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साहस और सुरक्षा सुविधा की कमी ने ली इंजीनियर युवराज की जान, मौके पर मौजूद दमकल-SDRF कर्मी नहीं बचा सके जान

Published: Sun, 18 Jan 2026 07:55 PM (IST)

ग्रेटर नोएडा में इंजीनियर युवराज मेहता की निर्माणाधीन बेसमेंट के पानी में डूबने से मौत हो गई। मौके पर मौजूद ...और पढ़ें

मृतक इंजीनियर युवराज मेहता। फाइल फोटो सौजन्य- स्वजन

मृतक इंजीनियर युवराज मेहता। फाइल फोटो सौजन्य- स्वजन

HighLights

  1. इंजीनियर युवराज मेहता की बेसमेंट में डूबने से मौत हुई।

  2. दमकल, SDRF और पुलिस की संवेदनहीनता सामने आई।

  3. बचाव कार्य में देरी और संसाधनों की कमी रही।

जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। नाॅलेज पार्क कोतवाली क्षेत्र निवासी इंजीनियर युवराज मेहता (27) की निर्माणाधीन बेसमेंट के पानी में कार गिरने से मौत की घटना में मौके पर मौजूद दमकल, एसडीआरएफ और पुलिस की मानवीय संवेदनहीनता सामने आई है। तीनों विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों समेत करीब 80 लोगाें का स्टाफ मौके पर मौजूद रहा।

डिलीवरी बॉय की तरह साहस न दिखा सके

इनमें से किसी से कई को तैराकी भी आती होगी। जिस तरह से ऑनलाइन कंपनी में काम करने वाले डिलीवरी बाॅय मुनेंद्र ने प्रयास किया, उसी तरह इनमें से किसी ने भी साहस दिखाया होता तो युवराज की जान बचाई जा सकती थी। दमकल व एसडीआरएफ के पास आपदा से निपटने के संसाधन कम पड़ गए। करीब दो घंटे के संघर्ष करने के बाद युवराज की सांसों की डोर उसके पिता राजकुमार मेहता की आंखों के सामने ही टूट गई।

पिता को फोन कर मांगी थी मदद

नोएडा के सेक्टर-150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसायटी निवासी पिता राजकुमार मेहता खुद घटना के प्रत्यक्षदर्शी हैं। रुंधे गले व भीगी आंखों के साथ उन्होंने घटना बताई। कहा बेटा युवराज कार समेत करीब 12 बजे निर्माणाधीन बेसमेंट में भरे पानी में गिरा था। कार करीब 30 फीट गहरे पानी में 70 फीट दूरी तक पानी में पहुंच गई। बेटे ने साहस दिखाया, कार की खोल कर निकला। फिर खिड़की बंद कर दी। कार का बैलेंस बना रहे, इसलिए कार की छत पर लेट गया। फिर 12.20 बजे मोबाइल फोन पर पिता के पास काॅल कर अपनी स्थिति बताई।

क्रेन पर चढ़ कर सिर्फ रस्सी फेंकते रहे

पिता कंट्रोल रूम पर सूचना देकर उसे ढूंढने निकले, युवराज अपनी लोकेशन बताने के लिए मोबाइल की टार्च चलाए था। फिर भी कोहरे के कारण घटना स्थल ढूंढने में करीब 20 मिनट गुजर गए। डायल 112 पर सूचना के बाद करीब 12.45 बजे नालेज पार्क प्रभारी निरीक्षक सर्वेश सिंह पहुंचे। उन्होंने दमकल व एसडीआरएफ की टीम को बुलाई। दमकल विभाग द्वारा मंगाई गई क्रेन सिर्फ 40 फीट तक ही दूरी तय कर पाई। कर्मी क्रेन पर चढ़ कर सिर्फ रस्सी फेंकते रहे, लेकिन युवराज तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी का एरिया कवर करने वाली क्रेन नहीं मंगाई गई।

घने कोहरे के कारण देर से पहुंची मदद

बेसमेंट से सटे नाले से करीब 10 फीट नीचे पानी था...अंधेरा, पानी में खड़ी झाड़ियों और ठंडे पानी के कारण एसडीआरएफ कर्मी भी वोट से उतरने का जोखिम उठाने से बचते रहे। यह सभी सिर्फ ड्यूटी के नाम पर खानापूर्ति करते रहे, यदि साहस दिखाते हुए एक भी व्यक्ति पानी में उतरता तो युवराज की जान बच जाती। इन हवाहवाई प्रयासों में करीब पौने दो बज गए और युवराज कार समेत पानी में डूब गया। गाजियाबाद स्थित एनडीआरएफ टीम को भी करीब दो बजे सूचना मिली। घने कोहरे के कारण टीम को पहुंचने में करीब डेढ़ घंटा लग गया।

तब तक रवाना हो गई दमकल की टीम

मौके पर पहुंचते ही टीम के कर्मियों ने जेसीबी से वोट उतरने का स्थान बनवाया। 15 मिनट बाद कर्मी वोट से उतरे और 40 मिनट में युवराज को तलाश कर लगभग चार बजे बाहर निकाल कर अस्पताल भेजवा दिया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल एनडीआरएफ के एक कर्मी ने बताया कि उनकी टीम पहुंची तब दमकल की टीम मौके पर मौजूद नहीं थी।

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