नोएडा, जागरण संवाददाता। कोरोना संक्रमण मुक्त हुई एक मां की ममता कोरोना वायरस पर भारी पड़ी। मां डॉक्टर से मिले हौसले से न सिर्फ 14 दिन में ही कोरोना को मात घर लौट आई है, बल्कि अपनी महज 23 दिन की नवजात बच्ची पर भी कोरोना की आंच नहीं आने दी। इलाज के दौरान कोरोना संक्रमण पर बेटी के साथ मां की जुगलबंदी भारी पड़ी है।

सेक्टर-8 निवासी 20 वर्षीय कंचन 24 अप्रैल को प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल पहुंची थी। डॉक्टरों ने प्रसव से पूर्व उसकी कोरोना जांच कराई। इस बीच 25 अप्रैल की देर रात कंचन ने बच्ची को जन्म दिया। बच्ची का नाम ईशा रखा। सुबह होने पर मां-बेटी को डिस्चार्ज कर दिया गया। लेकिन, तीन मई को कंचन की कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई, तो उसके पैरों तले की जमीन ही मानो खिसक गई।

रिपोर्ट नेगेटिव आने पर सेक्टर-8 निवासी महिला हुई डिस्चार्ज

डॉक्टरों ने हौसला देकर कंचन को ग्रेटर नोएडा के शारदा अस्पताल में भर्ती कराया, जबकि उसके पति और देवर को भी क्वारंटाइन कर दिया गया। इधर, महज आठ दिन की बच्ची की घर पर कोई देखभाल करने वाला नहीं था। ऐसे में बच्ची को भी अस्पताल में भर्ती कर लिया गया। यहां उसे निकु वार्ड में रखा गया। सुबह-शाम बेटी को स्तनपान के लिए मां के पास ले जाया जाता रहा।

घर पहुंचने पर किया डॉक्टरों का शुक्रिया अदा 

मां केवल स्तनपान कराकर ही संतुष्ट होती रही, कोरोना के भय से बेटी को चूमने तक का सौभाग्य उसे नसीब नहीं हुआ। करीब 14 दिनों तक यही क्रम चलता रहा। 15 मई को मां के साथ ही बेटी की रिपोर्ट नेगेटिव आने पर दोनों को डिस्चार्ज कर दिया गया। घर पहुंचने पर कंचन एवं उसके परिवार ने डॉक्टरों का शुक्रिया अदा किया है।

कोविड-19 शारदा अस्पताल के नोडल अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने बताया कि इलाज के दौरान महिला बच्ची से मिलने की जिद करती थी, लेकिन संक्रमण से बचाव के लिए सिर्फ स्तनपान कराने की इजाजत दी गई थी। रिपोर्ट नेगेटिव आने पर मां-बेटी को डिस्चार्ज कर दिया गया है।

नोएडा में 255 पहुंचा मरीजों का आंकड़ा

जिले में कोरोना वायरस का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, ऐसे में आम लोगों के साथ ही डॉक्टर भी वायरस से प्रभावित हो रहे हैं। रविवार को क्वारंटाइन वार्ड में संदिग्धों की निगरानी कर रहे डॉक्टर व एक स्वास्थ्यकर्मी समेत आठ लोगों में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई। इसी के साथ जिले में कोरोना मरीजों का आंकड़ा 255 पर पहुंच गया है। उधर, 191 मरीज ठीक होने के बाद घर लौट चुके हैं और 59 मरीजों का आइसोलेशन वार्ड में उपचार चल रहा है। इसके अलावा 5 मरीजों की मौत हो चुकी है।

Posted By: Mangal Yadav

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