा है। प्रयास और तेज किए जाएंगे।-एनजी रवि, सीईओ, ग्रेटर नोएडा।
यह भी पढ़ें- नोएडा एक्सप्रेसवे पर घर खरीदने वालों की हो गई बल्ले-बल्ले! सिर्फ इतने समय में प्रॉपर्टी का दाम हुआ 3 गुना से ज्यादा
यह भी पढ़ें- नोएडा की नौकरी छोड़कर देहरादून में खोला सेंटर, विदेशी नागरिकों को ठगने वाले गिरोह का पर्दाफाश
