नोएडा, जागरण संवाददाता। देश-विदेश के नागरिकों से ठगी का अड्डा बने नोएडा से संचालित फर्जी कॉल सेंटर यहां आइटी कंपनियों की आड़ में पनप रहे हैं। पिछले दो वर्षो में दो दर्जन से अधिक फर्जी कॉल सेंटर का पुलिस पर्दाफाश कर चुकी है, लेकिन इसके बाद भी इनकी जड़ें कमजोर नहीं हो रही हैं।

अब गौतमबुद्धनगर में कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के बाद यहां संचालित फर्जी कॉल सेंटरों की जड़ें उखड़ने की उम्मीद जगी है। नोएडा-ग्रेटर नोएडा में सैकड़ों मल्टीनेशनल आइटी कंपनियों के अलावा हजारों की संख्या में आइटी कंपनियां संचालित हो रही हैं। यहां बड़े स्तर पर लोकल व इंटरनेशनल कॉल सेंटर भी संचालित होते हैं। उनकी आड़ में ही जालसाज फर्जी कॉल सेंटर संचालित करते हैं व ठगी करते हैं।

संगठित तरीके से संचालित इन फर्जी कॉल सेंटरों की पहचान करना पुलिस के लिए भी आसान नहीं होता है। जब ठगी के शिकार पीड़ित पुलिस से संपर्क करते हैं व पुलिस केस की जांच करती है तो फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश होता है। शहर में ऐसा कोई सिस्टम नहीं है, जिससे यह पता लग सके कि किस बिलिं्डग में किसी प्रकार की कंपनी संचालित हो रही है। जिसकी वजह से पुलिस को मॉनिटरिंग करने में भी दिक्कत होती है।

साइबर क्राइम थाना भी नकेल कसने में नाकाम साइबर अपराध पर नकेल कसने के लिए नोएडा साइबर अपराध अन्वेषण केंद्र का निर्माण हुआ था।

इसके अलावा लखनऊ व नोएडा में दो अत्याधुनिक साइबर थाने का करीब तीन वर्ष पहले निर्माण हुआ। दोनों साइबर थाने एसटीएफ की साइबर यूनिट द्वारा संचालित किया जाता है, लेकिन इन सब के बाद भी साइबर ठकों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। कुछ दिनों में ही इस प्रकार से ठगी करने वाले दो-तीन गैंग पकड़े गए हैं। फर्जी कॉल सेंटरों पर अंकुश लगाने के लिए औद्योगिक इकाइयों में भी किराये पर कंपनी संचालित करने वालों का सत्यापन कराया जाएगा। इससे काफी हद तक फर्जी कॉल सेंटरों पर अंकुश लगेगा। हर कंपनी की जांच करना मुश्किल है, लेकिन जो भी शिकायत मिलेगी कार्रवाई होगी। 

Posted By: Pooja Singh

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