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'लेआउट से छेड़छाड़ और इमरजेंसी एग्जिट बंद', ग्रेटर नोएडा में दौड़ रहीं बसों में चल रहा सीटों का 'खेल'

By Ashish ChaurasiyaEdited By: Kapil Kumar
Published: Fri, 25 Sep 2026 08:44 AM (IST)

ग्रेटर नोएडा में बस संचालक अधिक कमाई के लिए बसों में 6 से 10 अतिरिक्त सीटें लगवा रहे हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।

ग्रेटर नोएडा में दौड़ रहीं बसों में अतिरिक्त सीटों का खेल। AI जनरेटेड

ग्रेटर नोएडा में दौड़ रहीं बसों में अतिरिक्त सीटों का खेल। AI जनरेटेड

HighLights

  1. बस संचालक अधिक कमाई हेतु 6-10 अतिरिक्त सीटें लगवा रहे हैं।

  2. स्वीकृत लेआउट में बदलाव, आपातकालीन निकास को बाधित किया जा रहा है।

  3. आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस सुरक्षा खामियों को अनदेखा कर रहे हैं।

आशीष चौरसिया, ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा में लंबे रूट के साथ रोजमर्रा की आवाजाही में इस्तेमाल हो रही सिंगल और डबल डेकर बसों में कमाई बढ़ाने के लिए सीटों की संख्या बढ़ाने का खेल चल रहा है।

जानकारी के अनुसार, बस की मूल बॉडी और स्वीकृत सिटिंग लेआउट के साथ छेड़छाड़ कर, कहीं 6 तो कहीं 10 अतिरिक्त सीटें संचालक लगवा रहे हैं। इससे संचालक स्वीकृत क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने की व्यवस्था कर अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं।

यात्रियों की जिंदगी से खिलवाड़

बता दें कि स्वीकृत सिटिंग लेआउट में परिवर्तन कर केवल अतिरिक्त सीट लगाने तक सीमित नहीं है। बस के अंदर सीटों का लेआउट बदलने से यात्रियों के आवागमन के लिए उपलब्ध जगह भी प्रभावित होती है। साथ ही आपातकालीन निकास या यात्रियों के उतरने-चढ़ने के रास्ते में बदलाव किया जा रहा है।

डबल डेकर बसों में संचालक पांच सीट के स्लीपर को परिवर्तित कराकर छह सीट लगवा रहे हैं। निर्धारित डिजाइन में छेड़छाड़ कर आगे और पीछे की तरफ अतिरिक्त स्लीपर लगाने का खेल चल रहा है।

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बसों में लगाई जा रही अतिरिक्त सीटें

इसी तरह से सिंगल डेकर बसों में आगे की ओर चार सीट और पीछे की ओर छह अतिरिक्त सीटें लगाकर मानक के लेआउट से खिलवाड़ किया जा रहा है। इस दौरान बसों में बने हुए कंपनी के आपातकालीन द्वार सीट के कारण बंद कर दिए जाते हैं और जब हादसे होते हैं, तो यात्रियों को निकलने तक की जगह नहीं मिलती है। ऐसे में जान तक गंवानी पड़ती है।

आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस की ओर से जांच के दौरान भी गंभीर खामी को अनदेखा कर दिया जाता है। इसके चलते और भी संचालकों को मनोबल बढ़ा रहता है।

आरटीओ को इन बिंदुओं पर करनी चाहिए जांच

  • बस के पंजीकरण प्रमाणपत्र में दर्ज स्वीकृत यात्री क्षमता और वास्तविक सीटों का मिलान
  • वाहन के टाइप अप्रूवल/बस बाडी प्रमाणपत्र में स्वीकृत सिटिंग लेआउट की जांच
  • एजेंसी से तैयार होकर निकली बस और वर्तमान बस के सिटिंग लेआउट में अंतर की जांच
  • अतिरिक्त सीट या स्लीपर लगाए जाने की स्थिति में उसके लिए वैध स्वीकृति की जांच
  • इमरजेंसी एग्जिट, मुख्य दरवाजे और यात्रियों के आवागमन के रास्ते की जांच
  • सीट बढ़ाने के लिए बस की बाडी अथवा संरचना में किए गए बदलावों की जांच

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