ग्रेटर नोएडा [मनीष तिवारी]।  दिल्ली से सटे गौतमबुद्धनगर जिले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आकस्मिक दौरे को लेकर अधिकारियों को लखनऊ से सूचना मिल गई है। बताया गया है कि पांच से सात घंटे पहले सूचना मिलेगी कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गौतमबुद्धनगर जिले में आ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री एक ही दिन गौतमबुद्धनगर व गाजियाबाद का दौरा करेंगे। जिले में इसे देखते हुए पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग व प्राधिकरण पूरी तरह से तैयारी में जुट गया है। अधिकारियों की टीम का फोकस गांवों में अधिक है। जेवर क्षेत्र में मुख्यमंत्री के आने की चर्चा जोरों पर है।

इन जगहों पर जाने की उम्मीद

  • गिझौंड़ सेक्टर 53
  • सुल्तान पुर, सेक्टर-128
  • छपरौली बांगर सेक्टर-168
  • दातावली ब्लॉक दादरी 

कहीं न कहीं इसी के मद्देनजर शुक्रवार को पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह ने जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह के साथ जेवर क्षेत्र के कई गांव में ग्रामीणों के साथ कोरोना संक्रमण की स्थिति पर वार्ता की और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैयार हो रहे कोविड अस्पताल का निरीक्षण भी किया। एक दिन पूर्व मंडल कमिश्नर सुरेंद्र सिंह ने भी जेवर का दौरा किया था।

प्रदेश में चल रहे मुख्यमंत्री के आकस्मिक दौरे के बाद कार्यालय छोड़कर अधिकारियों ने गांवों का रुख करना शुरू कर दिया है। पूरा फोकस जिले में कोरोना संक्रमण से बदहाल हुई स्थिति को संभालने पर है। सबसे अधिक दिक्कत ऑक्सीजन व बेड की कमी के कारण अस्पताल में संक्रमितों के भर्ती होने की थी। इस कारण कई लोगों की मौत हो गई थी। इसे देखते हुए प्रशासन ने जिले में सात स्थानों पर ऑक्सीजन सिलेंडर भरने की व्यवस्था शुरू करा दी है। सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर दिए जा रहे हैं। 

जिले में कोरोना ने विकराल रूप धारण कर लिया है। 2020 के मुकाबले 2021 के सिर्फ अप्रैल व मई में तीन गुना संक्रमितों की मौत हो चुकी है, वहीं 17,323 नए मामले सामने आ चुके हैं। संसाधनों के अभाव में मृत्युदर में लगातार इजाफा हो रहा है। उधर, मौत के आंकड़ों पर अंकुश कसने में स्वास्थ्य विभाग नाकाम है। राज्य सर्विलांस कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार एक मई से अबतक जिले में 160 संक्रमितों की मौत हो चुकी है। इतनी मौतें तो 2020 में भी नहीं हुई थी। अफसरों की समीक्षा में सामने आया है कि जिले में हर दिन औसतन 10 मौतें हो रही है। मौत का सबसे बड़ा कारण फेफड़ों में गंभीर संक्रमण है। 80 फीसद संक्रमित धमनियों में खून के थक्के जमने से मौत के मुंह में जा रहे हैं। 20 फीसद के फेफड़ों में फाइब्राइड बनने और आक्सीजन न मिल पाने के कारण मल्टी आर्गन व श्वांस तंत्र का फेल होना सामने आ रहा है।

गैर सरकारी आंकड़ों से स्थिति होती साफ

जिले में मौत का आंकड़ा कितना भयावह है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। स्वास्थ्य विभाग को एक हजार से अधिक होम आइसोलेट संक्रमितों की जानकारी नहीं है। वहीं दूरदराज गांवों में दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। कई लोग बाहरी राज्यों या जिलों से जांच कराकर होम आइसोलेट हो गए हैं। यदि यह रिकार्ड भी विभाग के पास होता तो स्थिति और भी अधिक भयावह होती।