नोएडा [कुंदंन तिवारी]। प्राधिकरण कार्यालय में औद्योगिक लेखा विभाग के पास ही केमिकल की तीन बड़ी केन रखी हुईं थीं, जिनका इस्तेमाल शहर के सैनिटाइजेशन कार्य में किया जाना था। यदि इन तक आग पहुंच जाती तो पूरा कार्यालय जल कर खाक हो सकता था। बहरहाल दमकल के पहुंचते ही केमिकल की केन को वहां से हटा दिया गया। आग लगने के साथ-साथ पानी की बौछारों से भी सैकड़ों फाइलें खराब हो गई हैं।

प्राधिकरण के मुख्य गेट से ही आग लगने व उसके आसपास के स्थान को सील कर दिया गया है। प्राधिकरण अधिकारियों का दावा है कि आग से बेशक फाइलें जल गईं हैं लेकिन इनका रिकार्ड सुरक्षित है। औद्योगिक लेखा विभाग से संबंधित फाइलों का डिजिटाइलेशन और फाइलों के डाटा को कम्पूयटर पर फीड करने का काम लगभग पूरा कर लिया गया है।

छह सदस्यीय टीम करेगी जांच

प्राधिकरण मुख्य कार्यपालक अधिकारी रितु माहेश्वरी ने एसीईओ प्रवीण कुमार मिश्र की अध्यक्षता में ओएसडी राजेश कुमार, डॉ संतोष कुमार उपाध्याय, महाप्रबंधक सिविल राजीव त्यागी व केके अग्रवाल, सहायक महाप्रबंधक सिस्टम की छह सदस्यीय जांच कमेटी बना दी है। यह समिति आग लगने के कारण, कार्यालय में रखे रिकार्ड की क्षति का आंकलन व आगजनी के लिए जिम्मेदार का निर्धारण करेगी और एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट देनी होगी। ओएसडी राजेश कुमार ने सुबह कार्यालय पहुंचने वाले कर्मचारियों के बयान को दर्ज करना शुरू कर दिया है। प्राथमिक जांच के आधार पर यह बयान दर्ज किए गए है। प्लाट सेक्शन के एक- एक कर्मचारियों से जानकारी हासिल की गई है।

एक वर्ष में प्राधिकरण में लगी तीसरी आग

एक साल में यह तीसरी आग की घटना है, जिसमें नोएडा प्राधिकरण को दो चार होना पड़ा है और भारी नुुकसान झेलना पड़ा है। पिछले वर्ष 26 जून को नोएडा प्राधिकरण में वर्क सर्किल-10 और नोएडा ट्रैफिक सेल के दफ्तर में भी बड़ी आग लग गई थी। आज तक दोनों ऑफिस बनकर तैयार नहीं हो सके हैं। यहां पर भी सैकड़ों फाइलें जल खाक हो गई थी। इसके बाद औद्योगिक विभाग में भी आग लगी।

उसमें भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। सोमवार को औद्योगिक लेखा विभाग जैसे महत्वपूर्ण कार्यालय में आग लगी। कार्यालय के मुख्य गेट से प्रवेश करते ही सामने औद्योगिक लेखा विभाग है। इसमें लेखा विभाग में औद्योगिक के साथ-साथ व्यावसायिक और संस्थागत विभाग के रिकार्ड से संबंधित फाइलें रहती हैं। इसी विभाग के सामने से आला अधिकारी सीढिय़ों के जरिए प्रथम तल पर स्थित अपने ऑफिस में जाते हैं। सारा कार्यालय लकडिय़ों का बना हुआ है, सीलिग हो रखी है। ऐसे में फाइल के साथ-साथ इनमें भी आग तेजी से पकड़ गईं। आग सेमहत्वपूर्ण फाइलों के जलने के अलावा सर्वर भी क्षतिग्रस्त हो गया। खास बात यह है कि आग बुझाने के लिए प्राधिकरण में लगे यंत्र भी वहां मौजूद गार्ड नहीं चला सके। वजह, इसकी यह है कि इनको भी कभी इसका प्रशिक्षण नहीं दिया गया।

औद्योगिक व संस्थागत विभागों को पहुंचा नुकसान

अधिकारिक सूत्रों की मानें तो बीते सालों में औद्योगिक के साथ-साथ व्यावसायिक और संस्थागत विभागों से काफी महंगे व महत्वपूर्ण स्थानों पर भूखंड आवंटित हुए हैं। विगत कुछ सालों में इन्हीं विभागों के जरिए आवंटित भूखंडों की प्रक्रिया पर आरोप लगते आए हैं। नुकसान भी इन्हीं विभाग की फाइलों का ही हुआ है। ऐसे में किसी बड़ी साजिश से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।

भूखंड आवंटन योजना पर चल रहा है काम

जिस विभाग में आग लगी है वहां औद्योगिक भूखंड आवंटन योजना पर काम चल रहा था। जल्द ही उद्यमियों को भूखंड आवंटन किया जाना था इसके लिए साक्षात्कार व ड्रा किया जाना था। इससे पहले ही आग लगने के प्रकरण ने इस योजना को आगे खिसका दिया है।

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