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प्रदेश में आठ हजार जर्जर स्कूल भवनों का हुआ निर्माण : श्याम किशोर तिवारी

परिषदीय स्कूलों के कायाकल्प होने से छात्र संख्या में वृद्धि हुई है। जर्जर स्कूलों का पुर्न निर्माण तेजी से हो रहा है। प्रदेश में 13500 जर्जर स्कूल घोषित किए गए थे। अब तब आठ हजार से अधिक स्कूलों का पुर्न निर्माण हो चुका है। करीब साढ़े पांच हजार स्कूलों की इमारत का निर्माण हो रहा है। करीब 300 से अधिक स्कूलों का अपग्रेड किया जाएगा।

By Ankur Tripathi Edited By: Abhishek Tiwari Published: Mon, 20 May 2024 10:18 AM (IST)Updated: Mon, 20 May 2024 10:18 AM (IST)
प्रदेश में आठ हजार जर्जर स्कूल भवनों का हुआ निर्माण : श्याम किशोर तिवारी

जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। परिषदीय स्कूलों के कायाकल्प होने से छात्र संख्या में वृद्धि हुई है। जर्जर स्कूलों का पुर्न निर्माण तेजी से हो रहा है। प्रदेश में 13,500 जर्जर स्कूल घोषित किए गए थे। अब तब आठ हजार से अधिक स्कूलों का पुर्न निर्माण हो चुका है।

करीब साढ़े पांच हजार स्कूलों की इमारत का निर्माण हो रहा है।करीब 300 से अधिक स्कूलों का अपग्रेड किया जाएगा, जिसमें छात्रों को सभी सुविधाएं मिलेंगी। परिषदीय स्कूलों का बेहतर होते ढांचे और सुविधाओं को लेकर संवाददाता अंकुर त्रिपाठी ने प्रदेश के यूनिट इंचार्ज सिविल व एडी बेसिक लखनऊ श्याम किशोर तिवारी से बातचीत की। पेश है बातचीत के कुछ अंश...

प्रश्न - प्रदेश में हाईटेक परिषदीय स्कूलों की चर्चा हो रही है, लेकिन कई जिलों में जर्जर भवन में छात्र बैठने को मजबूर है, इसके लिए क्या कदम उठाए जा रहा हैं।

जर्जर भवन को चिन्हित करने के लिए प्रदेश स्तर पर जनवरी 2020 में अभियान शुरू किया गया था। इसके तहत बेसिक शिक्षा अधिकारी के नेतृत्व में एक समिति बनाई गई थी। समिति की ओर से जर्जर भवन का निरीक्षण कर सर्टिफिकेट जारी किए गए थे।

समिति ने प्रदेश में 13,500 हजार जर्जर घोषित किए थे। अब तब आठ हजार से अधिक स्कूलों की इमारत का निर्माण हो चुका है। करीब साढ़े पांच हजार स्कूलों को बनवाने का कार्य किया जा रहा है। जिन स्कूलों का समिति की ओर से जर्जर होने का सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया है। उनके बनवाने की प्रकिया की जा रही है। राज्य सरकार के बजट से कार्य करवाएं जा रहे हैं।

प्रश्र - कायाकल्प योजना पर विभाग का विशेष फोकस है। अब तक प्रदेश में कायाकल्प योजना के तहत कितने स्कूलों का स्वरूप बदल गया है?

प्रदेश में एक लाख 33 हजार स्कूल बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित होते है। कायाकल्प योजना के तहत 19 पैरामीटर पर स्कूलों में कार्य कराएं जाते है। गौतमबुद्ध नगर,कासगंज, वाराणसी,गाजियाबाद सहित कई जनपदों में 99 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में कायाकल्प के तहत कार्य हो चुके है।

कुछ जनपदों में समस्याएं आ रही है। वहां जिलाधिकारी और शिक्षा अधिकारी के साथ बैठक कर समस्याओं को दूर किया जा रहा है। प्रदेश में 31 मार्च 2025 तक सभी स्कूलों को कायाकल्प के तहत हाईटेक बना दिया जाएगा।

प्रश्न - कुछ जिलों को छोड़ दें तो अन्य जिलों में कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) के तहत कर नहीं हो पा रहे हैं ऐसा क्यों ?

कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर)के तहत शासन स्तर व जिले स्तर से लगातार प्रयास किया जा रहे हैं। ओएनजीसी की ओर से स्कूलों के निर्माण में सहयोग करने की बात हो चुकी है। हर जनपद में सीएसआर का काफी सहयोग मिल रहा है।

गौतमबुद्ध नगर में ही करीब 400 करोड़ रुपये के कार्य हुए हैं। प्रदेश का सबसे महंगा और हाईटेक स्कूल लुक्सर में करीब साढ़े नौ करोड़ की लागत से बना है। गाजियाबाद,कानपुर, लखनऊ सहित कई जनपदों में लगातार कार्य हो रहे हैं। एचसीएल, एसएमसी जैसी फर्म परिषदीय स्कूलों के निर्माण में सहयोग कर रही हैं।

प्रश्न - हाल ही में नोएडा के स्कूल का निर्माण एक सरिया से किया जा रहा था,जिसका लोगों ने विरोध किया था । एक सरिया से निर्माण छात्रों की जान के साथ खिलवाड़ नहीं है?

परिवर्तन प्रकृति का नियम है। परिषदीय स्कूलों में भी परिवर्तन लगातार हो रहा है। एक सरिया से स्कूलों का निर्माण अब नहीं होता है। पहले एसीआर बनते थे। तब एक सरिया का प्रयोग किया जाता था। अब डिजाइन में बदलाव किया गया है।

अब जो भी स्कूलों का निर्माण हो रहा है। वह सभी भूकंपरोधी हैं। विभाग की ओर से छात्रों के हितों के ध्यान में रखते हुए ही सारे निर्माण कार्य कराएं जा रहे हैं। पुराने ढर्रे को छोड़कर अब नई डिजाइन के साथ स्कूलों का निर्माण किया जा रहा है।

प्रश्न - इंफ्रास्ट्रक्चर बदलने से परिषदीय स्कूलों की गुणवत्ता पर कितना प्रभाव है।

स्कूलों का इंफ्रा बदलने से बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। छात्र संख्या में बढ़ोतरी हुई है। छात्रों को अच्छा माहौल मिल रहा है, स्कूल आने पर छात्र खुश रहते है। साफ स्वच्छ शौचालय,साफ सफाई, बिजली पानी की व्यवस्था होने से छात्र स्कूल में पूरे समय तक रहते है। निपुण स्कूल बनाने में इससे मदद मिल रही है। अच्छा माहौल होने से छात्रों का तेजी से विकास हो रहा है।

प्रश्न - पीएम श्री स्कूल में बेहतर से बेहतर सुविधा हो इसके लिए क्या अलग से कोई योजना है ?

पीएम श्री स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए लगातार कार्य किए जा रहे है। पीएम श्री स्कूल का चयन पोर्टल के माध्यम से भारत सरकार की ओर से किया गया है। स्कूलों ने आवेदन किया। उनका मूल्यांकन हुआ। जो पहले से बेहतर थे। उन्हें भारत सरकार की तरफ से चुना गया।

चयनित स्कूलों में फेस वाइज कार्य शुरू हो रहे हैं। जहां बाल वाटिका नहीं है। वहां उसका पहले निर्माण कराया जा रहा है। आइसीटी लैब, इंफ्रास्ट्रक्चर आदि का कार्य हो रहा है। पीएम श्री स्कूलों में निजी स्कूलों की तर्ज पर सभी सुविधाएं होंगी।

प्रश्र - प्रदेश के अधिकतर जिलों में शिक्षक कई बार स्कूल जर्जर होने की शिकायत देते हैं,लेकिन विभाग की ओर से कोई कदम नहीं उठा जाता है ऐसा क्यों ?

जर्जर स्कूलों का निर्माण कराने की प्रकिया में तेजी लाई गई है। शासन और जिला स्तर पर जैसे ही इसकी जानकारी मिलती है। तत्काल समिति से जांच कराई जाती है। जैसे ही समिति की ओर से ध्वस्तीकरण का सर्टिफिकेट दिया जाता है। वैसे ही निर्माण कराने की प्रकिया शुरू हो जाती है। राज्य और सर्व शिक्षा बजट से स्कूलों का निर्माण शुरू हो जाता है। अब अधिकतर स्कूलों में छात्र नए भवन में ही पढ़ाई कर रहे हैं।

प्रश्न- स्कूलों को और बेहतर बनाने के लिए विभाग की क्या योजना है?

स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए लगातार योजनाएं बनाई जा रही हैं। विभाग की ओर से जल्द करीब 300 से अधिक स्कूलों का अपग्रेड किया जाएगा, जिसमें छात्रों को सभी सुविधाएं मिलेंगी।

फर्नीचर की व्यवस्था पर अधिक जोर दिया जा रहा है। कोई भी छात्र जमीन पर बैठकर न पढ़े। स्कूलों के हाईटेक होने से छात्र संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। प्रदेश में परिषदीय स्कूलों अब पुराने जैसे नहीं रहे हैं।


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