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नोएडा: सुपरटेक केपटाउन के 600 फ्लैटों की रजिस्ट्री की जगी उम्मीद, अधूरा निर्माण पूरा होने का रास्ता भी साफ

Published: Thu, 29 Oct 2026 06:26 PM (IST)

नोएडा प्राधिकरण ने सुपरटेक केपटाउन (ओआरबी) परियोजना को लिगेसी स्टाल्ड श्रेणी में शामिल करने की मंजूरी दी है। इससे 600 ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर, एआई जनरेटेड।

सांकेतिक तस्वीर, एआई जनरेटेड।

HighLights

  1. नोएडा प्राधिकरण ने सुपरटेक केपटाउन को लिगेसी स्टाल्ड श्रेणी में डाला।

  2. 600 फ्लैट खरीदारों के लिए रजिस्ट्री की उम्मीदें बढ़ीं।

  3. अधूरे निर्माण को पूरा करने का मार्ग प्रशस्त हुआ।

कुंदन तिवारी, नोएडा। सुपरटेक ओआरबी परियोजना (सुपरटेक केपटाउन) के करीब 600 फ्लैट खरीदारों के लिए राहत की उम्मीद जगी है। नोएडा प्राधिकरण के बोर्ड ने परियोजना को लिगेसी स्टाल्ड परियोजना की श्रेणी में शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

इससे डेवलपर को बकाया राशि जमा कर निर्माण पूरा करने और फ्लैट खरीदारों के पक्ष में रजिस्ट्री शुरू कराने का रास्ता खुल सकता है। प्राधिकरण की देयता के कारण लंबे समय से रजिस्ट्री अटकी हुई है। प्राधिकरण के अनुसार सुपरटेक ओआरबी प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की परियोजना में सात टावर और कुल 876 फ्लैट हैं।

इनमें से दो टावरों के 200 फ्लैटों का अधिभोग प्रमाण पत्र जारी हो चुका है लेकिन प्राधिकरण का बकाया जमा नहीं होने से खरीदारों के पक्ष में रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। अब शासन की 21 दिसंबर 2023 की नीति के तहत परियोजना को राहत देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

प्राधिकरण को किया जाना है 110.59 करोड़

परियोजना में 13 अक्टूबर 2023 को कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआइआरपी) शुरू हुई थी। इसके बाद नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने 18 नवंबर 2025 को प्राधिकरण की देयता के भुगतान के लिए ब्रिकबॉस इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड की समाधान योजना को मंजूरी दी। इसके तहत प्राधिकरण को 110.59 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना है।

प्राधिकरण की समिति ने लिगेसी स्टाल्ड परियोजनाओं की नीति के तहत लाभ देने और 13 अक्टूबर 2023 तक की देय राशि की गणना कराने की संस्तुति की थी। नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश ने 26 अक्टूबर 2026 को संस्तुति मंजूर कर प्रस्ताव बोर्ड के समक्ष रखने के निर्देश ग्रुप हाउसिंग विभाग को दिए थे।

लिगेसी नीति के तहत राहत मिलने से डेवलपर को बकाया चुकाने और अधूरा निर्माण पूरा करने में मदद मिलेगी। इससे रजिस्ट्री शुरू होने की संभावना है और खरीदारों को फ्लैटों का कानूनी मालिकाना हक मिल सकेगा।

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