ग्रेटर नोएडा के 490 परिषदीय स्कूलों में विशेष कक्षाएं शुरू, छात्रों की लिस्ट बनाकर होगी 'जैसी जरूरत, वैसी पढ़ाई'
ग्रेटर नोएडा के 490 परिषदीय विद्यालयों में कमजोर छात्रों के लिए विशेष कक्षाएं शुरू की गई हैं। इन कक्षाओं का ...और पढ़ें

स्कूलों में विशेष कक्षाएं संचालित की जाएंगी, ताकि बच्चे आगामी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
कमजोर छात्रों की पहचान कर विशेष कक्षाएं संचालित होंगी।
गणित, हिंदी, अंग्रेजी जैसे बुनियादी विषयों पर रहेगा फोकस।
अभिभावकों को बच्चों की प्रगति की जानकारी दी जाएगी।
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। जिले के परिषदीय विद्यालयों में विद्यार्थियों का शैक्षिक स्तर सुधारने की कवायद शुरू हो गई है। अर्धवार्षिक परीक्षाओं से पहले पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों को चिह्नित कर उनकी विषयवार कमियों को दूर किया जाएगा। इसके लिए स्कूलों में विशेष कक्षाएं संचालित की जाएंगी, ताकि बच्चे आगामी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
जिसको जैसी जरूरत, उसे वैसी मदद
जिले में कुल 490 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इन सभी स्कूलों में प्रथम सत्र की परीक्षाएं पूरी हो चुकी हैं। अब शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे विद्यार्थियों के प्रदर्शन का आकलन कर पढ़ाई में कमजोर बच्चों की अलग सूची तैयार करें। इस सूची के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किस विद्यार्थी को किस विषय में ज्यादा मदद की जरूरत है।
बुनियादी विषयों पर विशेष फोकस
शिक्षक कमजोर छात्रों के सीखने के स्तर के अनुसार अतिरिक्त अभ्यास कराएंगे। विशेष कक्षाओं में न केवल पाठ्यक्रम को दोबारा सरल तरीके से समझाया जाएगा, बल्कि शैक्षिक गतिविधियों, वर्कशीट और अभ्यास प्रश्नों के जरिए उनकी समझ को मजबूत किया जाएगा। गणित, हिंदी और अंग्रेजी जैसे बुनियादी विषयों पर विशेष फोकस रहेगा।
अभिभावकों को दी जाएगी पूरी जानकारी
विभागीय योजना के अनुसार परीक्षा परिणाम तैयार होने के बाद प्रत्येक विद्यालय में विद्यालय प्रबंध समिति (एसएमसी) की बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में अभिभावकों को बच्चों की शैक्षिक उपलब्धियों और कमजोरियों की जानकारी दी जाएगी। इससे अभिभावक भी घर पर बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दे सकेंगे और शिक्षकों के साथ मिलकर सुधार के प्रयास कर सकेंगे।
"परीक्षा परिणाम के आधार पर विद्यार्थियों की शैक्षिक स्थिति का आकलन किया जा रहा है। कमजोर बच्चों की पहचान कर समय रहते उनकी कमियों को दूर कराने पर जोर है, ताकि अर्धवार्षिक परीक्षा में सभी बच्चों का प्रदर्शन बेहतर हो सके।"
-राहुल पंवार, बीएसए।
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