गौतमबुद्ध नगर में गहराता भूजल संकट, अवैध प्लांट सुखा रहे धरती की कोख
गौतमबुद्ध नगर में बढ़ती आबादी और औद्योगिक विकास से भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। 20 साल में पानी 40 फीट से 140 फीट नीचे चला गया है।
-1774283977825_m.webp)
गौतमबुद्ध नगर में बढ़ती आबादी और औद्योगिक विकास से भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। इमेज एआई
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्ध नगर में जनसंख्या बढ़ने के साथ-साथ औद्योगिक विकास प्राधिकरण का निर्माण क्षेत्र भी बढ़ रहा है। गांव और कृषि भूमि प्राधिकरण की परियोजना का हिस्सा बनकर कंक्रीट के जंगल में बदलते जा रहे हैं। दो नदियों वाले जिले गौतमबुद्ध नगर में 20 साल पहले 40 फीट की गहराई पर पानी निकल जाता था, लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि 140 फीट नीचे भी पानी नहीं मिलता।
अंधाधुंध दोहन की वजह से जिले में जल स्तर नीचे जा रहा है। गौतमबुद्ध नगर को पूर्व में डार्क जोन घोषित किया जा चुका है। सबसे बड़ी चुनौती गौतमबुद्ध नगर की लाखों की आबादी के लिए पेय जल की है। कृषि क्षेत्र लगातार सिकुड़ रहा है। भू जल रिचार्ज के परंपरागत साधन का अस्तित्व मिटता जा रहा है।
इसका सीधा असर भूगर्भ जल पर पड़ रहा है। हालांकि प्राधिकरणों ने भूगर्भ जल का दबाव कम करने के लिए गंगाजल परियोजना के जरिए शहरी क्षेत्र की जलापूर्ति की मांग को पूरा करने की कोशिश की है, लेकिन भूजल रिचार्ज के स्रोत नष्ट होने या अतिक्रमण होने के कारण भूजल स्तर में सुधार नहीं हो रहा है।
वह दिन दूर नहीं जब लोगों को प्यास बुझाने के लिए जल संकट का सामना करना पड़ेगा। अवैध तरीके से करीब चार हजार वाशिंग स्टेशन व आरओ प्लांट धरती की कोख सूखा रहे हैं। 2019 की एक रिपोर्ट के मुताबिक जल स्तर 6.35 मीटर नीचे जा चुका है। 2019 के बाद भूजल का स्तर और भी नीचे चला गया है। भविष्य में पानी के भीषण संकट के साफ संकेत है।
चार हजार से अधिक अवैध तरीके से वाशिंग व आरओ प्लांट चल रहे हैं। जो रोजाना धरती के गर्भ को खाली कर रहे हैं, जिसकी लगातार शिकायत की जा रही है बावजूद इसके अधिकारियों की मिली भगत से खेल चल रह है।
-प्रदीप ढालिया, पर्यावरणविद
लगातार भूजल का दोहन हो रहा है जबकि भूजल को रिचार्ज करने के श्रोत नष्ट होने या अतिक्रमण होने की जद में है। भूजल स्तर में सुधार के लिए अवैध वाशिंग स्टेशन व आरओ प्लांट पर रोक लगाने की जरूरत है।
| जिले में पेयजल संसाधन और स्थिति | |
|---|---|
| पाइप पेयजल परियोजनाएं | 22 |
| सरकारी नलकूप | 84 |
| जिले में हैंडपंप | 14,800 |
| अवैध वाशिंग स्टेशन व आरओ प्लांट | 3,500 |
| ग्रेटर नोएडा में पानी की मांग और आपूर्ति (एमएलडी) | |
|---|---|
| ग्रेटर नोएडा ईस्ट की मांग | 267.45 |
| ग्रेटर नोएडा वेस्ट की मांग | 188.56 |
| कुल मांग | 456.01 |
| वर्तमान में मांग | 319 |
| ट्यूबवेल से आपूर्ति | 197 |
| गंगाजल आपूर्ति | 210 |
| कुल आपूर्ति | 407 |
यह भी पढ़ें: नोएडा में शुरू होगी 24 स्पीड पोस्ट सेवा: समय पर डिलीवरी, देरी होने पर ग्राहकों को मिलेगा मुआवजा
