अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर जितेंद्र मान मर्डर केस में कोर्ट का बड़ा फैसला, दो दोषियों को आजीवन कारावास
अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर जितेंद्र मान हत्याकांड में ग्रेटर नोएडा की अदालत ने इमरान और नफीस को दोषी करार देते हुए आजीवन ...और पढ़ें

इमरान और नफीस को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
HighLights
अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर जितेंद्र मान हत्याकांड में दो दोषी करार।
इमरान और नफीस को आजीवन कारावास की सजा।
प्रेम प्रसंग के चलते हुई थी जितेंद्र मान की हत्या।
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अतुल श्रीवास्तव की अदालत ने एवीजे हाइट्स सोसायटी में वर्ष 2018 में हुए अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर एवं जिम ट्रेनर जितेंद्र मान हत्याकांड में दोनों आरोपितों को दोषी करार दिया है। अदालत ने अपने फैसले में बुलंदशहर निवासी दोषी इमरान और नफीस को आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
जुर्माना न देने पर दोनों को एक-एक साल का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। यह मामला मृत्युदंड के लिए निर्धारित दुर्लभतम से दुर्लभतम श्रेणी में नहीं आता, इसलिए आजीवन कारावास उचित है। जुर्माने की राशि वसूल होने पर मृतक के कानूनी वारिसों को मुआवजे के रूप में दी जाएगी।
डीजीसी अपराध ब्रह्मजीत भाटी के मुताबिक, 12 जनवरी 2018 को शिकायतकर्ता देवेंद्र मान को सूचना मिली थी कि उनका भाई जितेंद्र मान ग्रेटर नोएडा वेस्ट की एवीजे हाइट्स सोसायटी के फ्लैट नंबर एच-606 में मृत पड़ा मिला है। स्वजन मौके पर पहुंचे तो शव कमरे में गद्दे पर कंबल से ढका था और सिर से खून निकल रहा था। सूरजपुर कोतवाली पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था।
विवेचना में सोसायटी के सीसीटीवी फुटेज में एक महिला को घटना वाले दिन फ्लैट में आते और शाम को बाहर जाते देखा गया। जिसकी पहचान सृष्टि गुप्ता के रूप में हुई।
जितेंद्र मान जूनियर टीम के नेशनल चैंपियन रह चुके
अभियोजन के अनुसार सृष्टि और इमरान के बीच संबंध थे, जबकि जितेंद्र और सृष्टि के संबंधों से इमरान नाराज था। इसी रंजिश में हत्या की साजिश रची गई। बता दें कि मृतक जितेंद्र मान जूनियर टीम के नेशनल चैंपियन रह चुके थे। बदमाशों ने उन्हें चार गोलियां मारकर हत्या की थी और वारदात के बाद फ्लैट का दरवाजा बंद कर उनका मोबाइल साथ ले गए थे।
तैयारी के साथ की गई थी हत्या
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि हत्या अचानक नहीं, बल्कि साजिश रच कर गई थी। अभियोजन के अनुसार इमरान ने साजिश रची, जबकि नफीस ने हत्या के बाद मोबाइल की लोकेशन बदलने के लिए फोन को लोनी, गाजियाबाद ले जाकर साक्ष्य मिटाने की कोशिश की और सृष्टि को सुरक्षित निकलने में मदद की। दोनों ने खुद गोली नहीं चलाई थी, लेकिन अदालत ने कहा कि इससे उनकी आपराधिक जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। अभियोजन ने मामले में 18 गवाह पेश किए।
सृष्टि गुप्ता की सुनवाई अलग
इस मामले में तीसरी आरोपित सृष्टि गुप्ता की सुनवाई अलग कर दी गई है। सृष्टि ने धारा 311 सीआरपीसी के तहत आवेदन दिया था, जिसे सत्र न्यायालय ने खारिज कर दिया। इसके बाद उसने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने 15 अक्टूबर 2025 को उसके खिलाफ निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी है।
