नोएडा के डियर पार्क में दिखेगा अफ्रीका का नजारा, प्राकृतिक माहौल के लिए लगेंगे 18-20 फीट ऊंचे 3490 पेड़
नोएडा के बायोडायवर्सिटी पार्क में बन रहे डियर पार्क में प्राकृतिक माहौल के लिए 3490 पेड़ लगाए जाएंगे, साथ ही विभिन्न प्रजातियों के हिरण और अफ्रीकी एंटीलोप लाए जाएंगे।

लगेंगे ऊंचे पेड़।
HighLights
प्राकृतिक माहौल के लिए 3490 पेड़ लगाए जाएंगे।
विभिन्न प्रजातियों के हिरण और अफ्रीकी एंटीलोप लाए जाएंगे।
दिसंबर तक पार्क को सनसेट सफारी के रूप में विकसित करेंगे।
कुंदन तिवारी, नोएडा। नोएडा सेक्टर-91 स्थित बायोडायवर्सिटी पार्क में विकसित हो रहे डियर पार्क में हिरणों और अन्य वन्यजीवों को प्राकृतिक माहौल देने के लिए 3490 पेड़ लगाए जाएंगे। पेड़ों को पहले नर्सरी में 18 से 20 फीट ऊंचा किया जाएगा। इसके बाद इन्हें पार्क के बाड़ों में ट्रांसप्लांट किया जाएगा।
नोएडा प्राधिकरण की योजना के तहत बाड़ों में पिलखन, चकरेशिया, मौलश्री, पाकड़, बाटल ब्रश, अशोक, सेमल और कदम प्रजाति के पेड़ लगाए जाएंगे। इससे वन्यजीवों को छाया और हरियाली के बीच रहने का माहौल मिलेगा। बाड़ों की बनावट और पेड़-पौधों की व्यवस्था ऐसी होगी कि वन्यजीव एक-दूसरे की आवाज भी सुन सकें।
12 छोटे-बड़े बाड़े बनाए जा रहे
नोएडा प्राधिकरण के उद्यान निदेशक आनंद मोहन सिंह ने बताया कि करीब 12 छोटे-बड़े बाड़े बनाए जा रहे हैं। इनमें से नौ का निर्माण पूरा हो चुका है और बाकी पर काम चल रहा है। प्रत्येक बाड़े में करीब 18 से 20 पौधे लगाने की योजना है। पेड़ों की प्रजातियों का चयन वन्यजीवों के अनुकूल वातावरण को ध्यान में रखकर किया गया है।

करीब 30 एकड़ में विकसित हो रहे इस पार्क पर लगभग 40 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। यहां कुल 99 वन्यजीव रखने की योजना है, जिनमें 33 नर और 66 मादा होंगे। माउस डियर, स्पॉटेड डियर, सांभर, हाग डियर, स्वैम्प डियर और बार्किंग डियर के अलावा ब्लैकबक, चिंकारा और चौसिंघा भी लाए जाएंगे। इन्हें जू से मंगवाने के लिए आवेदन किया गया है।
दिसंबर तक पार्क निर्माण पूरा करने का लक्ष्य
अफ्रीका की स्प्रिंगबाक, इम्पाला, वाइल्डबीस्ट और लेसर कुडू जैसी एंटीलोप प्रजातियां भी यहां होंगी। जलीय पक्षियों के लिए एवियरी बनाने की योजना है। वन्यजीवों को लाने की प्रक्रिया सेंट्रल जू अथॉरिटी के दिशा-निर्देशों के अनुसार होगी।

प्राधिकरण का लक्ष्य दिसंबर तक पार्क का निर्माण पूरा करना है। इसके बाद वन्यजीवों को चरणबद्ध तरीके से लाया जाएगा। पार्क को सनसेट सफारी की तर्ज पर विकसित करने की योजना है, ताकि लोग सूर्यास्त के बाद रात करीब 10 बजे तक हिरणों और जलीय पक्षियों को देख सकें।
विशेष लाइटिंग की व्यवस्था इस तरह होगी कि दर्शक वन्यजीवों को देख पाएं और उनकी प्राकृतिक दिनचर्या पर कम से कम असर पड़े।
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