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यमुना प्राधिकरण के खिलाफ चौथे दिन भी किसानों का धरना जारी, अब महापंचायत की चेतावनी

Published: Fri, 09 Oct 2026 01:16 PM (IST)Updated: Fri, 09 Oct 2026 01:19 PM (IST)

डूंगरपुर-रीलका गांव के पास किसानों का अनिश्चितकालीन धरना चौथे दिन भी जारी रहा, जिसमें यमुना प्राधिकरण पर उनकी समस्याओं को अनसुना करने का आरोप लगाया गया।

सांकेतिक तस्वीर (AI-Generated Image)

सांकेतिक तस्वीर (AI-Generated Image)

HighLights

  1. किसानों का अनिश्चितकालीन धरना चौथे दिन भी जारी

  2. यमुना प्राधिकरण पर समस्याओं को अनसुना करने का आरोप

  3. मांगें पूरी न होने पर महापंचायत की चेतावनी

संस, बिलासपुर। ग्रेटर नोएडा के डूंगरपुर-रीलका गांव के पास किसानों का अपनी मांगों को लेकर गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। दनकौर अनाज मंडी के समीप 5 अक्टूबर से शुरू हुआ क्षेत्रीय किसानों का अनिश्चितकालीन धरना बृहस्पतिवार को चौथे दिन भी पूरे जोश के साथ जारी रहा।

किसान अपनी जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए डटे हुए हैं, लेकिन प्रशासन की अनदेखी से उनमें भारी रोष है।

अधिकारियों की अनदेखी से टूट रहा सब्र का बांध

गुरुवार को धरने की अध्यक्षता चरण सिंह ने की, जबकि मंच का संचालन जिला अध्यक्ष पंकज शर्मा द्वारा किया गया। धरने पर बैठे किसानों ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि वे पिछले चार दिनों से दिन-रात अपना कामकाज छोड़कर धरने पर बैठे हैं।

लेकिन, यमुना प्राधिकरण का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी अब तक उनकी सुध लेने या उनकी समस्याएं सुनने नहीं पहुंचा है। किसानों का कहना है कि प्राधिकरण का यह रवैया पूरी तरह से तानाशाही भरा है।

क्या हैं किसानों की मांगें?

  • गांवों में किसानों की पुश्तैनी आबादी (बसे हुए घरों) का प्राधिकरण द्वारा सही तरीके से नियमितीकरण और निस्तारण किया जाए।
  • जिन किसानों को विस्थापित किया जा रहा है या जिनकी जमीनें ली गई हैं, उन्हें वादे के मुताबिक शिफ्टिंग के लिए प्लॉट जल्द उपलब्ध कराए जाएं।
  • गांवों के चारों ओर 'लाल डोरा' (आवासीय सीमा) तय किया जाए ताकि किसानों को भविष्य में घर बनाने में कोई कानूनी अड़चन न आए।

मांगें नहीं मानी तो होगी आर-पार की लड़ाई

किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर प्राधिकरण ने जल्द ही उनकी समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं निकाला, तो इस आंदोलन और भी बढ़ेगा। किसानों ने साफ कहा है कि जल्द ही एक 'महापंचायत' की घोषणा की जाएगी, जिसमें आस-पास के दर्जनों गांवों के किसान शामिल होंगे। जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, धरना खत्म नहीं होगा।

इस मौके पर रमेश कसाना, दया प्रधान, रामवीर सिंह, हेमराज कसाना, नीरज कसाना, अतर सिंह प्रधान और सरजीत कसाना सहित भारी संख्या में क्षेत्रीय किसान मौजूद रहे और प्रशासन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।

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