जागरण संवाददाता, नोएडा :

दादरी में 22 सितंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन से पहले सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा से गुर्जर हटाए जाने से नाराज चल रहे गुर्जरों को मनाने में भाजपा ने अब पूरी ताकत झोंक दी है। दिवाली के बाद भाजपा मेरठ में गुर्जर प्रतिनिधि सामाजिक सम्मेलन करेगी। इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश महामंत्री (संगठन) सुनील बंसल, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह व उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य में से किन्हीं दो के आने की बात कही जा रही है। प्रदेश के परिवहन मंत्री अशोक कटारिया व राज्यसभा सदस्य सुरेंद्र नागर को सम्मेलन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह सम्मेलन पहले 29 अक्टूबर को कराए जाने की तैयारी थी, लेकिन उस दिन देश के गृहमंत्री अमित शाह लखनऊ आ रहे हैं, इसलिए सम्मेलन की तिथि आगे बढ़ा दी गई है। सूत्रों की मानें तो यह सम्मेलन अब सात नवंबर को प्रस्तावित किया गया है। इसमें गौतमबुद्ध नगर के गुर्जरों को भी ले जाने की तैयारी की जा रही है।

गुर्जरों ने महापंचायत स्थगित करने से किया इंकार

वहीं प्रदेश की भाजपा सरकार से नाराज गुर्जर 31 अक्टूबर को दादरी में स्वाभिमान बचाओ महापंचायत करने पर अड़ गए हैं। राष्ट्रीय गुर्जर समन्वय समिति व स्वाभिमान बचाओ समिति के अध्यक्ष अंतराम तंवर ने कहा कि सम्राट मिहिर भोज गुर्जर थे। इतिहास में इसकी स्पष्ट उल्लेख है। देश के कई राज्यों के मुख्यमंत्री गुर्जर सम्राट मिहिर भोज के नाम से अपने प्रदेश में प्रतिमा लगवा चुके हैं। दादरी में भी 22 सितंबर को प्रतिमा लगाई गई। इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आए, लेकिन अनावरण से पहले प्रतिमा से गुर्जर शब्द हटा दिया गया। इससे समुचा गुर्जर समाज आहत है। अखिल भारतीय गुर्जर परिषद के अध्यक्ष रविद्र भाटी ने आरोप लगाया कि गुर्जरों का यह अपमान प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इशारे पर हुआ है। इस अपमान का खामियाजा भाजपा को भुगताना होगा। स्वाभिमान बचाओ समिति के कार्यकारी अध्यक्ष रणवीर चंदीला ने कहा कि सरदार बल्लभ भाई पटेल के जन्मदिवस पर दादरी में गुर्जरों की महापंचायत होगी। पथिक सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष व भाजपा नेता मुखिया गुर्जर ने कहा कि गुर्जरों के अपमान बर्दास्त नहीं किया जाएगा। गुर्जर समाज मेरठ में भाजपा के सम्मेलन का विरोध करेगा। सपा नेता राजकुमार भाटी ने कहा कि मुख्यमंत्री के कहने पर गुर्जर शब्द हटाया गया। उन्हें माफी मांगनी होगी।

गुर्जरों की नाराजगी से भाजपा चितित

दरअसल गौतमबुद्ध नगर के दादरी को गुर्जरों की राजधानी कहा जाता है। यहां से समूचे देश में संदेश जाता है। दादरी में 22 सितंबर की घटना के बाद गुर्जरों में भाजपा के प्रति इस कदर नाराजगी बढ़ गई है कि इसका असर उत्तर प्रदेश के साथ दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड व मध्यप्रदेश में भी पड़ने लगा है। इससे भाजपा चितित है, इसलिए वह जल्द से जल्द गुर्जरों की नाराजगी दूर करने में जुट गई है। सूत्रों के अनुसार कुछ दिन पहले प्रदेश के संगठन प्रभारी सुनील बंसल ने गुर्जर नेताओं के साथ बैठक कर पूछा था कि दादरी प्रकरण की भरपाई कैसे हो सकती है। माना जा रहा है कि मेरठ सम्मेलन में गुर्जरों के लिए कुछ बड़ी घोषणा हो सकती है।

विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है असर

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट अधिक हैं अथवा गुर्जर, इसको लेकर भी तर्क दिए जा रहे हैं। गुर्जरों का दावा है कि प्रदेश में जाट 1.8 फीसद है, जबकि गुर्जर 1.78 फीसद हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ दिल्ली-एनसीआर में भी इनकी बड़ी आबादी है। गुर्जरों को मलाल है कि जनसंख्या के अनुपात में योगी सरकार और जिला पंचायत चुनाव में प्रतिनिधित्व नहीं मिला। भाजपा नेता मुखिया गुर्जर का कहना है कि इसको लेकर भी गुर्जरों में नाराजगी है। वहीं किसान आंदोलन की वजह से जाटों में भी नाराजगी है। दोनों की नाराजगी चुनाव पर असर डाल सकती है। प्रतिमा पर पांच दिन बाद लिखा गया था गुर्जर

दादरी में 22 सितंबर को सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा से गुर्जर शब्द हटाया गया था। इसका कड़ा विरोध हुआ तो पांच दिन बाद भाजपा के राज्यसभा सदस्य सुरेंद्र नागर ने प्रतिमा पर गुर्जर शब्द लिखवा दिया। सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री की सहमति के बाद ही गुर्जर शब्द लिखा गया।

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