नोएडा [रवि प्रकाश सिंह रैकवार]। दिल्ली-एनसीआर सहित कई अन्य जनपद में साइबर फ्राड करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए मंगलवार को सेक्टर-58 कोतवाली पुलिस ने एक महिला सहित आठ आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। बीमा पालिसी और इंश्योरेंस के नाम पर ठगी करने वाले आरोपितों को कोतवाली क्षेत्र के सेक्टर-62 से दबोचा गया। आरोपितों की पहचान गाजियाबाद निवासी अमरपाल, सुनील और नीतू, मेरठ निवासी नीरज और अजहर, बुलंदशहर निवासी शाहरूख और दिल्ली निवासी सोहन और विकास के रूप में हुई है। आरोपितों के कब्जे से 48 लाख रुपये नकद, 10 लाख के आभूषण, हार्ले डेविडसन बाइक, चार लग्जरी गाड़ियां, 95 फर्जी आधारकार्ड और पांच लैपटाप सहित अन्य सामान बरामद किए गए हैं। गिरोह में शामिल कई अन्य आरोपितों की तलाश में पुलिस की टीमें कई ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। एसीपी रजनीश वर्मा ने बताया कि आरोपित फर्जी नामों से पीड़ितों को फोन कर धोखाधड़ी करते थे।

सरगना ने किया है एमबीए

गिरोह का सरगना नीरज एमबीए पास है और वर्तमान में मुंबई में तीस लाख के सालाना पैकेज पर नौकरी कर रहा है। अमरपाल ने एमसीए किया है। अन्य आरोपित भी स्नातक और परास्नातक हैं और पिछले चार साल से लोगों से ठगी कर रहे हैं।

सीनियर सिटीजन होते हैं निशाने पर

एसीपी रजनीश वर्मा ने बताया कि गिरोह के बदमाशों के निशाने पर ऐसे बुजुर्ग होते थे जो अच्छे पदों पर रहने के बाद सेवानिवृत हो जाते हैं। सैकड़ों लोगों के साथ अब तक शातिरों ने ठगी की है।

ऐसे मिला सुराग

कोतवाली प्रभारी विनोद कुमार यादव ने बताया कि आठ महीने पहले कोतवाली क्षेत्र निवासी एक बुजुर्ग ने शिकायत की थी कि उनके साथ बीमा पालिसी और इंश्योरेंस के नाम पर करीब दो करोड़ की ठगी हुई है। एनटीपीसी से सेवानिवृत्त पीड़ित की शिकायत के बाद पुलिस ने इस गिरोह पर काम करना शुरू किया और कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए गिरोह तक पहुंच गई।

20 करोड़ से अधिक की कर चुके हैं ठगी

पूछताछ में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य अब तक सैकड़ों लोगों से 20 करोड़ से अधिक की ठगी कर चुके हैं। ठगी से हर सदस्य की हर महीने की कमाई 80 हजार से 3 लाख तक हो जाती है। इसके अलावा अलग-अलग शहरों में इनके एजेंट भी हैं। बरामद लैपटॉप और मोबाइल को जांच के लिए लैब में भेजा जाएगा। मोबाइल में कई अहम जानकारी मिली है।

अजहर बनता था शंभूनाथ

पूछताछ में सामने आया है कि ठगी के दौरान आरोपित अजहर शंभूनाथ बनकर लोगों को अपने जाल में फंसता था। नीतू पायल बनकर ठगी करती थी। अन्य आरोपित भी फर्जी नामों का इस्तेमाल ठगी के दौरान करते थे।

Edited By: Prateek Kumar