महीने में 18 करोड़ का खेल, ग्रेटर नोएडा से चल रहा अवैध बसों का 'सिंडिकेट', हादसों के बाद सो रहा प्रशासन
ग्रेटर नोएडा में रोजाना हजारों यात्री असुरक्षित बसों में सफर करते हैं, जिससे बस संचालक सालाना करोड़ों रुपये कमा रहे हैं, जबकि अधिकारी अनदेखी कर रहे हैं।

परिवहन विभाग पर खड़े हो रहे सवाल (AI-Generated Image)
HighLights
दो हफ्ते में दूसरी बस आग, फिर भी अनदेखी जारी
परी चौक अवैध बस अड्डे से 18 करोड़ मासिक कमाई
क्षमता से अधिक यात्री, परिवहन विभाग की ढिलाई
आशीष चौरसिया, ग्रेटर नोएडा। दो सप्ताह के अंदर ग्रेटर नोएडा में दूसरी बस में आग लगने की घटना हो गई है। सितंबर में यमुना एक्सप्रेसवे में लगी आग में नौ लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, मंगलवार को लगी आग में जनहानि तो नहीं हुई, लेकिन यात्रियों का लाखों रुपये का सामना जलकर राख हो गया।
इसके बाद जिम्मेदारों की नजर शहर के मुख्य द्वार कहे जाने वाले परी चौक पर अवैध रूप से संचालित हो रहे बस अड्डे पर नहीं जा रही है। यहां से रोजाना 70 से 80 बसें उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश समेत कई अन्य राज्यों के लिए फर्राटा भरती हैं।
यात्रियों से वसूले जाते हैं करोड़ों रुपये
इन बसों में लगभग चार हजार यात्री रोजाना सफर करते हैं। इनसे 500 रुपये से लेकर दो हजार रुपये तक किराया वसूला जाता है। यानी हर महीने संचालक यहां से करीब 18 करोड़ रुपये की कमाई कर रहे हैं। बता दें कि परी चौक से राज कल्पना ट्रैवल्स, कल्पना ट्रैवल्स, प्रिया ट्रेवल्स के अलावा कई कंपनियों की बसें संचालित होती हैं।
इसके अलावा, परी चौक से चलने वाली बसें लखनऊ, कानपुर, कानपुर देहात, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, आजमगढ़, आगरा, इलाहाबाद, आजमगढ़, बलिया, झांसी, ग्वालियर, बांदा, महोबा, हमीरपुर, मदौहा के अलावा उरई, राठ, चरखारी, बेलाताल समेत प्रदेश के कई शहरों तक जाती हैं।
इन रूट पर भी चल रही हैं बसें
वहीं, पटना, मुजफ्फरपुर, हरिद्वार, देहरादून आदि रूट पर भी बसों के संचालित हो रही हैं। इनका किराया 500 रुपये से लेकर दो हजार रुपये तक वसूला जा रहा है। इसके बाद भी यात्रियों की जान से खिलवाड़ करते हुए क्षमता से अधिक यात्री बैठाए जाते हैं। प्रतिदिन करीब चार हजार यात्रियों के सफर करने के आधार पर लगभग रोजाना करीब 60 लाख रुपये का कमाई होती है।इसके आधार पर 30 दिन में करीब 18 करोड़ रुपये की कमाई कर रहे हैं।
मंडल और राज्य की सीमाएं पार, कार्रवाई का इंतजार
परी चौक से निकलने वाली बसें कई जिलों और राज्यों की सीमाएं पार करती हैं। ऐसे में सवाल है कि रास्ते में परिवहन विभाग की जांच के दौरान इन बसों की वास्तविक यात्री क्षमता, परमिट, फिटनेस, टैक्स और माल लोडिंग की जांच सिर्फ खानापूरी के लिए होती है।
धड़ल्ले से जिला, मंडल और राज्य की सीमाएं पार कर जाती हैं और जब हादसे होते हैं, तब जिम्मेदार चार दिनों के लिए नींद से जागते हैं और फिर कुंभकरण की नींद में सो जाते हैं। बस संचालक लगातार यात्रियों की जान से खिलवाड़ करते रहते हैं।
