जागरण संवाददाता, नोएडा :

जेपी इंफ्राटेक मामले में बुधवार को दिल्ली में कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (सीईसी) की पहली बैठक आयोजित हुई। इसमें होम बायर्स भी शामिल हुए। इस दौरान कई ¨बदुओं पर चर्चा हुई और बायर्स ने भी अपने सुझाव दिए।

बैठक के दौरान सबसे पहले अनुज जैन को आइआरपी (इंसोल्वेंसी रिज्योलूशन प्रोफेशनल) से आरपी (रिज्योलूशन प्रोफेशनल) के तौर पर प्रमोट करने को लेकर बैंक और बायर्स ने विरोध किया, लेकिन बैठक में इसको लेकर कोई निर्णय नहीं हो सका। बताया जा रहा है कि वो¨टग माध्यम से इसपर निर्णय लिया जा सकता है। जेपी इंफ्राटेक और हाल ही में जेपी एसोसिएशन कंपनी को इंसोल्वेंसी में डाले जाने के बाद अधूरे प्रोजेक्ट का काम रुकने की संभावना पर बायर्स ने ¨चता जताई। जेपी इंफ्राटेक मामले में चल रही अदालती प्रक्रिया में भारी खर्च बायर्स को वहन करना पड़ रहा है, बैठक में इस मुद्दे को भी उठाया गया। इस दौरान बताया गया कि तीन-चार हजार बायर्स को कंपनी ने ऑफर ऑफ पजेशन जारी कर दिया है, बैंक की तरफ से इन बायर्स को सीईसी से बाहर रखने का सुझाव दिया गया। हालांकि, इस ¨बदु पर कोई फैसला नहीं लिया जा सका।

होमबायर्स की तरफ से फिर से शुरू होने वाली बिड प्रक्रिया के दौरान कुछ सुझावों को शामिल करने की बात कही गई। जिसमें सुपर एरिया का अतिरिक्त शुल्क न लिए जाने, कार पार्किंग शुल्क न वसूले जाने, सर्विस टैक्स और जीएसटी वापस किए जाने और परियोजना में देरी पर हर्जाना दिए जाने आदि सुझाव दिए गए।

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