बचाओ-बचाओ चिल्लाते रहे युवराज: पिता के सामने डूब गया बेटा, इंजीनियर की मौत हादसा या लापरवाही?
गौतमबुद्धनगर में इंजीनियर युवराज मेहता की डूबने से मौत ने आपदा प्रबंधन की पोल खोल दी है। निर्माणाधीन बेसमेंट में ...और पढ़ें
-1768717937263_m.webp)
मृतक इंजीनियर युवराज मेहता। फाइल फोटो सौजन्य- स्वजन

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक राजस्व देने वाला गौतमबुद्धनगर जिला मुसीबत में फंसे लोगों की जान बचाने के लिए संसाधनों की उपलब्धता के मामले में शून्य है। इंजीनियर युवराज मेहता की मौत की घटना ने तीन प्राधिकरण, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और दमकल विभाग के आपदा की स्थिति में राहत व बचाव की तैयारियों के दावों की हकीकत उजागर की है।
दो घंटे तक जान बचाने की गुहार लगाते रहे युवराज
निर्माणाधीन बेसमेंट के पानी में कार पर खड़े होकर करीब दो घंटे जान बचाने की गुहार लगाते-लगाते युवराज डूब गया। मौके पर पुलिस, दमकल कर्मी और एसडीआरएफ की टीम के कर्मी बस किनारे पर खड़े होकर भागदौड़ करते रहे। आखिरकार गाजियाबाद से एनडीआरएफ की टीम को बुलाया गया। तब तक काफी देर हो चुकी थी और पिता राज कुमार मेहता के सामने बेटा युवराज कार समेत डूब चुका था।
-1768718855846.jpg)
रेस्क्यू ऑपरेशन करते बचाव दल के कर्मचारी।
घटना करीब 12 बजे के आसपास की है। युवराज कार समेत निर्माणाधीन बेसमेंट में भरे पानी में जा गिरा था। उसने पिता को फोन लगाया, डायल 112 पर कॉल के बाद वह मौके पर पहुंच गए। स्थानीय पुलिस, दमकल कर्मी और उसके बाद एसडीआरएफ की टीम करीब एक बजे तक मौके पर पहुंच गई। लोगों की भी भीड़ जुट गई।
तीनों अथॉरिटी के पास नहीं थे बचाव संसाधन
पुलिस के पास उसे बाहर निकालने के कोई संसाधन नहीं थे, स्थानीय गोताखोर अंदर घुसकर युवराज के पास तक पहुंचने की हिम्मत नहीं जुटा सके, कुछ दूर अंदर जाने के बाद ही वापस आ गए। दमकल व एसडीआरएफ की टीम पहुंची, उनके पास पास भी पर्याप्त संसाधन नहीं थे। क्रेन आदि भी मंगाई गईं, लेकिन युवराज तक पहुंच नहीं हो सकी।
गाजियाबाद से बुलाई गई एनडीआरएफ की टीम
तीनों अथॉरिटी के पास भी ऐसे कोई संसाधन नहीं थे। इस बीच बेटे की मदद लगाने की गुहार सुनकर पिता राजकुमार बचाव दल के कर्मियों से किसी भी तरह बेटे की जान बचाने की गुहार लगाते रहे। लोगों के पास फोन भी करते दिखे। ऐसे में प्रभारी निरीक्षक सर्वेश सिंह ने गाजियाबाद से एनडीआरएफ की टीम बुलाई। तब तक कार समेत युवराज डूब चुका था।
-1768719043992.jpg)
निर्माणाधीन बेसमेंट के लिए खोदे गए गड्डे में भरा लबालब पानी।
उसे बाहर निकालने में एनडीआरएफ की टीम को करीब दो घंटे ले गए। प्रत्यक्षदर्शी मुनेंद्र का कहना था पुलिस, दमकल समेत अन्य टीमों के कर्मी मूकदर्शक बने रहे, कोई भी अंदर जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका। पिता का भी कहना है कि समय रहते पर्याप्त संसाधन होते और प्रयास किया जाता तो बेटे की जान बच जाती।
ये भी पढ़ें-
