नोएडा में नालियों के उपचार से यमुना नदी को मिलेगी नई जिंदगी, नोएडा अथॉरिटी बोर्ड ने शुरू की नई पहल
नोएडा अथॉरिटी बोर्ड ने नालियों से निकलने वाले घरेलू कचरे के इन-सीटू और एक्स-सीटू ट्रीटमेंट की योजना को मंजूरी दी ...और पढ़ें

नोएडा अथॉरिटी बोर्ड ने नालियों से निकलने वाले घरेलू कचरे के इन-सीटू और एक्स-सीटू ट्रीटमेंट की योजना को मंजूरी दी है। एआई जेनरेटेड
HighLights
नोएडा अथॉरिटी ने नालियों के उपचार योजना को मंजूरी दी।
योजना का लक्ष्य यमुना नदी को प्रदूषण से बचाना है।
एनजीटी के निर्देशों पर NEERI ने अध्ययन किया।
कुंदन तिवारी, जागरण नोएडा। शहर की नालियों से बहने वाले घरेलू कचरे के इन-सीटू और एक्स-सीटू ट्रीटमेंट के लिए एक कार्य योजना को नोएडा अथॉरिटी बोर्ड ने मंज़ूरी दे दी है। यह प्रोजेक्ट लंबे समय से पेंडिंग था। इसका मकसद दिल्ली से आने वाली कोंडली सिंचाई नहर और यमुना नदी में बिना ट्रीट किए सीवेज के बहाव को रोकना है।
अथॉरिटी के जल विभाग के जनरल मैनेजर आरपी सिंह ने बताया कि यह मंज़ूरी अभिषेक कुसुम गुप्ता बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा जारी निर्देशों के पालन में दी गई है। 3 अगस्त, 2022 के अपने आदेश में, NGT ने शहरी स्थानीय निकायों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि बिना ट्रीट किया हुआ गंदा पानी सिंचाई नहरों में न छोड़ा जाए।
इसके बाद, नोएडा अथॉरिटी ने नालियों की स्थिति, प्रदूषण के स्तर और ट्रीटमेंट के उपायों का आकलन करने के लिए नेशनल एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) को नियुक्त किया। अथॉरिटी और NEERI के बीच 21 जुलाई, 2022 को एक MoU पर साइन किए गए।
NEERI ने नोएडा अथॉरिटी क्षेत्र में लगभग 30 नालियों का अध्ययन किया, जिनमें से 24 एक्टिव पाई गईं। बाकी नालियां या तो सूखी हैं या उनमें कोई बहाव नहीं है। एक्टिव नालियों को D1 से D24 तक कोड दिया गया और उनके बहाव और प्रदूषण के स्तर के आधार पर क्लासिफाई किया गया।
कोर्ट के निर्देशों के तहत, कुछ नालियों को पहले ही इंटरसेप्ट किया जा चुका है। नाली D20 को होजरी कॉम्प्लेक्स इलाके में सीवेज पंपिंग स्टेशन (SPS) पर रोका गया है। नालियां D6, D7 और D8 को सेक्टर-33 में सम्प वेल पर इंटरसेप्ट किया गया है। बोर्ड के अनुसार, नाली D2 अभी सूखी है, जबकि नाली D5 STP-54 से ट्रीट किया हुआ पानी ले जाती है और सेक्टर-23 में सिंचाई नहर में मिलती है, इसलिए इन पर कोई अतिरिक्त काम करने की ज़रूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि बोर्ड ने अन्य नालियों को इंटरसेप्ट करने के लिए टाइमलाइन को मंज़ूरी दे दी है। इस योजना के तहत, नालियां D10 और D11 को सेक्टर-50 में STP (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) से जोड़ा जाएगा, और नाली D18 को सेक्टर-106, भंगेल में SPS (सीवेज पंपिंग स्टेशन) से जोड़ा जाएगा, ताकि सीवेज ट्रीटमेंट सुनिश्चित किया जा सके। ज़्यादा प्रदूषण वाले प्रमुख नालियों के लिए STP के निर्माण को भी मंज़ूरी दी गई है।
NEERI द्वारा तैयार की गई डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) के अनुसार, ड्रेन D3 (सेक्टर-22), D21 (गेझा रोड, बायोडायवर्सिटी पार्क के पास), और D24 (सेक्टर-126 से मयूर स्कूल की ओर) के लिए मूविंग बेड बायोफिल्म रिएक्टर (MBBR) टेक्नोलॉजी पर आधारित STP बनाए जाएंगे।
इन प्रोजेक्ट्स पर लगभग 75 करोड़ रुपये का खर्च आएगा और इन्हें जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके अलावा, ड्रेन D22 (सेक्टर-44, महामाया फ्लाईओवर से पंचशील की ओर) के लिए FABAS टेक्नोलॉजी पर आधारित एक STP को मंज़ूरी दी गई है। इस प्रोजेक्ट पर लगभग 127.5 करोड़ रुपये का खर्च आएगा और इसे भी जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
NEERI बाद में अन्य प्रमुख ड्रेन D4, D9, D12, D15, D16, और D19 के लिए DPR जमा करेगी। इन ड्रेन पर ट्रीटमेंट का काम अगले चरणों में किया जाएगा, जिसकी डेडलाइन दिसंबर 2028 है। जिन ड्रेन D13, D14, D17, और D23 में प्रदूषण का स्तर कम से मध्यम है, उनके लिए बायो-रेमेडिएशन और फाइटो-रेमेडिएशन तकनीकों को अपनाया जाएगा।
