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500 करोड़ रुपये मंजूर, देश के होटल मैनेजमेंट संस्थानों की बदलेगी तस्वीर; मास्टर प्लान तैयार

Published: Thu, 10 Sep 2026 12:57 PM (GMT+05:30)

केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने देशभर के होटल मैनेजमेंट संस्थानों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए 500 करोड़ रुपये ...और पढ़ें

पर्यटन मंत्रालय के सचिव (पर्यटन) भुवनेश कुमार। जागरण

पर्यटन मंत्रालय के सचिव (पर्यटन) भुवनेश कुमार। जागरण

HighLights

  1. पर्यटन मंत्रालय ने होटल मैनेजमेंट संस्थानों को 500 करोड़ रुपये दिए।

  2. 21 संस्थानों का होगा आधुनिकीकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रेनिंग सुधरेगी।

  3. शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर प्रशिक्षित किया जाएगा, छात्रों को लाभ।

चेतना राठौर, नोएडा। केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने देशभर के होटल मैनेजमेंट संस्थानों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए 500 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। हाल के समय में होटल मैनेजमेंट कॉलेजों में छात्रों की घटती रुचि और खाली सीटों की समस्या चिंता का विषय बन गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट प्रायोगिक ट्रेनिंग का नया मॉडल और इंफ्रास्ट्रक्चर, हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में युवाओं का रुझान बढ़ाने में सहायक होगा।

शिविर का आयोजन किया

सेक्टर-62 स्थित राष्ट्रीय होटल प्रबंधन और खानपान प्रौद्योगिकी परिषद में हाल ही में एक चिंतन शिविर का आयोजन किया गया। इस बैठक में देश के 21 संस्थानों के प्राचार्यों के साथ पर्यटन मंत्रालय के सचिव (पर्यटन) भुवनेश कुमार ने भाग लिया।

500 करोड़ के बजट की घोषणा

बैठक में संस्थागत मजबूती, रणनीतिक स्थिति को नए सिरे से तय करने, नवाचार, क्षमता निर्माण और भारत के तेजी से बढ़ते पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए 500 करोड़ रुपये के बजट की घोषणा की गई।

इस योजना के तहत देश के 21 प्रतिष्ठित इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट के साथ नोएडा और तिरुपति के इंडियन कलीनरी इंस्टीट्यूट को भी पूरी तरह अपग्रेड किया जाएगा। अपग्रेड होने वाले संस्थानों में पूसा (दिल्ली), ग्वालियर, गुवाहाटी, शिमला, बेंगलुरु, हैदराबाद, भोपाल, भुवनेश्वर, गांधीनगर और चंडीगढ़ जैसे प्रमुख केंद्र शामिल हैं।

इन संस्थानों में वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर के तहत लैब्स, क्लासरूम्स और ट्रेनिंग किचन को आधुनिक तकनीक और उपकरणों से अपडेट किया जाएगा।

शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित न रहे। छात्रों को बाजार की नई जरूरतों और स्थानीय पर्यटन स्थलों की मांग के अनुसार तैयार किया जाएगा।

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