जागरण संवाददाता, नोएडा। कोरोना काल में इस समय नकली रेमडेसिविर का कारोबार भी खूब फल फुल रहा है। कालाबाजारी करने वाले दूसरे इंजेक्शनों पर लेबल बदलकर उसे बाजार में बेच रहे हैं। दो दिन पहले नोएडा पुलिस ने एक ऐसे ही गिरोह को पकड़ा था जिसके पास से काफी मात्रा में इंजेक्शन बरामद हुए थे। इस गिरोह के लोग इंजेक्शन बेचने के लिए इंटरनेट मीडिया का भी सहारा ले रहे थे। इसमें कुछ बड़े नेता और उनकी जांच पहचान के लोग भी शामिल थे। कुछ अस्पतालों में काम करने वालों की भी भूमिका नजर आई थी।

सेक्टर 58 कोतवाली पुलिस ने नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने वाले गिरोह के संबंध में अहम जानकारी हासिल की है। पुलिस की अब तक की जांच में पता चला है कि दिल्ली एनसीआर के 100 से अधिक लोगों को आरोपित नकली इंजेक्शन बेच चुके थे। नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, हापुड़ व दिल्ली में आरोपितों ने करीब 500 लोगों को फोन कर इंजेक्शन बेचने के लिए संपर्क किया था। इसके अलावा इंटरनेट मीडिया का सहारा भी लिया था। जिस प्रिटिंग प्रेस पर इंजेक्शन का नकली लेबल प्रिंट किया गया था उसका डाटा पुलिस ने रिकवर कर लिया है।

कई सफेदपोश नेताओं ने पुलिस पर दबाव बनाकर आरोपितों को छुड़ाने का प्रयास किया, लेकिन उनकी एक न चली। वहीं फरार आरोपित कादिर की तलाश में पुलिस की टीमें दबिश दे रही है। सेक्टर 58 कोतवाली प्रभारी अनिल राजपूत ने बताया कि इंजेक्शन बेचने के बाद आरोपित कई बार रकम पेटीएम या फिर गूगल पे से भी लेते थे। इसकी जांच की जा रही है। फरार आरोपित कादिर गिरोह का सरगना है। उसी ने दीपांशु उर्फ धर्मवीर को काम सिखाया था। पिछले एक महीने में यह गिरोह तेजी से पांव पसार रहा था।

यह था मामला

निमोनिया में इस्तेमाल इंजेक्शन का लेबल लगाकर उसको रेमडेसिविर बताकर नकली इंजेक्शन पचास हजार में बेचने वाले गिरोह के सात आरोपितों को सेक्टर 58 कोतवाली पुलिस ने शनिवार दोपहर फोर्टिस अस्पताल के बाहर से धर दबोचा था। गिरोह में आरोपित हापुड़ निवासी मुसीर, अजरूद्दीन, बंटी व मेरठ निवासी सलमान, शाहरूख, अब्दुल व फर्रुखाबाद निवासी दीपांशु शामिल है। आरोपितों के कब्जे से नकली इंजेक्शन के अलावा कई अन्य सामान बरामद हुआ था।

मेरी कोई बहन नहीं तो भांजा कहां से आ गया

वहीं इस मामले में पुलिस ने बताया था कि सपा नेता व पूर्व कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर का भांजा मुसीर भी इस गिरोह में शामिल है। इसको लेकर पूर्व कैबिनेट मंत्री व सपा नेता शाहिद मंजूर का कहना है कि पुलिस जिसे मेरा भांजा बता रही है। वह मेरा भांजा नहीं है। जब मेरी कोई सगी बहन ही नहीं है, तो भांजा कहां से आ गया। पंचायत चुनाव में मिली हार से हताश लोग मुझे बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं।

पुलिस अधिकारी का बयान

सभी आरोपितों को रिमांड पर लेकर फिर से पूछताछ की जाएगी। अब तक की पूछताछ में कई अहम जानकारी हाथ लगी है। उन लोगों से संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है जिनको इंजेक्शन बेचे गए थे।

रजनीश वर्मा, एसीपी द्वितीय, नोएडा

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