130 करोड़ में भी सूखा पड़ा ओलिंपिक पूल, ग्रेटर नोएडा में ऑल-वेदर पूल पर ताला; हर महीने 8 करोड़ दे रहे खिलाड़ी
ग्रेटर नोएडा में 2015 में 130 करोड़ रुपये की लागत से बने ओलंपिक आकार के दो स्विमिंग पूल आज भी ...और पढ़ें

शहीद विजय सिंह पथिक स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में बना स्वीमिंग पूल। आर्काइव
HighLights
130 करोड़ का ओलंपिक पूल 2015 से अनुपयोगी
2022 खेलो इंडिया के बाद फिर बंद हुआ पूल
20 हजार तैराक निजी पूलों में दे रहे 8 करोड़
आशीष चौरसिया, ग्रेटर नोएडा। जिले में तैराकी को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2015 में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा 130 करोड़ रुपये की लागत से शहीद विजय सिंह पथिक कॉम्प्लेक्स में बनाए गए ओलिंपिक आकार के दो स्विमिंग पूल आज भी सूखे पड़े हैं।
शहर का पहला आल वेदर स्विमिंग पूल है, जिसका अब तक सिर्फ एक बार ही उपयोग हो सका है। मजबूरी में जिले के खिलाड़ी प्राइवेट स्विमिंग पूल में प्रशिक्षण लेने को मजबूर हैं। स्टेडियम परिसर में इंडोर पूल का निर्माण अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत हुआ है।
सर्दी-गर्मी हर मौसम में अभ्यास की सुविधा देने को इनमें वाटर हीटिंग, फिल्टरेशन और लाइटिंग की आधुनिक व्यवस्था भी है। प्राधिकरण की अनदेखी के कारण आज तक अभ्यास सत्र शुरू नहीं हो पाया।
रखरखाव और संचालन के लिए एजेंसी न मिलने से पानी की एक बूंद भी पूल तक नहीं पहुंची। टाइल्स पर धूल जमी है और मशीनें जंग खा रही हैं।
हालांकि 2022 में खेलो इंडिया गेम्स के लिए कुछ दिनों के लिए इसे खोला गया था, लेकिन इसके बाद फिर से इस पर ताला लग गया। सरकारी सुविधा न होने के कारण खिलाड़ियों को मजबूरी में महंगे क्लबों और अकादमी का सहारा लेना पड़ रहा है।
हर महीने खिलाड़ी दे रहे 8 करोड़ फीस
जिले की दिशा भंडारी, आलिया सिंह अंश अरुणा, वेदांत चंद्रा ने तैराकी में राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते हैं। इसके अलावा प्रदेश स्तर पर 150 बच्चे अव्वल रहे हैं। हर साल 10 से 15 खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर जिले का नेतृत्व करते हैं।
सरकारी स्तर के स्वीमिंग पूल न होने से जिले में बिना पंजीकरण संचालित हो रहे करीब 850 स्वीमिंग पूल में लगभग 20 हजार से अधिक तैराक प्रशिक्षण लेने को मजबूर हैं। यह प्रति महीने लगभग आठ करोड़ रुपये मोटी रकम फीस के तौर पर दे रहे हैं।
निजी स्विमिंग पूल में मानकों की अनदेखी
- अप्रशिक्षिति कोच से प्रशिक्षण
- बिना महिला कोच के लड़कियों को प्रशिक्षण
- सेफ्टी गार्ड नहीं
- लाइफ जैकेट नहीं
- समय से पानी की सफाई नहीं
जिले में तैराकी के राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की दर्जनों प्रतिभाएं हैं, जिन्हें अभ्यास के लिए अन्य प्रदेशों व जिलों में या निजी सेंटर का सहारा लेना पड़ा रहा है। कई वर्षों से सरकारी स्तर पर पूल की मांग की जा रही। प्रशासन यदि प्रयास करे तो प्राधिकरण का स्वीमिंग पूल जल्द शुरू करा सकता है। इसके लिए हम कोच भी दे सकते हैं।
-सुरेश देशवाल, सचिव, जिला तैराकी एसोसिएशन
स्विमिंग पूल तरह तैयार है। संचालन और रखरखाव के लिए एजेंसी चयन की प्रक्रिया चल रही है। तकनीकी दिक्कतों के कारण पहले के टेंडर निरस्त करने पड़े थे। जल्द ही संचालन एजेंसी का चयन कर इसे शुरू करा दिया जाएगा।
- हरेकृष्णा, मैनेजर, शहीद विजय सिंह पथिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स
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