घरेलू नौकर से 'निठारी का कसाई' तक: कैसे पड़ा सुरेंद्र कोली का यह खौफनाक नाम?
निठारी का खौफनाक सच: नाले में मिले कंकाल, कबूलनामे और अदालत से बरी होने तक की पूरी कहानी...

यह तस्वीर एआई से एडिट किया गया है। (फोटो सोर्स - जागरण आर्काइव)
HighLights
हरिद्वार में कोली की आत्महत्या से निठारी कांड चर्चा में आ गया।
सुरेंद्र कोली को दोषी ठहराया गया, फिर अदालती लड़ाई के बाद बरी।
डिजिटल डेस्क, नोएडा। नोएडा में गरीब मजदूर परिवारों के बच्चे एक-एक कर गायब हो रहे थे। कोई बच्चा बाजार गया तो फिर घर नहीं लौटा। कोई खेलते-खेलते अचानक लापता हो गया तो किसी का इंतजार करते-करते मां की आंखें पथरा गई थीं। उम्मीद थी कि जल्द कलेजे का टुकड़ा घर लौट आएगा। शायद बेटी किसी रिश्तेदार के यहां चली गई होगी; आ जाएगी।
लेकिन 29 दिसंबर, 2006 की सर्द सुबह नोएडा के सेक्टर-31 स्थित डी-5 (निठारी गांव) बंगले के पीछे एक नाले से 15 बच्चों के कंकाल मिले तो कुछ घरों में हफ्तों से पसरा सन्नाटा बेचैनी में बदल गया। कुछ उम्मीदें टूट गईं तो कुछ को न भरने वाले जख्म मिले।
इसके बाद जो कुछ पता चला, वह बेहद भयावह था। नोएडा का निठारी गांव देश की सुर्खियां बन गया। सालों तक कानूनी लड़ाई चली, कबूलनामे हुए, सजा मिली और फिर बरी होने का सिलसिला चला, लेकिन बच्चों को किसने गायब किया; इस सवाल का जवाब अभी तक नहीं मिला।

30 दिसंबर 2006 को दैनिक जागरण ने निठारी कांड पर प्रथम पृष्ठ पर विस्तृत कवरेज प्रकाशित की थी। (जागरण आर्काइव)
निठारी नरसंहार कांड के मुख्य आरोपी रहे सुरेंद्र कोली का शव हरिद्वार में फांसी पर लटका मिला, जिसके बाद यह नरसंहार एक बार फिर चर्चा में आ गया। बच्चों के गायब होने से लेकर खुलासों और फिर कानूनी लड़ाई से बरी होने तक की पूरी कहानी यहां पढ़ें...
2006 की सर्दियां थीं। गरीब मजदूरों के बच्चे गायब हो रहे थे। कुछ परिवारों ने पुलिस का दरवाजा भी खटखटाया। शिकायतें दर्ज हुईं। सवाल पूछे गए, लेकिन शुरुआती दौर में उन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। फिर एक युवती के गायब होने की कहानी ने पूरी जांच की दिशा बदल दी।
युवती का नाम था - पायल। उसके परिजनों ने हंगामा काटा तो पुलिस ने जांच शुरू की। पुलिस ने पायल का मोबाइल ट्रेस किया तो जांच रिक्शा चालक तक पहुंची। पूछताछ में रिक्शा चालक ने बताया कि मोबाइल नोएडा के सेक्टर-31 स्थित डी -5 (निठारी गांव) बंगले रहने वाले एक शख्स ने दिया था। यह वही बंगला था, जहां कारोबारी मोनिंदर सिंह पंधेर रहता था और यहीं पर सुरेंद्र कोली काम किया करता था।

30 दिसंबर 2006 को दैनिक जागरण ने नोएडा के सेक्टर-31 स्थित डी-5 (निठारी गांव) बंगले के पीछे एक नाले से 15 बच्चों के कंकाल मिलने का फोटो प्रकाशित किया था। (जागरण आर्काइव)
जांच आगे बढ़ी तो पंधेर के बंगले के पीछे नाले के पास से प्लास्टिक की बोरियों में 15 खोपड़ियां, हड्डियां और कपड़े मिले। मोनिंदर सिंह पंधेर और सुरेंद्र कोली को अरेस्ट किया गया। जनवरी, 2007 में मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। नोएडा पुलिस ने 19 अलग-अलग गुमशुदगी/अपराध से जुड़ीं एफआईआर दर्ज किए थे, जिनमें से सीबीआई ने 16 मामलों में चार्जशीट दायर की थी। इन मामलों में सुरेंद्र कोली पर हत्या, दुष्कर्म, अपहरण और सबूत मिटाने के आरोप लगे।
पहले आरोपी... फिर दोषी और 2025 में बरी
निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली को उसके कबूलनामे और उसकी निशानदेही पर हुई बरामदगी के आधार पर दोषी ठहराया गया था। निठारी से जुड़े 13 मामलों में उसे मौत की सजा सुनाई गई। हालांकि, बाद में इन्हीं कबूलनामों और बरामदगी की विश्वसनीयता पर अदालत में गंभीर सवाल उठे।

2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 मामलों में कोली को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि करीब 60 दिन की पुलिस हिरासत के बाद दर्ज किया गया कबूलनामा भरोसेमंद नहीं माना जा सकता। जांच और बरामदगी की प्रक्रिया पर भी सवाल उठे।
30 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने 12 मामलों में बरी होने के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद निठारी से जुड़ा सिर्फ एक मामला बाकी रह गया था। 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उसमें भी कोली बरी कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ कोली करीब 19 साल जेल में रहने के बाद बाहर आया।

कब-कब क्या हुआ?
- 29 दिसंबर 2006: निठारी गांव में मोनिंदर सिंह पंधेर की कोठी के पीछे नाले से 19 बच्चों और महिलाओं के कंकाल मिले। मालिक मनिंदर सिंह पंधेर और उसका नौकर सुरेंद्र कोली गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने जांच शुरू की
- 11 जनवरी 2007: मामले की जांच सीबीआइ को सौंपी गई। सीबीआई का पहला दल निठारी पहुंचा। कोठी के पास से 30 और हड्डियां बरामद कीं।
- 22 मई 2007 : सीबीआई ने गाजियाबाद की अदालत में मामले में पहला आरोप पत्र दाखिल किया। मोनिंदर सिंह पंधेर पर हल्के आरोप लगाए गए। कोली पर दुष्कर्म, अपहरण और हत्या के आरोप लगाए गए।
- 13 फरवरी 2009: निठारी में सिलसिलेवार 19 हत्याओं में से एक 14 वर्षीय रिम्पा हालदार के साथ रेप और उसकी हत्या के लिए विशेष अदालत ने पंधेर तथा कोली को मौत की सजा सुनाई।
- 11 सितंबर 2009 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंधेर को सुनाई गई मौत की सजा से से बरी किया।
- 20 जुलाई 2014: सुरेंद्र कोली की दया याचिका राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने खारिज कर दी।
- 08 सितंबर 2014 : कोर्ट ने रात एक बजे कोली की फांसी पर रोक लगा दी, कोली की सजा उसी दिन होनी थी।
- 24 जुलाई 2017: कोली और पंधेर को 20 वर्ष पिंकी सरकार की हत्या और बलात्कार के प्रयास में सीबीआइ अदालत ने दोषी ठहराया। दोनों के खिलाफ हत्या के 16 मामलों में से यह आठवां मामला है, इसमें फैसला सुनाया गया है।
- 13 फरवरी 2019: सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर को फांसी की सजा। हाई कोर्ट से पंधेर बरी।
- 02 मार्च 2019: सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा पंधेर बरी
- 06 अप्रैल 2019: सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा, पंधेर बरी
- 15 जनवरी 2021: सुरेंद्र कोली को फांसी, पंधेर बरी
- 26 मार्च 2021: सुरेंद्र कोली बरी
- 19 मार्च 2022: कोली को फांसी व पंधेर को सात वर्ष की कैद
- 16 अक्टूबर 2023: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सबूतों की कमी का हवाला देते हुए मोनिंदर सिंह पंधेर और सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया।
- 11 नवंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली की याचिका मंजूर करते हुए उसे आखिरी लंबित मामले में भी बरी कर दिया, जिसके बाद वह जेल से रिहा हो गया।
- 18 सितंबर 2026: निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
यह भी पढ़ें- 2006 का नरकंकाल कांड और 2026 में फांसी का फंदा.. सुरेंद्र कोली के सुसाइड से कैसे दफन हो गए निठारी के खौफनाक राज?
