जागरण संवाददाता, नोएडा। मोबाइल पर गेम खेलने की लत ने मासूम को लील लिया। पिता ने बच्चे को डांटते हुए कहा कि, मोबाइल गेम की वजह से उसकी पढ़ाई बर्बाद हो रही है, इसलिए वह इससे दूर रहे। यह डांट बच्चे के दिल में इस कदर घर कर गई कि उसने मौत को गले लगा लिया। इकलौते बेटे की मौत से अब स्वजन का रो-रोकर बुरा हाल है।

महोबा निवासी देवीदीन परिवार के साथ सेक्टर-110 स्थित श्रमिक कुंज में रहते थे। वह पेशे से राजमिस्त्री है। परिवार में तीन बेटी व 14 वर्षीय पुत्र कोमल था। वह इलाके के एक निजी स्कूल में कक्षा सातवीं में पढ़ाई कर रहा था। स्कूल बंद है तो छात्र घर पर ही था। अधिकांश समय पिता का मोबाइल लेकर उसपर गेम खेलता था।

बुधवार रात करीब 8 बजे भी छात्र मोबाइल पर गेम खेल रहा था, तो पिता ने उसे टोका और मोबाइल ले लिया। इसके बाद सभी ने रात का खाना खाया और सोने चले गए। उधर गेम खेलने से रोकने की बात से आहत छात्र बिना बताए स्वजन को घर से बाहर चला गया। स्वजन ने उसकी काफी तलाश की, लेकिन कुछ पता नहीं चला। बृहस्पतिवार सुबह लोटस पनाचे की निर्माणाधीन साइट पर उसका शव पड़ा मिला।

यहां तैनात एक सुरक्षा गार्ड ने पुलिस के साथ इसकी जानकारी स्वजन को दी। सूचना पर फेस-2 कोतवाली पुलिस भी पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। एडिशनल डीसीपी सेंट्रल नोएडा इलामारन जी ने बताया कि मोबाइल पर गेम खेलने से रोकने पर छात्र ने निर्माणाधीन बिल्डिंग से छलांग लगाकर आत्महत्या की है।

गेम टास्क पूरा करने की भी आशंका

आशंका यह भी व्यक्त की गई है कि छात्र मोबाइल गेम के टास्क पूरा करने के लिए बिल्डिंग के पास पहुंचा। यहां पहुंचने के बाद उसने छलांग लगाई। बताया जा रहा है कि जिस मोबाइल गेम को वह खेल रहा था, उसमें गेम की अगली स्टेज में पहुंचने के लिए कोई न कोई टास्क पूरा करना होता है। फिलहाल पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है।

बच्चों का रखे ध्यान : डॉ सुनील अवाना

मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील अवाना ने बताया कि अगर बच्चे को मोबाइल पर गेम खेलने की आदत है और टोकने पर गलत कदम उठाने की बात कहता है तो स्वजन बच्चे पर नजर बनाए रखें। उसकी बात को नजरअंदाज न करें। बच्चे की काउंसलिंग कराएं। मोबाइल गेम से ध्यान हटाने के लिए उसे दूसरी चीजों में व्यस्त रखें।